इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश धर्मांतरण कानून के तहत चार्ज झेल रहे एकव्यक्ति को जमानत दे दी है. इस व्यक्ति पर अपनी पार्टनर को जबरन धर्म परिवर्तन केलिए मजबूर करने और दुष्कर्म करने का आरोप है. इंडिया टुडे के रिपोर्टर अभिषेकमिश्रा की ख़बर के मुताबिक जस्टिस राहुल चतुर्वेदी की सिंगल जज बेंच ने कहा कि अभीतक पीड़िता का धर्म परिवर्तन तो हुआ ही नहीं है. साथ ही अदालत ने ये भी कहा कि“याचिकाकर्ता (जमानत याचिका) और पीड़िता पिछले करीब 4 साल से रिलेशन में थे. तब इससंबंध में (धर्मांतरण का) कोई कानून नहीं था और न ही पीड़िता की तरफ से कोई आपत्तिथी. कानून आने के बाद अचानक से वह अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो गईं. पिछले 4साल में उन दोनों के बीच जो भी संबंध रहे, उसमें पीड़िता स्वेच्छा से शामिल रहीं.”पीड़िता और आरोपी महोबा के एक मोहल्ले में साथ रहते थे. पीड़िता का आरोप है कि इसदौरान आरोपी ने उसके कुछ आपत्तिजनक फोटोग्राफ्स और वीडियो लिए और बाद में इसके दमपर वो ब्लैकमैल करता था और शारीरिक संबंध बनाता था. इसके अलावा ये बात भी रिकॉर्डमें आया कि पिछले साल 8 दिसंबर को पीड़िता की शादी किसी और व्यक्ति से हो गई थी.शादी के बाद वह दिल्ली चली गई. इसके कुछ समय बाद पीड़िता दिल्ली से वापस उरई आ गईऔर तब वह आरोपी के साथ थी. इसी के बाद उसने आरोप लगाया कि आरोपी उस पर धर्मपरिवर्तन का दबाव डाल रहा है. इन सारे तथ्यों को नज़र में रखते हुए कोर्ट ने आरोपीको जमानत देने का फैसला किया. UP का धर्मांतरण कानून बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकारइसी साल जनवरी में धर्मांतरण कानून (Uttar Pradesh Prohibition of UnlawfulConversion of Religion Ordinance, 2020 ) लाई थी. इस कानून के आने के बाद इलाहाबादहाई कोर्ट में इसे रद्द करने की मांग को लेकर एक याचिका भी लगी थी. इसके जवाब मेंसरकार ने कोर्ट में जो हलफनामा दाखिल किया, उसमें कहीं भी ‘लव जिहाद’ शब्द का जिक्रनहीं था. हलफनामे के अनुसार लव जिहाद के नाम से किसी को भी गिरफ्तार करने काप्रावधान नहीं है. इस हलफनामे में यूपी सरकार यह समझाने की कोशिश करती दिखती है किकानून को एक खास वजह से लाया गया है और इसके दुरुपयोग का खतरा नहीं है. सरकार काकहना है कि यह कानून गलत बयानी, ताकत, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, पैसे देकर या दूसरेतरीकों से धोखाधड़ी करने और शादी के नाम पर धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए है.