'शेक्सपियर ने अपने प्ले ‘रोमियो एंड जूलिएट’ में कहा था, ‘नाम में क्या रखा है?गुलाब को चाहें जिस नाम से पुकारो उससे अच्छी खुशबू ही आएगी’ लेकिन देशों के नामइतनी आसानी से नहीं पड़ते. उनके पीछे सालों की राजनीति, कुनीति, कुटिल नीति, संघर्ष,हर्ष, और अमर्ष की कहानी होती है.'साल 1906 में मुस्लिम लीग बनने के बाद इसके शुरूआती एजेंडे में 'अलग देश की मांग'शामिल नहीं थी. 1916 में इंडियन नेशनल कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच ‘लखनऊपैक्ट'(Lucknow Pact) हुआ था. पैक्ट कराने के धन्यवाद स्वरुप सरोजिनी नायडू नेजिन्ना को ‘एम्बेसडर ऑफ़ यूनिटी’(Ambassador of Unity) का दर्ज़ा भी दिया था. लेकिन1920 में जिन्ना के इंडियन नेशनल कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने के साथ ही एक अलग देशबनाने की सोच भी जन्म लेती है. धीरे-धीरे यह सोच पहले एक राजनीतिक विचार और फिर एकमांग का स्वरूप ले लेती है. और भारत की आज़ादी के एक दिन पहले 14 अगस्त 1947 कोपाकिस्तान नाम का एक अलग देश दुनिया के मानचित्र पर दर्ज हो जाता है.टू नेशन थ्योरी साल था 1932. जगह, इंग्लैंड के कैंब्रिज शहर की हम्बरस्टोन रोड परमौजूद कॉटेज नंबर 3. ब्रिटिश इंडिया से यहां पढ़ाई करने आए रहमत अली और उनके कुछसाथी नौजवान ‘अल्लामा इक़बाल’(Allama Iqbal) की दी गई 'टू नेशन थ्योरी' पर काम करनेमें मशगूल थे. (बताते चलें, अल्लामा एक पर्शियन शब्द है. जिसका बोलचाल की भाषा मेंअर्थ होता है, ‘पढ़ा लिखा फेमस आदमी’ और उस ज़माने में ये शब्द मोहम्मद इक़बाल के लिएयूज़ किया जाता था .)मोहम्मद इक़बाल (फोटो सोर्स - India Today)वही मोहम्मद इक़बाल जिन्होंने 'तराना ए हिंदी' नाम से ‘सारे जहाँ से अच्छाहिन्दोस्ताँ हमारा’ की रचना की थी. खैर वापस कैम्ब्रिज चलते हैं. ये पहली बार नहींथा जब रहमत अली और उनके साथी सेपरेट नेशन पर चर्चा कर रहे थे. उस समय ब्रिटिश भारतमें जब भी कोई बड़ा पोलिटिकल इवेंट होता था तो इधर ये बहस भी गर्मा जाया करती थी.बहस के मुद्दे कुछ यूं होते थे कि एक अलग मुस्लिम नेशन की जियोग्राफ़ी क्या हो, उसकानाम और आधिकारिक भाषा क्या होनी चाहिए, आदि-आदि. चौधरी रहमत अलीचौधरी रहमत अली (फोटो सोर्स- Wikimedia Commons)चौधरी रहमत अली ही नौजवानों की इस टोली के लीडर थे. लंबी चली बहस के बाद आख़िरकारआपसी सहमति से एक पैम्फलेट तैयार किया गया. और 1932 में लंदन में होने वाली 3rdराउंड टेबल कांफ्रेंस के डेलिगेट्स तक पहुंचाया गया. ये पहली बार था जब इसपैम्फ्लेट में रहमत अली ने पाक्स्तान (Pakstan) शब्द का इस्तेमाल किया था. रहमत अलीने अपने दिए नाम ‘पाक़स्तान (PAKSTAN)’ को जस्टिफाई करते हुए कहा था,P से Pakistan, A से Afgania, K से Kashmir, S से Sindh और Tan से BaluchisTAN. बादमें इसमें i जोड़ दिया गया था. पाकिस्तान डिक्लेरेशनइसके बाद 28 जनवरी 1933 यानी आज ही के दिन ये पैम्फलेट चार पन्नों की एक बुकलेट कीशक्ल अख्तियार कर चुका था. यही वह बुकलेट थी जिसमें किसी देश के सन्दर्भ में'पाकिस्तान; (Pakistan) शब्द का यूज़ पहली बार आधिकारिक रूप से किया गया.बुकलेट को चौधरी रहमत अली की लीडरशिप में तैयार किया गया था सो रहमत अली ने ही इसबुकलेट के संपादक की हैसियत से उसका नामकरण ‘पाकिस्तान डिक्लेरेशन’ दिया. और पहलेपन्ने की हैडिंग में लिखा, ‘Now or Never’ Are we to live or Perish forEver?' जिसका हिंदी अनुवाद होता है- अभी या कभी नहीं, क्या हमें जीना है या हमेशाके लिए ख़त्म हो जाना है?