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नक्सलियों से मुठभेड़ में पुलिस जवान ने जिसे गोलियां चलाते देखा, वैसा बस फिल्मों में होता है

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छत्तीसगढ़ के सुकमा के घने जंगल नक्सलियों की पनाहगाह हैं. एक दिन सुकमा पुलिस को पता चला कि जंगल में एक जगह पर कुछ नक्सली इकट्ठा हैं. पुलिस की टीम नक्सलियों को पकड़ने के लिए मौके पर पहुंची. दोनों तरफ से फायरिंग होने लगी. और इस दौरान पुलिस टीम में शामिल एक जवान की मुलाकात अपनी बहन से हो गई, जो नक्सलियों की टीम में शामिल थी और पुलिस टीम पर फायरिंग कर रही थी.

ये घटना 29 जुलाई, 2019 की है. पुलिस टीम के जवान वेट्टी रामा के मुताबिक वो पुलिस में शामिल होने से पहले एक नक्सली थी. साल 2018 में उसने नक्सलवादी संगठनों से खुद को अलग कर लिया और पुलिस में शामिल हो गया. वेट्टी रामा के मुताबिक वो और उसकी बहन वेट्टी कन्नी दोनों ही नक्सली संगठनों से जुड़े थे. वेट्टी रामा तो नक्सली संगठनों का साथ छोड़कर पुलिस में शामिल हो गया, लेकिन वेट्टी कन्नी नक्सलियों के साथ बनी रही. वेट्टी रामा ने कई बार अपनी बहन को पत्र लिखकर नक्सलवाद का रास्ता छोड़ने के लिए कहा, लेकिन वेट्टी कन्नी नहीं मानी. वेट्टी रामा ने उसे रक्षाबंधन का भी हवाला दिया, गलत रास्ते को छोड़कर सही रास्ते पर आने की बात कही, लेकिन कन्नी नहीं मानी और नक्सलियों के साथ बनी रही.

आखिरकार 29 जुलाई, 2019 को पुलिस और नक्सलियों की मुठभेड़ हो गई, जिसमें भाई और बहन आमने-सामने आ गए. पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई फायरिंग में दो नक्सली मारे गए, इस दौरान वेट्टी कन्नी भाग निकली. वेट्टी रामा ने कहा-

‘मैं जानता हूं कि वो मेरी बात नहीं मानेगी, वो त्योहार मनाने में भी यकीन नहीं रखती है. लेकिन मैंने इस बार रक्षाबंधन के उपहार के तौर पर उससे नक्सलवाद छोड़ने की अपील की है. यही इकलौता रास्ता है, जिसके जरिए मैं उसकी मदद कर सकता हूं.’

29 जुलाई को सुकमा में हुई मुठभेड़ के बारे में बात करते हुए सुकमा के एसपी शलभ सिन्हा ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान वेट्टी कन्नी के गार्ड्स ने वेट्टी रामा पर फायरिंग भी की थी. शलभ सिन्हा के मुताबिक वेट्टी रामा बार-बार अपनी बहन को पत्र लिख रहा है, लेकिन अब तक की सारी कोशिशें बेकार ही साबित हुई हैं.


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