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'सांप' न जाने आंगन टेढ़ा: एल्विश यादव का जीवन परिचय

बीते सात सालों में Elvish Yadav की फ़ॉलोइंग कॉमेंट सेक्शन से फैल कर सड़कों तक आ गई है. जिस शहर में जाएं, लोग जुटें-चीखें-चिल्लाएं. क्या फ़िल्मी हस्तियां, क्या नेता-मंत्री! राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक. शोहरत की 'पीक' पर ये लड़का जेल में बंद है. सांपों के ज़हर की तस्करी के आरोप में.

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'सिस्टम फाड़ देंगे' का जयघोष देने वाले एल्विश यादव. (फ़ोटो - सोशल मीडिया)
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21 मार्च 2024 (Updated: 22 मार्च 2024, 16:54 IST)
Updated: 22 मार्च 2024 16:54 IST
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यूट्यूब के तहख़ाने में 30 मार्च, 2017 का एक वीडियो मिला. टाइटल, 'टाइप्स ऑफ़ स्टूडेंट्स' (अर्थात, छात्रों के प्रकार). इग्ज़ाम के वक़्त आपको-हमें किन-किन तरह के छात्र आस-पास दिखते हैं, इस बारे में वीडियो है. कोई ‘मेधावी’ छात्रा बार-बार एक्सट्रा शीट मांग रही है, कोई ‘जय माता दी’ वाले फ़ॉर्मूले पर अटूट श्रद्धा बांधे हुए है, कोई फ़र्रेबाज़ शरीर के अलग-अलग अंगों से फ़र्रे निकाल रहे हैं. फिर आता है 'कूल लड़का'. उस वक़्त चला गोल चश्मा पहने, एक कांधे पर बैग, हाथ में अंगूठियां. ये लड़का बना है ‘सीरियल चीटर’. मगर कूल. फ़र्रेबाज़ी नहीं करता, एक पढ़ाकू लड़के से सेटिंग करता है. इग्ज़ाम में उसके पीछे बैठता है और पूरे इग्ज़ाम उसे कोंचता रहता है. यही लड़का इसी वीडियो में एक दूसरे अवतार में भी दिखता है. मगर फिर से कूल. बार-बार इनविजिलेटर से 'मे आई गो टू ट्वॉयलेट?' की अनुमति लेता है, हाथ बेल्ट के पास सहलाते हुए. इस वीडियो पर 20 लाख व्यूज़ हैं.

आने वाले सालों में यूट्यूब का ये नौसिखिया ‘सितारा’ बन गया. देसी बालक वाली कॉमेडी की थीम से राह बदली. ये राह देश के मिज़ाज के साथ सेट हुई. नतीजा ये कि फ़ॉलोइंग कॉमेंट सेक्शन से बढ़कर सड़कों तक आ गई. जिस शहर में जाए, लोग जुटें-चीखें-चिल्लाएं. क्या फ़िल्मी हस्तियां, क्या नेता-मंत्री! राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक, इस लड़के की तस्वीरें बड़े-बड़ों के साथ पाई गईं. अपने पहले वीडियो के क़रीब 7 साल बाद ये लड़का जेल में बंद है. सांपों के ज़हर की तस्करी के आरोप में.

नाम - सिद्धार्थ यादव, उर्फ़ एल्विश यादव.

ये कौन चित्रकार है?

14 सितंबर, 1997 को गुरुग्राम के वज़ीराबाद गांव में राम अवतार यादव और सुषमा यादव के घर पैदा हुए. मूलतः उनका नाम सिद्धार्थ यादव था. गुरूग्राम के ऐमिटी इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ाई की. फिर दिल्ली के हंसराज कॉलेज के बैचलर ऑफ़ कॉमर्स की डिग्री ली.

कथित तौर पर आशीष चंचलानी और अमित भड़ाना से प्रेरित होकर एल्विश ने अप्रैल, 2016 को अपना यूट्यूब करियर शुरू किया. हालांकि, उनका पहला वीडियो - जो अभी भी उनके चैनल पर है - वो मार्च, 2017 का है. मार्च, 2024 तक उनके चैनल पर 188 वीडियो हैं, डेढ़ करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं और कुल 1.49 अरब व्यूज़.

