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म्यांमार के 151 सैनिक सीमा पारकर मिज़ोरम में क्यों घुसे हैं?

ये पहली बार नहीं है जब म्यांमार के सैनिक भागकर भारत आए हैं.

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31 दिसंबर 2023 (अपडेटेड: 31 दिसंबर 2023, 04:46 PM IST)
myanmar soldiers in mizoram
16 नवंबर को एक ऐसी ही झड़प के बाद भारत आए म्यांमार के 29 सैनिक. (फ़ोटो - इंडिया टुडे NE)
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पिछले 48 घंटों में म्यांमार (Myanmar) के 151 से ज़्यादा सैनिक बहुत सारे हथियार-बारूद के साथ मिज़ोरम (Mizoram) भागकर आए हैं. सीमा पार कर आने की वजह ये कि उनके मिलिट्री कैंप पर एक विद्रोही गुट ने क़ब्ज़ा कर लिया है. ये पहली बार नहीं है जब म्यांमार के सैनिक भारत में भागकर आए हैं.

लड़ाई क्या है?

भारत की सीमा से सटा म्यांमार में एक गांव है - पर्व. इसी गांव के पास म्यांमार सेना के अड्डे पर अराकान आर्मी (AA) के उग्रवादियों ने क़ब्ज़ा कर लिया है. अराकान आर्मी, रखाइन राज्य में स्थित जातीय संगठन यूनाइटेड लीग ऑफ़ अराकान की सैन्य शाखा है. ये ग्रुप अपनी जाति की पहचान के लिए लड़ाई, बराबरी, न्याय और आज़ादी के लिए लड़ते हैं. बीते एक दशक में ये संगठन म्यांमार में सबसे ताक़तवर जातीय समूह बन गया है. देश की आर्मी और इस संगठन के बीच गोलीबारी-संघर्ष की ख़बरें आती रहती हैं.

शुक्रवार, 29 दिसंबर की देर रात म्यांमार सेना के लगभग 151 जवान - जिन्हें तातमाडॉ कहते हैं - दक्षिणी मिज़ोरम के लॉन्ग्टलाई ज़िले के तुइसेंटलांग गांव से भारत-म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा में घुस आए.

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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उनके हथियारों की जानकारी दी. न्यूज एजेंसी पीटीआई को उस अधिकारी ने बताया,

"दो समूह में सैनिक आए थे. लाइट इन्फ़ेंट्री रेजिमेंट के थे. 12 अफ़सर और 71 बाक़ी रैंक्स के फ़ौजी. उनके पास कुल 83 हथियार थे - राइफ़ल, पिस्तौल, रॉकेट ग्रेनेड, मोर्टार, स्नाइपर राइफ़ल, मीडियम मशीन गन (MMG), लाइट मशीन गन (LMG) और हथगोले. जवानों का दूसरा समूह भी लाइट इन्फ़ेंट्री रेजिमेंट का है. इनमें भी 9 अफ़सर और 59 सैनिक थे."

पुलिस अधिकारी ने ये भी बताया कि पिछले कुछ दिनों से भारतीय सीमा के क़रीबी इलाक़ों में म्यांमार सेना और अराकान सेना के लड़ाकों के बीच गोलीबारी हो रही थी.

जो फ़ौजी आए हैं, उनमें से नौ घायल हैं. जानकारी है कि लॉन्ग्टलाई ज़िले के पुलिस अफ़सरों ने परवा गांव में असम राइफ़ल्स के अफ़सरों को सूचित कर दिया है और रविवार, 31 दिसंबर को उन्हें वापस म्यांमार भेजा जा सकता है.

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भारत और म्यांमार के बीच 1,600 किलोमीटर की ज़मीनी सीमा और बंगाल की खाड़ी में समुद्री सीमा है. ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों की वजह से लंबे समय से ही दोनों देशों के बीच रिश्ते अच्छे हैं. दोनों तरफ़ के प्रतिनिधि नियमित रूप से मिलते हैं – द्विपक्षीय आधार पर भी और आसियान प्लस सिक्स समुदाय का हिस्सा होने की वजह से भी. क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए  भारत म्यांमार को एक ज़रूरी पार्टनर मानता है.

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