देशभर में ओमिक्रॉन के संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. सबसे ज्यादा मामलेमहाराष्ट्र और दिल्ली में देखने को मिले हैं. वायरस के ट्रांसमिशन की रफ्तार कोदेखते हुए कई मेडिकल एक्सपर्ट ने आशंका जताई है कि राजधानी में ओमिक्रॉन कम्युनिटीट्रांसमिशन की स्टेज पर पहुंच गया है. हाल ही में दिल्ली सरकार ने भी ये बात कही.उसने बताया कि दिल्ली में ओमिक्रॉन (Omicron) के 60 (अब ये संख्या ज्यादा होगी) ऐसेमामले मिले हैं जिनका विदेश यात्रा का कोई इतिहास नहीं है. इसके अलावा कॉन्टैक्टट्रेसिंग से पता चला कि ये लोग किसी ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में भी नहीं आए थेजिसने हाल के समय में कोई विदेश यात्रा की हो. दिल्ली सरकार के अलावा केंद्र सरकारके आपदा प्रबंधन विभाग ने भी कम्युनिटी ट्रांसमिशन की आशंका जताई है. तमाम आशंकाओंके बीच 31 दिसंबर को दिल्ली में कोरोना वायरस के 1313 नए मामले दर्ज़ किए गए,जो पिछले 7 महीनों में सबसे ज़्यादा हैं. इससे एक दिन पहले 30 दिसंबर को दिल्लीसरकार ने बताया कि हाल में कोरोना के 115 नए मामलों में से 46 प्रतिशत ओमिक्रॉन सेजुड़े थे. साफ है दिल्ली में एक बार फिर कोरोना वायरस कम्युनिटी लेवल पर ट्रांसमिटहोना शुरू हो गया है. चिंता ये है कि ये स्थिति जल्दी ही नेशनल लेवल पर भी देखने कोमिल सकती है. कम्युनिटी ट्रांसमिशन क्या है? हिंदी में कहें तो सामुदायिकप्रसार. और विश्व स्वास्थ्य संगठन की परिभाषा में कहें तो, कम्युनिटी ट्रांसमिशनऐसी स्थिति है, जब बड़ी संख्या में कोरोना (या किसी भी वायरस) के मामलों मेंसंक्रमण के सोर्स का पता ना चल पाए, या रैंडम टेस्ट के सैंपलों में ज्यादातर मामलेपॉज़िटिव पाए जाएं. आसान शब्दों में समझें तो कम्युनिटी ट्रांसमिशन ऐसी स्थिति हैजब ये पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि वायरस असल में फैल किस सोर्स के जरिये रहाहै. यानी इस स्टेज में केवल संक्रमितों का पता चलता है, ना कि इस बात का उनमेंवायरस फैलने की शुरुआत कहां से हुई. कोरोना वायरस के उदाहरण से ही समझें तो इसकेट्रांसमिशन का एक प्रमुख कारण विदेशी हवाई यात्रा है. दूसरे देशों से संक्रमित हुएलोग भारत आए और उनके संपर्क में आने वाले लोग भी वायरस की चपेट में आ गए. अगर वायरसको इसी स्टेज में रोक दिया जाए, मतलब इन लोगों से आगे ना फैलने दिया जाए, तो इसेआसानी से कंट्रोल किया जा सकता है. लेकिन अगर किसी भी वजह से वायरस इन लोगों केजरिये उन लोगों में पहुंच जाए जो इन संक्रमितों को नहीं जानते, तब कम्युनिटीट्रांसमिशन का खतरा बढ़ जाता है. क्योंकि ये नए संक्रमित नहीं बता पाएंगे कि उनमेंवायरस कहां से आया और अनजाने में उसे और आगे बढ़ा देंगे. विशेषज्ञों की राय वापसदिल्ली लौटते हैं. न्यूज़ चैनल NDTV ने केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों