भगवान कृष्ण ने बलराम और सुदामा के साथ गुरु संदीपनि के आश्रम में सारी पढाई-लिखाईकी. समय आया गुरु-दक्षिणा का. तब 'टीचर्स डे' पर पार्कर पेन गिफ्ट करने का रिवाजनहीं था. गुरु लोग चेलों से बड़ी-बड़ी डिमांड करते थे. गुरु संदीपनि को आइडिया लगचुका था कि कृष्ण कोई मामूली बालक नहीं है. उन्होंने कृष्ण से कहा कि उनका एक बेटासमंदर में डूब गया था. अगर उसे जिंदा कर लाओ, तो यही मेरी गुरु दक्षिणा होगी. कृष्णने एक समुद्री नाव का जुगाड़ किया और उसे लेकर नागकन्याओं के देश की ओर चल पड़े. यहकृष्ण के बचपन के सबसे एडवेंचरस सफर में से था. वहां जाकर सागर से कहा, भइयासीधे-सीधे हमारे गुरुजी के लड़के को वापस कर दो तो खून-खराबा होने से बच जाएगा. सागरने कहा, यहां तो कोई लड़का नहीं डूबा. उसे जरूर पानी का राक्षस पंचजन हजम कर गयाहोगा. कृष्ण फुर्ती से पानी में कूदे, दो सेकेंड में राक्षस को खोज निकाला और उसकापेट चीर दिया. पर उसमें गुरु जी का बेटा तो निकला नहीं, बस मिला एक शंख. वे बलरामके साथ तुरंत यमराज के पास पहुंचे. यमराज को पूरी कहानी सुनाई और रिक्वेस्ट की किगुरुपुत्र को वापस कर दें. यमराज से पूछकर वहां उन्होंने शंख बजाया और राक्षस नेजित्ते भी लोग मारे थे, सब जिंदा हो गए. इस तरह भगवान कृष्ण से अपने गुरु कोगुरुदक्षिणा दी. (श्रीमद्भागवत महापुराण)