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शुरुआत में उनके चैनल का नाम ‘द सोशल फ़ैक्ट्री’ था, बाद में ‘एल्विश यादव’ रख दिया. भुवन बाम, आशीष चंचलानी की वजह से स्केचेज़ और वाइन्स का नया-नया पंडोरा बॉक्स खुला हुआ था. जनता नई-नई सिचुएशन में फ़न खोज रही थी. क्रिएटर्स भी फ़नी होने की गुंजाइश खोज रहे थे. कुछ सफल हो पाए, कुछ फुस्स. उस दौर में एल्विश ने स्क्रिप्टेड स्केचेज़ बनाए. चीटिंग, डेटिंग, आफ़्टर ब्रेक-अप जैसे विषयों पर हल्के-फुल्के हंसाने की कोशिश करते वीडियोज़ लेकर आए. 

फिर जियो के लॉन्च के आस-पास भारत के ऑनलाइन मार्केट में - ख़ासतौर पर हिंदी पट्टी में - ‘देसी’ का विस्फोट हुआ. अपनी भाषा-बोली, रहन-सहन, पहनावे-सलीके के प्रति ठसक पैदा हुई. वैसा कॉन्टेंट देखा जाने लगा. इंटरनेट लोकतांत्रिक है, चुनांचे ‘एलीट और सॉफ़िस्टिकेशन’ का पर्दा दरकने लगा. चूंकि इंटरनेट लोकतांत्रिक है, और ऐसे लोगों को तूल मिला, तो एलीट और सॉफ़िस्टिकेशन को लगभग गाली की तरह इस्तेमाल किया जाने लगा. बात ख़ुद पर गर्व करने से शुरू हुई थी, औरों को गालियां देने तक पहुंच गई. एल्विश ने भी यही किया.

पुराने एल्विश. देसी अवतार में. 

पहले तो 'देसी बॉयफ़्रेंड', 'देसी फ़्रेंड', 'देसी गूगल मैप्स', 'देसी बनाम सिटी' जैसे वीडियो बनाए. इनमें सस्ता ह्यूमर होता था. जनता को अच्छा लगता था. लोग देखते थे, हंसते थे. फिर इन वीडियो में शहरों या शहरी रवायतों के प्रति एक क़िस्म की कुंठा दिखने लगी. जो शहरी है, वो तामझामी हो गया, कमज़ोर हो गया. गंवई रवायतें मिट्टी और मन से जुड़ गईं. एल्विश भी इसी ट्रेंड पर सवार थे. वैसे ही वीडियोज़ बनाते रहे. घणीं हरियाणवी वाला उनका लहजा लोग सुनते रहे, उनका अति-अभिनय देखते रहे.

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फिर कुछ सीरीज़ वाले वीडियो में हाथ आज़माया. ‘बॉयफ़्रेंड बनाम एक्स’, ‘भाई बनाम बहन’, ‘फ़र्स्ट ईयर बनाम लास्ट ईयर’, ‘किरायदार’, ‘एवरी फलाना-ढिकाना एवर’ जैसे ट्रेंड की गाड़ी पकड़ी. वीडियो की प्रोडक्शन क्वॉलिटी बेहतर हुई. मुमकिन है उनसे और लोग जुड़े होंगे, क्योंकि लोग दिखने लगे. वीडियो में गाड़ियां भी दिखने लगीं. गाड़ियों के लंबे-लंबे काफ़िले. मगर संवाद और विनोद का स्तर वही रहा.