केहवाले से बताया है कि दिल्ली के कोरोना पॉज़िटिव मामलों में 50 प्रतिशत ओमिक्रॉन केहैं. इसको बेहतर समझने के लिए हमने पोस्ट ग्रैजूएट इन्स्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एजुकेशनएंड रिसर्च, चंडीगढ़ में काम करने वाले डॉ अकशत से बात की. उनके मुताबिक़ ओमिक्रॉनका कम्युनिटी ट्रांसमिशन हो रहा है या नहीं, अभी कह पाना मुश्किल है. वो कहते हैं,कम्युनिटी ट्रांसमिशन पॉज़िटिविटी रेट पर निर्भर करता है. भारत में दूसरी लहर केदौरान कम्युनिटी ट्रांसमिशन हुआ था. फ़िलहाल पॉज़िटिविटी रेट 1 प्रतिशत के आसपासहै. ऐसे में अभी नहीं कहा जा सकता की ओमिक्रॉन की कम्युनिटी ट्रांसमिशन की स्थितिहै. लेकिन ये सब इस पर भी निर्भर करता हैं कि कितनी टेस्टिंग हो रही है. औरटेस्टिंग इस वक़्त काफ़ी कम है. मुंबई में पॉज़िटिविटी रेट 7 प्रतिशत से ज़्यादाहै. इस वजह से कम्युनिटी ट्रांसमिशन की शंका को पूरी तरह से खारिज़ भी नहीं किया जासकता. हालांकि, आधिकारिक तौर पर अब तक सरकार या उसकी किसी भी संस्था ने ये नहींमाना है कि भारत में कम्युनिटी ट्रांसमिशन कभी भी हुआ है. इसका मतलब उनके मुताबिक़कम्युनिटी ट्रांसमिशन ना तो पहली लहर के दौरान हुआ था, ना ही दूसरे लहर के दौरान.हालांकि, मेडिकल एक्सपर्ट और साइंटिस्ट लगातार इसे स्वीकारते रहे हैं. कोरोना वायरसकी दूसरी लहर के दौरान इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन, इंडियन एसोसिएशन ऑफप्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन और इंडियन एसोसिएशन ऑफ एपिडेमियोलॉजिस्ट्स ने संयुक्तरूप से एक बयान जारी किया था. इसमें कहा गया था, ये उम्मीद करना गलत होगा है कि इसव्यापक स्तर पर फैली COVID-19 महामारी को ख़त्म किया जा सकता है. ये बात साफ़ है किकम्युनिटी ट्रांसमिशन पहले से ही देश की बड़ी आबादी को अपनी चपेट में ले चुका है.सरकार के दावे और सच्चाई अब थोड़ा पीछे चलते हैं. केंद्र सरकार ने कहा था कि वोमेट्रो शहरों के सारे पॉज़िटिव मामलों की जीनोम सीक्वेंसिंग करवा रही है. इस बात कीपड़ताल करने के लिए हमने दिल्ली के ICMR सर्टिफ़ाइड माइक्रो केयर लैब के मालिकशत्रुघन से बात की. वो बताते हैं कि सभी पॉज़िटिव मामलों की जीनोम सीक्वेंसिंग नहींकी जा रही है. उन्होंने कहा कि जीनोम सीक्वेंसिंग पॉज़िटिव मरीज़ के CT वैल्यू परनिर्भर करता है. शत्रुघन कहते हैं, जैसे ही कोई भी पॉज़िटिव केस आता है, हम सरकारको इसकी जानकारी दे देते हैं. जैसा कि हमने अब तक देखा है, जिन मामलों में CTवैल्यू 20 से कम है, उन मामलों की जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सरकार हमें ICMR लैब कोसैंपल भेजने को कहती है. इसके बाद शत्रुघन ने बताया कि जिन मामलों में 25 या 30 तकCT वैल्यू आ रहा है, सरकार उनका जीनोम सीक्वेंसिंग नहीं करवा रही है.