अमित शाह का नया कानून- अब कश्मीरी हिंदू और POK से विस्थापित बैठेंगे विधानसभा में
इसी बिल पर आज अमित शाह और सौगत राय के बीच तीखी बहस हो गई. शाह ने एक विधान, एक प्रधान, एक निशान के नारे का बचाव किया.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने आज लोकसभा में जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2023 (Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2023) पेश किया. बिल विस्थापित कश्मीर हिंदुओं और पाक अधिकृत कश्मीर (POK) से विस्थापितों से जुड़ा है. बिल में ‘कश्मीरी हिंदू’ शब्द का इस्तेमाल नहीं हुआ है. कश्मीरी ‘प्रवासियों’ की बात की गई है. पाठक जानते ही हैं कि कश्मीरी प्रवासी प्रायः वो हिंदू/गैर मुस्लिम थे, जिन्हें घाटी में आतंक के सिर उठाने के बाद अपने घर छोड़ने पर मजबूर किया गया था. इसीलिए हम समझ की आसानी के लिए कश्मीरी हिंदू शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं. लोकसभा में इस बिल को पेश करने के दौरान सत्ता और विपक्ष में तीखी बहस देखने को मिली. अमित शाह ने एक विधान, एक प्रधान, एक निशान की बात दोहराई. क्योंकि टीएमसी सांसद सौगत राय ने इस नारे को राजनैतिक कह दिया था.
क्या है बिल में?
जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2023 को इस साल 26 जुलाई को लोकसभा के पटल पर रखा गया था. अधिनियम जम्मू और कश्मीर राज्य का दो संघ शासित क्षेत्रों में पुनर्गठन का प्रावधान करता है - जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख.
प्रवासी कश्मीरी हिंदुओं के लिए बिल में क्या है?इसमें विस्थापित कश्मीरी समुदाय के लिए दो सीटें रिजर्व करने का प्रावधान है. विधेयक के अनुसार, उपराज्यपाल कश्मीरी प्रवासी सुमदाय से आने वाले दो सदस्यों को विधानसभा में नॉमिनेट कर सकते हैं. इसमें एक महिला सदस्य भी होनी चाहिए.
कश्मीरी प्रवासी किन्हें माना जाएगा?बिल के मुताबिक कश्मीरी प्रवासी उन लोगों को माना जाएगा, जो 1 नवंबर 1989 के बाद से कश्मीर घाटी या जम्मू और कश्मीर राज्य के किसी अन्य हिस्से से विस्थापित हुए हैं. और उनका नाम राहत आयुक्त कार्यलय में रजिस्टर्ड हो. अब ऐसे लोग जिनका नाम नीचे दिये गए तीन कारणों से रजिस्टर नहीं हुआ हो, वे भी प्रवासी माने जाएंगे अगर -
1. वो शासकीय सेवा थे और तबादला होता रहा/दफ्तर का स्थान बदलता रहा;
2. वो काम के चलते कहीं चले गए; और
3. वो जिस जगह से वे विस्थापित हुए हैं वहां उनकी अचल संपत्ति है लेकिन अशांत हालात होने के कारण वे वहां नहीं रह पा रहे.
पीओके से विस्थापितों के लिए प्रावधान
विधेयक में पाक अधिकृत कश्मीर (POK) के विस्थापितों के लिए विधानसभा में एक सीट आरक्षित करने का प्रावधान है. POK से विस्थापित ऐसे व्यक्ति को माना जाएगा, जो पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर से विस्थापित हुए और अब कहीं और रह रहे हैं. ऐसे लोगों के उत्तराधिकारियों को भी POK से विस्थापित माना जाएगा. बस एक शर्त है. विस्थापन 1947-48, 1965 या 1971 में अशांति या ऐसी किसी गड़बड़ी की आशंका के कारण हुआ हो.
विधानसभा में सीटों की स्थिति
31 अक्टूबर 2019 को केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले जम्मू कश्मीर विधानसभा में कुल 87 सीटें थी. कश्मीर की 46, जम्मू की 37 और लद्दाख की 4 सीटें थीं. लेकिन अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद जम्मू और कश्मीर व लद्दाख को दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट दिया गया. लद्दाख की चार सीटें निकलने से जम्मू और कश्मीर विधानसभा में सीटों की संख्या हो गईं 83.
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की दूसरी अनुसूची विधानसभाओं में सीटों की संख्या का प्रावधान करती है. जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 में 83 सीटें करने के लिए 1950 अधिनियम की दूसरी अनुसूची में संशोधन किया गया. इसमें अनुसूचित जाति (एससी) के लिए छह सीटें रिजर्व की गईं लेकिन अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए कोई सीट रिजर्व नहीं की गई.
जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2023 विधेयक में इस चीज़ में बदलाव किया गया. अब राज्य की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 90 हो जाएंगी. इसमें अनुसूचित जनजाति के लिए 9 सीटें रिजर्व हैं और अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाकर 7 कर दी गई हैं.
लोकसभा में अमित शाह और सौगत राय में हुई तीखी बहस
विधेयक पेश करने के दौरान लोकसभा में तीखी बहस भी देखने को मिली. टीएमसी सांसद सौगत राय ने विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए. उन्होंंने कहा कि बीजेपी ने जम्मू और कश्मीर की आवाम के लिए नहीं बल्कि अपने चुनावी फायदे के लिए अनुच्छेद 370 को हटाया है. सौगत राय ने कहा कि जनसंघ के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नारा था - एक निशान, एक प्रधान और एक विधान. यह एक राजनीतिक नारा था.
इस पर अमित शाह ने जवाब देते हुए इसे आपत्तिजनक बताया. उन्होंने सौगत राय को कहा, दादा आपकी उम्र हो चुकी है. शाह बोले,
“एक देश में दो प्रधानमंत्री, दो संविधान और दो झंडे कैसे हो सकते हैं? जिन लोगों ने ऐसा किया, उन्होंने गलत किया. पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे ठीक किया. हम 1950 से कह रहे हैं कि देश में 'एक प्रधान, एक निशान, एक विधान' होना चाहिए और हमने यह किया.”
बता दें, लोकसभा का शीतकालीन सत्र 4 दिसंबर से शुरू हुआ है. ये 22 दिसंबर तक चलेगा. जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने को लेकर भी आज सवाल पूछा गया. इसपर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि विधानसभा चुनाव को लेकर अंतिम निर्णय चुनाव आयोग लेगा.
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