नमूना. एक वीडियो है, ‘ट्यूशन टीचर की बीवी से प्यार’. सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का सेटअप है. एल्विश को अपने टीचर की पत्नी से 'प्यार' हो जाता है. वो उसे झलक भर देखकर अपने कमरे में चली जाती हैं. एल्विश कमरे में आते हैं. वो पूछती हैं, 'येस?' एल्विश कहते हैं, 'येस का टाइम तो चला गया.. अब तो 'ओह येस' का टाइम है. चलो शुरू करते हैं.' महिला बिगड़ती है, 'ये क्या बदतमीज़ी है? मैं शादीशुदा हूं.' इस पर एल्विश कहते हैं,

मेरे को कोई दिक़्क़त नहीं है. एक बात सुण. मुझे ता बहुत मज़ा आता है कि गाड़ी किसी और की हो, आरसी किसी और के नाम पर और चलाएंगे हम. गाड़ी ठुक जाए, पिट जाए, छिल जाए. मालिक अपना देख लेगा.. हम तो ट्रक ड्राइवर हैं. बड़ी गाड़ी चलावे हैं. रात के शहंशाह हैं. तुझे चला दूं?

ये वीडियो 5 मार्च, 2022 को प्रकाशित हुआ था. साढ़े आठ लाख लोगों ने ये वीडियो देखा है.

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वीडियो में फूहड़ संवादों और आलसी ह्यूमर का ये सफ़र रुका नहीं. फिर उन्होंने स्केच वीडियो के बाद कुछ म्यूज़िक वीडियो किए, कुछ मिनी-सीरीज़ बनाईं. मगर एल्विश के ज़्यादातर वीडियो में एक चीज़ कॉमन थी – एल्विश का औरा. बतौर एक क्रिएटर उन्होंने उस पर अलग से ध्यान दिया है. कहीं-कहीं अपने कॉन्टेंट से ऊपर.

एल्विश के इस औरा में क्या-क्या है? 

मुख्यतः ‘सिस्टम’. कानपुर-बनारस-इलाहाबाद में जिसे कहते हैं, रंगबाज़ी. एल्विश के स्केच और व्लॉग में उनकी पैसे-रुपयों की धाक टपकती है. सिस्टम को जमकर बेचने की जुगत रहती है. एल्विश अपने वीडियोज़ में जैसे भी नज़र आते हैं, उसके साथ ये बात नत्थी रहती है कि वो ‘नायक’ हैं. वो जो भी करते हैं, जैसी भी बातें बोलते हैं, अंततः वही ‘सफल’ होंगे. और उस सफलता का सत्यापन होता है उनकी पीले रंग की डेढ़ करोड़ की गाड़ी (Porsche 718 Boxster) से, उनके 12 से 14 करोड़ के चार-मंज़िला मकान से, जो गाहे-बगाहे उनके वीडियोज़ में दिखा दिए जाते हैं. वीडियो देखने वाले को लगता है कि एल्विश का सिस्टम सफलता की कुंजी है. 

यही सपना दिखाते हुए एल्विश सोशल मीडिया पर इतने पॉपुलर हो गए कि 'बिग बॉस' के लिए योग्य माने गए. बिग बॉस OTT के दूसरे सीजन का हिस्सा बने. उस घर में उनकी यात्रा किसी रोलर-कोस्टर सी रही. वाइल्ड कार्ड एंट्री ली और फ़ौरन ही दर्शकों और सहभागियों का ध्यान खींच लिया. शो में और स्थापित सितारे थे, मगर एल्विश के निर्लज्ज (unapologetic) रवैये ने उन्हें शुरू से ही अलग कर दिया. इतने पॉपुलर हुए ज़माने में, कि जीत भी गए.

इस बीच एक हाइलाइट निकल कर आई थी: सलमान बनाम एल्विश. जुलाई, 2023 के आख़िरी हफ़्ते में एक वीकेंड एपिसोड में सलमान ने ख़राब भाषा के लिए एल्विश को झाड़ा था. एल्विश की भाषा के अलावा उनकी ‘फ़ैन आर्मी’ को लेकर भी उन्हें हड़काया गया था. 

“तो ये आपकी फैन आर्मी है. एक काम कर लो, अगर ये आपके लिए जान दे देंगे न, उन्हें बोलो की जान मत देना भाई, 500 रुपए में मुझे फॉलो कर ले भाई. मुझे देखना है कि कितने लॉयल फैन हैं आपके. बोलना, ये तो फ्री में है. अब मुझे देखना है कि कितनी लॉयल है मेरी फैन आर्मी. सिर्फ 500 रुपए में. क्या लगता है कितने लोग आएंगे?”