इस बुकलेट के डिक्लेरेशन में चौधरी रहमत अली के दस्तख़त के साथ लिखा गया था,‘मैं पाकिस्तान के तीस मिलियन मुसलमानों की ओर से एक अपील रहा हूं, जो भारत के पांचउत्तरी इलाकों - पंजाब, उत्तर-पश्चिम सीमा (अफगान) प्रांत, कश्मीर, सिंध औरबलूचिस्तान में रहते हैं. यह अपील उनकी इस मांग का प्रतीक है कि धार्मिक, सामाजिकऔर ऐतिहासिकता के आधार पर पाकिस्तान को एक अलग संघीय संविधान और भारत के बाकीनिवासियों से अलग राष्ट्रीय दर्जा दिया जाए.'इस डिक्लेरेशन के बारे में प्रोफेसर ख़ुर्शीद कमाल अज़ीज़, रहमत अली की बायोग्राफी मेंलिखते हैं,‘रहमत अली ने अकेले इस डिक्लेरेशन को लिखा है. ‘पाकिस्तान’ शब्द पहली बार इसीडिक्लेरेशन में प्रयोग किया गया है. इस डिक्लेरेशन को और भी ज्यादा रिप्रेजेन्टेटिवबनाने के लिए अली अब और लोगों को मना रहें हैं जो उनके अलावा इस पर साइन कर सकें.'पाकिस्तानजब रहमत अली ने ‘Now or Never’ को प्रकाशित किया तब उसमें पाकिस्तान का नक्शा भीशामिल किया था. इस नक्शे में भारत के अंदर तीन अलग मुस्लिम देशों को दिखाया गया था.ये देश थे- पाकिस्तान, बंगिस्तान यानी पूर्वी बंगाल और उस्मानिस्तान यानी निजाम कीरियासत हैदराबाद. गौरतलब बात ये है कि रहमत अली के पाकिस्तान और अल्लामा इकबाल केसेपरेट मुस्लिम नेशन में कहीं भी बंगाल का जिक्र नहीं है. लेकिन पाकिस्तान जब एकआज़ाद देश बना तो पूर्वी बंगाल को भी 'पूर्वी पाकिस्तान' के बतौर उसमें शामिल कियागया. जो कि बाद में पाकिस्तान से कटकर स्वतंत्र राष्ट्र ‘बांग्लादेश’ बना. रहमत कामानना था कि भारत का पूर्वी हिस्सा भी मुस्लिम बहुल है और इसे भी एक अलग मुस्लिमदेश होना चाहिए. एक नया देशजब ‘Now or Never’ प्रकाशित हुई, उस समय रहमत अली की उम्र 36 वर्ष थी. रहमत अली कीपैदाइश 1897 में पंजाब के होशियारपुर की थी. 1930 में रहमत कैम्ब्रिज शहर केएमैनुएल कॉलेज चले आए थे, जहां से 1933 में BA और 1940 में MA की डिग्री लीथी. ‘Now or Never’ बुकलेट उन लोगों के बीच खासी पसंद की गई जो पाकिस्तान के भारतसे अलग होने की राय रखते थे. जिन्ना सहित मुस्लिम लीग के नेताओं ने रहमत अली की खूबतारीफ की थी.1934 में रहमत अली मोहम्मद अली जिन्ना से मिले. तब प्रोफेसर के, के. अज़ीज़ की किताबके मुताबिक जिन्ना ने रहमत से कहा, ‘मेरे प्यारे रहमत, इतनी जल्दबाज़ी मत करो’.लेकिन रहमत ने साल 1935 में एक और किताब ‘पाकिस्तान: दी फादरलैंड ऑफ़ पाकनेशन’ प्रकाशित की थी. जिसमें रहमत ने खुद को पाकिस्तान लिबरेशन मूवमेंट का फाउंडरऔर प्रेसिडेंट बताया था.मार्च 1940 में आल इंडिया मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में रहमत अली के सुझाए नाम‘पाक़िस्तान’ पर मुस्लिम लीग के सभी बड़े नेताओं ने मुहर लगा दी. 1943 आते-आते जिन्नासहित लीग के सभी बड़े नेता पाकिस्तान शब्द का पब्लिक्ली यूज़ करने लगे थे. रहमत अलीने विद्यार्थी जीवन में जो सोचा था, लगभग 10 साल बाद वो सच हो रहा था.फरवरी 1946 में ब्रिटेन में एटली सरकार के समय कैबिनेट मिशन भारत आया था. कैबिनेटमिशन का मुख्य उद्देश्य था कि भारतीय सरकार को ट्रांसफर ऑफ़ पावर कैसे की जाए.हालांकि मिशन के प्लान में अलग देश की मांगे नहीं मानी गई. जिसके बाद जिन्ना नेजुलाई 1946 में कैबिनेट मिशन प्लान से अपना सपोर्ट वापस ले लिया और जनरल स्ट्राइककरने का फैसला लिया. 16 अगस्त 1946 को जिन्ना ने डायरेक्ट एक्शन डे बताया था और अलगदेश की मांग रखी. जिसे लंबी कूटनीतिक जद्दोजहद के बाद मान लिया गया. और आखिरकार जब15 अगस्त 1947 की रात जब भारत आज़ाद हुआ तब पाकिस्तान नाम का एक नया शब्द दुनिया केमानचित्र पर अपनी जगह बना चुका था.