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राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि और राष्ट्रीय शोक में क्या अंतर है?

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन पर 18 मार्च को राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है.

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18 मार्च 2019 (अपडेटेड: 17 मार्च 2019, 05:01 AM IST)
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साल 2000 में गोवा में पर्रिकर पहली बार गोवा की सीएम बने थे. फाइल फोटो.
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गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन पर राष्ट्रीय शोक में 18 मार्च को तिरंगा आधा झुका रहेगा. गोवा में 7 दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है.


क्या होता है राष्ट्रीय शोक

वैसे तो दुनिया के लगभग हर देश में अपनी-अपनी तरह से राष्ट्रीय शोक मनाया जाता है और इसे मनाने का कारण और प्रक्रिया भी कमोबेश एक सी ही होती है, मगर हम आज विशेष तौर पर भारत की बात करेंगे.
62 की उम्र में कैंसर से जंग लड़ रहे थे मनोहर पर्रिकर. 62 की उम्र में कैंसर से जंग लड़ रहे थे मनोहर पर्रिकर.

भारत में ‘राष्ट्रीय शोक’ पूरे राष्ट्र के दुःख को व्यक्त करने का एक प्रतीकात्मक तरीका है. और ये ‘राष्ट्रीय शोक’ किसी ‘व्यक्ति’ की मृत्यु या पुण्य तिथि पर मनाया जाता है.
# फ्लैग कोड ऑफ़ इंडिया के अनुसार राष्ट्रीय शोक के दौरान, पूरे भारत में और विदेश स्थित भारतीय संस्थानों (जैसे एंबेसी आदि) में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहते हैं.
# कोई औपचारिक एवं सरकारी कार्य नहीं किया जाता है और इस अवधि के दौरान कोई आधिकारिक कार्य भी नहीं होता.
# समारोहों और आधिकारिक मनोरंजन पर भी प्रतिबंध रहता है.
मुझे याद है राजीव गांधी की मृत्यु के वक्त सात दिनों तक दूरदर्शन में केवल ‘नृत्य का अखिल भारतीय कार्यक्रम’, ‘संगीत का अखिल भारतीय कार्यक्रम’ और समाचार ही दिखाए जाते थे. समाचार से पहले बजने वाला संगीत भी म्यूट कर दिया जाता था.
# दिवंगत व्यक्ति की राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की जाती है.


क्या होता है राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार में?

यदि नियम-कानून की बात करें तो केवल वर्तमान और पूर्व प्रधान मंत्री, वर्तमान और पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान और पूर्व राज्य मंत्री ही इस तरह के अंतिम संस्कार के हकदार हैं. लेकिन समय के साथ नियम बदल गए हैं. लिखित रूप से नहीं, कार्यरूप से. अब यह राज्य सरकार के विवेकाधिकार पर है कि किसका पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा. मने, कोई निर्धारित दिशानिर्देश नहीं हैं.
गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर (रॉयटर्स) गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर (रॉयटर्स)

राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने या तिरंगे द्वारा शव को ढकने के लिए सरकार राजनीति, साहित्य, कानून, विज्ञान और सिनेमा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में मृत व्यक्ति द्वारा किए गए योगदान को ध्यान में रखती है. इसके लिए संबंधित राज्य का मुख्यमंत्री अपने वरिष्ठ कैबिनेट सहयोगियों के परामर्श के बाद निर्णय लेता है.
फैसला ले चुकने के बाद, इसे डिप्टी कमिश्नर, पुलिस आयुक्त और पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सूचित किया जाता है. जिससे कि राजकीय अंतिम संस्कार के लिए सभी व्यवस्थाएं हो सकें.
# राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि के दौरान पार्थिव शरीर को तिरंगे में में लपेटा जाता है.
# दिवंगत हस्ती को पूर्ण सैन्य सम्मान दिया जाता है. इसमें मिलिट्री बैंड द्वारा ‘शोक संगीत’ बजाना और इसके बाद बंदूकों की सलामी देना आदि शामिल है.
# स्वतंत्र भारत में राजकीय सम्मान के साथ पहला ‘अंतिम संस्कार’ महात्मा गांधी का हुआ था.
# ग़ैर राजनीतिज्ञों और ग़ैर आर्मी पर्सनल्स में – मदर टेरेसा, सत्य साईं बाबा, श्रीदेवी आदि का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जा चुका है.


सार्वजनिक अवकाश के बारे में क्या नियम हैं?

# ध्यान रखें कि सार्वजनिक अवकाश, राष्ट्रीय शोक और राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि तीनों अलग अलग चीज़ें हैं. अभी हाल ही में श्रीदेवी की मृत्यु के दौरान बाकी दो चीज़ें नहीं थीं लेकिन उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया था. बल्कि राजकीय सम्मान के मामले में भी केवल उनका पार्थिव शरीर तिरंगे से लपेटा गया था.
# 1997  में जारी केंद्र सरकार की एक अधिसूचना के अनुसार केवल वर्तमान प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की मृत्यु की स्थिति में सार्वजनिक अवकाश दिया जा सकता है. इसी के चलते केंद्र सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु पर आधे दिन का अवकाश घोषित किया था. लेकिन तब दिल्ली जैसे कई राज्यों ने अवकाश पूरे दिन का रखा था.
Atal Bihari - Featured कुछ माह पहले की ही बात है जब केंद्र सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु पर भी सात दिन के राष्ट्रीय शोक और राजकीय सम्मान के साथ उनके अंतिम संस्कार की घोषणा की थी.

# मनोहर पर्रिकर के निधन पर राष्ट्रीय शोक में आज तिरंगा झंडा आधा झुका रहेगा. गोवा में 7 दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है. उनका अंतिम संस्कार 18 मार्च शाम 5 बजे होगा.


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