तब सलमान की इन बातों पर एल्विश ने कोई जवाब नहीं दिया था. 

एल्विश की पॉलिटिक्स

एल्विश के मेन चैनल के वीडियोज़ में बीच-बीच में पॉलिटिकल रेफ़रेंस आते हैं, मगर बस उतने ही जो बहुत पॉपुलर हुए. जैसे, अरविंद केजरीवाल का ‘सबूत’ मांगना (बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक). भारत के समाज और राजनीति में जो बदलाव आए हैं, उन्होंने बहुत सारे कॉन्टेंट क्रिएटर्स के काम करने के तरीके पर असर डाला है, लेकिन इसे एल्विश के मेन चैनल पर पड़े कॉन्टेंट में ट्रेस करना मुश्किल है. या यूं कहें कि वो हमेशा से ऐसे ही थे.

समय के साथ ऑनलाइन कॉन्टेंट की दुनिया में जेंडर समेत दूसरे विषयों को लेकर पॉलिटिकल करेक्टनेस को लेकर एक आग्रह पैदा हुआ. जो बातें व्यक्ति यूं ही, मज़ाक के लहजे में कह देता था, उसके साथ सावधानी बरतने लगा. #MeToo जैसे आंदोलन हुए, तो जेंडर सेंसटिविटी आई. लेकिन इस शै से एल्विश का दूर-दूर तक वास्ता नहीं रहा. कुल मिलाकर बात ये है कि एल्विश के मेन चैनल को पूरा भी खंगाल लें, तो उनकी राजनीति या राजनैतिक समझ बहुत खुलकर सामने नहीं आती. 

राजनीति के लिए एल्विश के पास अलग चैनल है - एल्विश यादव व्लॉग्स. इस चैनल पर भिन्न-भिन्न प्रकार के वीडियो हैं. सामान्य व्लॉगिंग से लेकर रोस्ट वीडियो तक. यहां वो खुलकर आते हैं. धड़ल्ले से टिप्पणियां करते हैं. अब टिप्पणी का सीन ऐसा है कि अगर उसे तर्क और तथ्य का सहारा न मिले, तो वो रिमार्क से स्वीपिंग रिमार्क हो जाती है. जैसे भारतीय वेबसीरीज़ के लिए एल्विश ने कह दिया कि जितनी भी वेबसीरीज़ बन रही हैं, उनमें 50% हिंदू-विरोधी हैं. अब ये 50% का आंकड़ा आया कहां से, ये वो नहीं बताते/बता पाते. बस इतना कहकर निकल जाते हैं, ‘भारतीय वेबसीरीज़ के डायरेक्टर्स में उतना ही लॉजिक है, जितना ओवैसी के भाषण में सेकुलरिज़म’.

ये देखिए - एल्विश यादव का लल्लनटॉप इंटरव्यू 

'दिवाली पर पटाखे रोकना हिंदू-विरोधी है', 'हिंदी फ़िल्मों में लेफ़्टिस्टों का क़ब्ज़ा रहा है', 'हिंदू लड़कियों को फंसाकर जबरन धर्मांतरण किया जा रहा है' – ये सोशल मीडिया की घमासान बहसें हैं. इन बयानों में कुछ तथ्य हो सकते हैं. छांटने पर शायद मिलें. मगर एल्विश का तथ्यों से कुछ ख़ास सारोकार रहा हो, ऐसा लगता नहीं है. वो अपनी निजी धारणा को तथ्य बनाकर जोक्स के भेष में सरका देते हैं. 

कांग्रेस से लेकर आम आदमी पार्टी तक किसी पर भी चुटकुला जड़ने से पहले नहीं सोचते. दर्जनों बार राहुल गांधी को अपने स्केचेज़ में इस्तेमाल किया है. टिप्पणी भी करते रहे हैं -

एल्विश ने सदैव इस बात की समर्थन किया है कि फ़्री स्पीच होना चाहिए. सबको अपनी बात रखने का अधिकार है. सब पर चुटकुले होने चाहिए. मगर एल्विश के फ़्री स्पीच वाले सिस्टम की ज़द में देश की सत्ताधारी पार्टी या उसके नेता आए हों, ये नज़र नहीं आता. 

