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नकली मोहर-दस्तावेज, बाबू-IAS सबकी 'मिलीभगत', क्या है वो जमीन 'घोटाला' जिसमें हेमंत सोरेन अरेस्ट हुए?

Jharkhand में ED ने Hemant Soren को अरेस्ट कर लिया है, जमीन खरीद से जुड़ा ये मामला करीब डेढ़ साल पुराना है. अब तक सोरेन समेत 15 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. 'Land Scam' Case की पूरी कहानी क्या है? कैसे हुआ ये सब? Hemant Soren का इसमें कैसे नाम आया?

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Hemant Soren arrested
हेमंत सोरेन को 31 जनवरी की रात ईडी ने गिरफ्तार किया (फोटो- पीटीआई)
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साकेत आनंद
1 फ़रवरी 2024 (अपडेटेड: 1 फ़रवरी 2024, 12:57 PM IST)
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झारखंड (Jharkhand) की राजधानी रांची में 31 जनवरी का पूरा दिन राजनीतिक गहमागहमी में बीता. एक सवाल के साथ कि क्या मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) गिरफ्तार करने वाली है. रात होते-होते मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी हो गई. एक फरवरी को उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा. रांची में राजभवन से लेकर मुख्यमंत्री आवास के बाहर देर रात तक मीडिया का जमावड़ा रहा. गिरफ्तारी से पहले हेमंत सोरेन ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंप दिया. इसके बाद चंपई सोरेन को विधायक दल का नया नेता चुना गया. कथित जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना कर रहे हैं. 31 जनवरी को भी ईडी की टीम हेमंत सोरेन से पूछताछ करने पहुंची थी. करीब 8 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन सवाल ये है कि हेमंत सोरेन से जिस मामले में पूछताछ हो रही है, वो केस है क्या.

क्या है जमीन खरीद का मामला?

जमीन खरीद में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा मामला करीब डेढ़ साल पहले शुरू होता है. इसी में एक के बाद एक केस जुड़ते चले जाते हैं. रांची में एक इलाका है- बरियातू. जून 2022 में बरियातू थाने में ही रांची नगर निगम के टैक्स कलेक्टर दिलीप शर्मा ने एक FIR दर्ज करवाई. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें प्रदीप बागची नाम के व्यक्ति को आरोपी बनाया गया. आरोप लगा कि प्रदीप ने फर्जी डॉक्यूमेंट्स से सेना की जमीन को अपने कब्जे में ले लिया. ये जमीन करीब 4.5 एकड़ की है. ED की जांच में पता चला कि ये जमीन बीएम लक्ष्मण राव (दिवंगत) की थी, जिन्होंने आजादी के बाद इसे सेना को सौंप दिया था.

इस मामले में पहली गिरफ्तारी अप्रैल 2023 में हुई थी. 14 अप्रैल को ईडी ने प्रदीप बागची समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया था. उसी दिन कई जगहों पर छापेमारी भी की गई. इसमें IAS अधिकारी छवि रंजन के रांची और जमशेदपुर के आवास पर भी तलाशी ली गई. जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया, उनमें प्रदीप के अलावा - अफशार अली, इम्तियाज अहमद, सद्दाम हुसैन, तहला खान, भानु प्रताप प्रसाद और फैय्याज खान थे. भानु प्रताप बड़गाई इलाके में रेवेन्यू सब-इंस्पेक्टर थे और अली सरकारी अस्पताल में काम कर रहे थे. बाकी सभी के बारे में जांच एजेंसी ने बताया कि वे जमीन की दलाली के काम में लगे थे.

पिछले साल मई में ईडी ने IAS छवि रंजन को भी गिरफ्तार कर लिया. रंजन साल 2011 बैच के अधिकारी हैं. इस जमीन की जब खरीद की गई तब वो रांची के उपायुक्त (DC) थे. 15 जुलाई 2020 से 11 जुलाई 2022 तक उपायुक्त पद पर रहे. रंजन पर आरोप लगा कि उन्होंने जमीन की अवैध खरीद और बिक्री में मदद की थी.

'फर्जी डॉक्यूमेंट्स बनाए गए'

आजतक की रिपोर्ट बताती है कि इस 4.5 एकड़ जमीन को बेचने के लिए फर्जी डॉक्यूमेंट्स बनाए गए. ED के मुताबिक, इसमें लैंड माफिया, बिचौलिए और नौकरशाह तक मिले हुए थे. कागजात में जमीन को 1932 का बताया गया. लिखा गया कि ये जमीन प्रफुल्ल बागची (प्रदीप बागची के पिता) ने सरकार से खरीदी थी. फिर 2021 में प्रदीप ने इस जमीन को कोलकाता की एक कंपनी जगतबंधु टी एस्टेट लिमिटेड को बेच दी थी. इस कंपनी के डायरेक्टर दिलीप घोष हैं. लेकिन जांच में पता चला कि जमीन असल में अमित अग्रवाल नाम के व्यक्ति को बेची गई. अमित को कथित रूप से हेमंत सोरेन का करीबी माना जा रहा है. पिछले साल जून में अमित और दिलीप को गिरफ्तार किया गया था.

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झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन (फोटो- पीटीआई)

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अप्रैल में गिरफ्तारी के दौरान ईडी के एक अधिकारी ने बताया था कि इस जमीन की सरकारी कीमत 20.75 करोड़ थी. लेकिन इसे 7 करोड़ में बेच दिया गया. जो कि सरकारी रेट से काफी कम था. उस अधिकारी ने बताया, 

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हेमंत सोरेन का नाम कैसे आया?

रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरीके की कई और जमीनों की डील मनी लॉन्ड्रिंग के जरिये की गई. पुराने डॉक्यूमेंट्स से असली मालिकों के नाम को मिटाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता था. जांच में पता चला कि रजिस्ट्रार ऑफिस के सरकारी अधिकारी इसमें मदद करते थे. ईडी के अधिकारियों ने आरोपियों के पास से फर्जी सरकारी मोहर, स्टाम्प पेपर, रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट्स, फर्जी लैंड डीड भी बरामद किये.

ईडी की पूछताछ में रेवेन्यू सब-इंस्पेक्टर भानू प्रताप ने हेमंत सोरेन का नाम लिया था. पूछताछ से जुड़े कुछ दस्तावेजों की प्रति दी लल्लनटॉप के पास उपलब्ध है. इसमें बड़गाई इलाके में करीब साढ़े आठ एकड़ जमीन का भी जिक्र है. बड़गाई के अंचल अधिकारी मनोज कुमार ने ईडी को बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी थी कि ये जमीन हेमंत सोरेन की ही है. मनोज ने दावा किया कि इस जमीन के वेरिफिकेशन के लिए सीएम आवास के एक अधिकारी उदय शंकर का उन्हें फोन आया था. ये बयान उन्होंने 21 अप्रैल 2023 को दर्ज कराया था.

हालांकि गिरफ्तारी के बाद हेमंत सोरेन का एक वीडियो सामने आया. इसमें वो कह रहे हैं कि इस साढ़े आठ एकड़ जमीन से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. सोरेन का दावा है कि इस जमीन के मालिक वो हैं, इसका कोई सबूत नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि जाली कागज बनाकर और फर्जी शिकायत के जरिये उन्हें फंसाया जा रहा है, लेकिन समय के साथ सत्य की जीत होगी.  

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पिछले साल इस मामले में ईडी ने प्रेम प्रकाश नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया था. इससे पहले अवैध खनन मामले में भी प्रेम प्रकाश को गिरफ्तार किया था. खनन मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान ED ने प्रेम प्रकाश को हेमंत सोरेन का करीबी बताया था. कहा था कि वो कई तरह की 'अवैध कमाई' में शामिल रहा है.

ये भी पढ़ें- CM हेमंत सोरेन पर गिरफ्तारी की तलवार लटकाने वाला अवैध खनन का मामला क्या है?

ईडी का कहना है कि इस तरह की कई और जमीन डीलें हुई हैं और इसमें पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था. ईडी अब तक 236 करोड़ रुपये ज्यादा की जमीन को अटैच कर चुकी है. पिछले साल सितंबर में ईडी ने रांची में ही 161 करोड़ रुपये से ज्यादा की तीन प्रॉपर्टी को अटैच किया था. ये जमीन चेशायर होम रोड, पुगडु और सिराम इलाके में थीं. इसके अलावा बाजरा इलाके में 7.16 एकड़ की जमीन भी जब्त की गई. इन सभी जमीन को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत अटैच किया गया था.

ED के खिलाफ कोर्ट गए सोरेन

पिछले साल सितंबर में जब ED ने हेमंत सोरेन को समन भेजा तो वे इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए थे. हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें हाई कोर्ट जाने को कहा था. बाद में सोरेन हाई कोर्ट गए. वहां सुनवाई के दौरान ईडी ने बताया कि कई दफा समन भेजे जाने के बावजूद सोरेन पेश नहीं हुए और उन्होंने समन का उल्लंघन किया. इस पर सीएम के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है. हालांकि बाद में कोर्ट ने सीएम की याचिका खारिज कर दी.

बीती 20 जनवरी को हेमंत सोरेन ईडी के सामने हाजिर हुए. उनसे जांच एजेंसी ने करीब सात घंटे तक पूछताछ की. इसके बाद 29 जनवरी को ईडी ने उनके दिल्ली स्थित घर पर छापा मारा. हालांकि मुख्यमंत्री वहां मौजूद नहीं थे. शाम में जांच एजेंसी ने 36 लाख कैश और एक महंगी गाड़ी के साथ वहां से निकले. हालांकि सोरेन ने कहा कि गाड़ी और कैश से उनका कोई संबंध नहीं है.

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गिरफ्तारी के बाद हेमंत सोरेन (फोटो- X/Hemant Soren)

अब तक इस मामले में हेमंत सोरेन समेत कुल 15 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. अपनी गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले सोरेन ने ED के अधिकारियों के खिलाफ ही केस दर्ज करवा दिया. सोरेन की शिकायत पर रांची के धुर्वा एससी-एसटी थाने में 31 जनवरी को FIR दर्ज की गई. केस उन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हुआ है, जो 29 जनवरी को उनके दिल्ली स्थित आवास पर सर्च ऑपरेशन में शामिल थे.

ये भी पढ़ें- झारखंड के अगले CM चंपई सोरेन को 'टाइगर' क्यों कहा जाता है?

इस शिकायत में कुछ अधिकारियों के नाम भी हैं जैसे कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल और अन्य. इसमें सोरेन ने लिखा उन्हें प्रताड़ित करने, उनके समुदाय को बदनाम करने के लिए इन अधिकारियों ने नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन और शांति निकेतन में सर्च ऑपरेशन किए हैं. सोरेन ने ED अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने एक मकसद के तहत दिल्ली में उनके परिसरों की तलाशी ली. और इस कार्रवाई को 'बिना नोटिस' के अंजाम दिया गया.

बहरहाल, अब मामला कोर्ट में पहुंचा हुआ है. गिरफ्तारी के बाद हेमंत सोरेन के एक्स (ट्विटर) हैंडल से एक कविता लिखी गई- 

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