क्या देश में बसें चलवाने के लिए नितिन गडकरी ने लाखों रुपए की बस घूस में ली?
गडकरी के ऑफ़िस ने किया है मानहानि का मुक़दमा.
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स्वीडिश मीडिया की रिपोर्ट है कि स्कैनिया ने अपनी बसों के संचालन के लिए नितिन गडकरी को बेटी की शादी के लिए बस गिफ़्ट में दी गयी . (file photo)
स्वीडन की एक कार बनाने वाली कंपनी है. वॉक्सवैगन. ‘दस ऑटो’ इनकी प्रचलित टैगलाइन है. इस कंपनी की एक और ब्रांच है. स्कैनिया. बस, ट्रक और बड़े वाहन बनाती है. इस कंपनी की अंदरूनी जांच की रिपोर्ट के हवाले से आई विदेशी मीडिया में ख़बरें बताती हैं कि साल 2013-2016 के बीच इस कंपनी ने भारत के चुनिंदा राज्यों में अपनी सेवाएं देने के लिए घूस दी. नाम आ रहा है सीधे परिवहन मंत्रालय का. परिवहन मंत्री रहे हैं नितिन गडकरी. गडकरी के दफ़्तर ने आरोपों का खंडन किया है और कथित घूसकांड की ख़बरें चलाने वाले मीडिया संस्थानों के खिलाफ़ मुक़दमा कर दिया है.
क्या है मामला?
जिन लोगों ने उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम या दूसरे राज्यों की आधिकारिक बस सेवा की एसी बसों में सफ़र किया होगा, उन्हें दो नाम ज़रूर पता होंगे. वोल्वो और स्कैनिया. कई सारे प्रदेशों में चलने वाली एसी बसें इन्हीं कम्पनियों द्वारा बनायी जाती हैं. इस ख़बर में हम स्कैनिया के बारे में बात करेंगे.सबसे पहले ख़बर किसने छापी? स्वीडन के पब्लिक मीडिया ने. नाम है स्वेरगेस टेलिविज़न. छोटे में कहें तो SVT. SVT ने 10 मार्च 2021 को एक रिपोर्ट छापी. रिपोर्ट के फ़ीचर में भाजपा नेता और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की फ़ोटो लगी है. इस रिपोर्ट में कहा गया किकंपनी ने साल 2017 में कई सारी शिकायतों के बाद एक अंदरूरनी जांच की. इस जांच की रिपोर्ट कई समय तक पब्लिक में नहीं आ सकी थी. अब सामने आयी. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी अपना काम भारत के कई हिस्सों में सुचारू रूप से चला सके, इसलिए नितिन गडकरी को स्कैनिया की तरफ़ से एक लक्ज़री बस गिफ़्ट में दी गई. इसके साथ ही ये भी कहा गया है कि नितिन गडकरी को तोहफ़े में दी गयी ये बस उनकी बेटी की शादी में इस्तेमाल भी हुई.

इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इस बस का मालिकाना किसके पास है और बस कहां है, इस बारे में कुछ नहीं पता चल सका है. मीडिया संस्थानों ने इस बात को लेकर जब स्कैनिया को सवाल भेजे, तो स्कैनिया की तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया.
हालांकि मीडिया में ख़बरों के आने के बाद स्कैनिया ने एक विस्तृत बयान भी दिया है. इस बयान में स्कैनिया ने कहा है कि उन्होंने नितिन गडकरी को कोई बस नहीं दी.
लेकिन मनी कंट्रोल की रिपोर्ट बताती है कि कंपनी के प्रवक्ता हांस अके डैन्यलसन ने कहा है कि कंपनी के एक प्राइवेट डीलर ने साल 2016 में ये बस ख़रीदी दी, जिसने इसे अपने एक ग्राहक को दे दिया. बस अभी कहां है, इस बारे में हमारे पास कोई सूचना नहीं है.

ध्यान रहे कि ये रिपोर्ट SVT मीडिया ने जर्मन टीवी चैनल ZDF के साथ मिलकर प्रकाशित की है. और लल्लनटॉप इन तथ्यों और आरोपों की पुष्टि नहीं करता है.
एक लक्ज़री बस पर बात जाकर नहीं ख़त्म होती है. इस रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि स्कैनिया को भारत में काम मिल सके, इसलिए कई अधिकारियों को भी घूस दी गयी, इस रिपोर्ट में 65 हज़ार यूरो, भारतीय मुद्रा में लगभग 56.36 लाख रुपए की बात कही गई है. स्कैनिया ने अपनी रिपोर्ट में ये भी कहा है कि इस कथित घूसकांड में कंपनी के जो भी अधिकारी शामिल थे, वो लोग कंपनी छोड़कर जा चुके हैं. और कंपनी ने भी भारत में बसों का निर्माण बंद कर दिया है. इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़, कंपनी के CEO हेनरिक हेनरिकसन ने भी ये बात स्वीकार की है कि उन्होंने भारत में अपनी फ़ैक्टरी बंद कर दी है. गडकरी के कार्यालय ने दी सफ़ाई गडकरी के कार्यालय ने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है. नितिन गडकरी के कार्यालय की ओर से किए गए ट्वीट में कहा गया है कि विदेशी मीडिया के एक हिस्से द्वारा सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और उनके परिवार पर कुछ तथ्यहीन आरोप लगाए हैं जिनके संदर्भ में ये पहले ही बताया जा चुका है कि ये दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और आधारहीन हैं.
गडकरी के ऑफ़िस ने ये भी कहा है कि स्कैनिया बस का पूरा प्रकरण स्वीडिश कंपनी का आंतरिक मामला है. गडकरी के दफ़्तर ने ये भी कहा है कि स्कैनिया के प्रवक्ता के बयान के बाद से ये साफ हो गया है कि गडकरी और उनके परिजनों का इससे कोई लेना-देना नहीं है.The Swedish bus manufacturers Scania has denied sending any bus to Gadkari for personal use.” “The company ( Scania) spokesperson has also denied engaging in any business deal with any (one) connected with Gadkari’s sons.”
— Office Of Nitin Gadkari (@OfficeOfNG) March 11, 2021
दूसरी तरफ कांग्रेस ने गडकरी पर लगे आरोपों को गंभीर बताते हुए इनकी जांच की मांग की है. कांग्रेस ने ट्वीट करते हुए पीएम मोदी से पूछा है कि 'ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा' वाले प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के मामलों पर मौन क्यों हैं?