एल्विश के इस एडिटोरियल जजमेंट से उन्हें फ़ायदा नहीं मिलता, ऐसा बिलकुल नहीं है. पलट कर उन्हें भी शाबाशी मिलती है. अगस्त, 2023 में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंच पर ले जा कर कहा था कि एल्विश को आगे बढ़ाने में हरियाणा सरकार जो कुछ कर सकती है, करेगी. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं. लड़कियों के बारे में एल्विश की सोच क्या है, ये कभी महिला मंत्रियों को बताया जाना चाहिए. उनकी सुविधा के लिए एल्विश के कुछ विचार इस स्टोरी में आगे पढ़े जा सकते हैं.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी के साथ एल्विश (फ़ोटो - X)
एल्विश 'सिस्टम' से ऊपर?

सिस्टम माने क्या? विचारों या नियमों की एक व्‍यवस्‍था. कुछ करने की विशिष्‍ट रीति. एक सलीका, एक तरीका, एक प्रणाली. जैसे समाज का एक सिस्टम है. लिखे हुए नहीं हैं, पर नियम हैं. एक क़ायदा है. आप क्या कहते हैं/करते हैं, इस बिनाह पर आपको स्वीकारा या अस्वीकारा जाता है. अगर आप समाज को शांतिपूर्ण या सुचारु तौर पर चलने देने के पक्षधर नहीं हैं, तो समाज के सिस्टम में आप सेट नहीं हो पाएंगे.

फिर सरकार का सिस्टम है. इसमें नियम-क़ायदे लिखे हुए हैं. अधिकार और कर्तव्य तय हैं. सिस्टम ये है कि तय नियमों से चलना है. नियम के बाहर जो भी जाएगा, उसकी हरकतों का संज्ञान लिया जाता है. हरकत अपराध की श्रेणी में हो, तो देश का सिस्टम कार्रवाई भी करता है.

मगर बार-बार ऐसा हुआ कि एल्विश का सिस्टम इन दोनों सिस्टम से ऊपर लगने लगा. लक्षित करके बेइंतेहां गालियांं देना, धड़ल्ले से धमकियां देना, मारपीट. इन सब के वीडियो तक मौजूद थे. लेकिन एल्विश देश के सिस्टम की ज़द से बाहर ही रहे. एक वाक़ये को छोड़कर. उसपर आने से पहले विवादों की लंबी सूची पर गौर कर लेना लाज़मी है.

मैक्सटर्न के साथ विवाद

मार्च 2024 के दूसरे हफ्ते में हुई सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग के दौरान एल्विश यादव और मुनव्वर फ़ारुक़ी एक तस्वीर में नज़र आए. मैच की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई. इस पोस्ट में सागर ठाकुर उर्फ़ मैक्सटर्न ने एल्विश यादव को ट्रोल कर दिया. एल्विश नाराज़ हो गए. सागर को जवाब दे दिया, “भाई तू दिल्ली में रहता है, सोचा याद दिला दूं.” फिर दोनों के बीच मिलने की बात हुई. सागर ने एक जगह चुनी. वीडियो का सेट-अप लगाया. वीडियो में एल्विश दरवाज़ा खोल कर आते हैं और आते ही सागर को थप्पड़ जड़ने लगते हैं. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

सागर ने आरोप लगाए कि पुलिस FIR नहीं दर्ज कर रही. ये आरोप लगाते हुए मैक्सटर्न का वीडियो वायरल हुआ. इसके बाद जाकर खबर आई कि गुरुग्राम सेक्टर 53 पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 147 (दंगा), 149 (ग़ैरक़ानूनी सभा), 323 (चोट पहुंचाना), 506 (आपराधिक धमकी) के तहत FIR दर्ज की गई. एल्विश को नोटिस भेजा गया. बाद में एक तीसरे सोशल मीडिया इंफ़्लुएंसर - रजत दलाल - ने उन दोनों के बीच सुलह करवा दी. FIR वापिस हुई. मैक्सटर्न ने अपने वीडियो भी हटा लिए. 

फ़ैन को थप्‍पड़ मार दिया था

फ़रवरी, 2024. जयपुर का एक रेस्त्रां. एल्विश का एक वीडियो आया, जिसमें वो एक आदमी को थप्पड़ मार रहे हैं. स्थानीय रिपोर्ट्स से पता चलता है कि एक अज्ञात व्यक्ति ने एल्विश यादव के परिवार पर कॉमेंट किया था. इसी के जवाब में उन्होंने उसे थप्पड़ मार दिया था. उनकी या उनकी टीम से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया, मगर उनके नाम से उनकी आवाज़ में एक ऑडियो क्लिप आई थी. इसमें वो कहते हैं,

 "जो फोटो खिंचवाने को कहता है, फोटो खिंचवा लेता हूं... लेकिन अगर कोई मुझे मां-बहन की गाली देगा, तो मैं नहीं छोड़ूंगा. उसने मुझे बोला और मैंने जाके उसे दे दिया."

12 फ़रवरी, 2024 | जयपुर

वैष्णो देवी में ‘पत्रकार’ से झड़प

दिसंबर, 2023 में एल्विश वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा पर गए थे. वहां एक भीड़ ने उन्हें घेर लिया था. इस घटना से जुड़ा जो वीडियो वायरल हुआ, उसमें दिख रहा है कि लोगों ने एल्विश के दोस्त का कंधा पकड़ा हुआ है. एल्विश की टीम केे मुताबिक़, पत्रकार होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने एल्विश के साथ फोटो खिंचवाने की बात कही. जब एल्विश ने इनकार किया, तो पत्रकार ने कथित तौर पर उनके दोस्त काे घेर लिया.

ख़बर ये भी उड़ी थी कि एल्विश पिट गए हैं. हालांकि, बाद में एल्विश ने इस ख़बर को फ़ेक बताया था. लिखा था,

 “मेरे पे हाथ उठाने वाले जिस दिन पैदा होंगे, कलयुग का अंत आ लेगा. चीयर्स.”

स्वरा भास्कर से पंगा

2018 का साल था. फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ की रिलीज़ थी. तभी स्वरा भास्कर और एल्विश यादव का पंगा हो गया. स्वरा ने एल्विश पर आरोप लगाया था कि एल्विश ने उनकी फ़िल्म के ख़िलाफ़ नेगेटिव कैंपेन चलाया था. दरअसल, एल्विश ने ‘स्वरा भास्कर रोस्ट’ शीर्षक से एक वीडियो पोस्ट किया था. उसमें स्वरा को बहुत भद्दी और स्त्री-विरोधी बातें कही गई हैं. राजनीतिक मतांतर से लेकर स्वरा के कैरेक्टर तक पर सवाल उठाए गए थे. उन्होंने ट्विटर पर भी स्वरा के ख़िलाफ़ भद्दी बातें लिखीं, और इस घटना के बाद स्वरा ने एल्विश के ख़िलाफ़ शिकायत भी दर्ज कराई थी. इस केस में एल्विश पर क्या कार्रवाई हुई, इसका पता हम नहीं लगा पाए.

सलमान ख़ान का रोस्ट

एल्विश बॉलीवुड स्टार सलमान खान को भी रोस्ट कर चुके हैं. 2019 में एल्विश ने अपने एक व्लॉग में सलमान को रोस्ट किया था. वीडियो में एल्विश ने कहा था कि पूरी इंडस्ट्री सलमान से डरती है, उन्होंने कई लोगों का करियर बर्बाद किया और सिर्फ महिलाओं को ही इंडस्ट्री में लॉन्च किया.

हालांकि, बाद में बिग बॉस में उनकी सलमान से मुठभेड़ हुई. सलमान और उनके फ़ैन्स के बीच भी ई-लफ़ड़ा हुआ. बाद में सलमान ने उनकी जीत पर उनका हाथ हवा में लहराया.

गाने को लेकर विवाद

बिग बॉस OTT 2 सीज़न जीतने के बाद एल्विश ने ऐक्ट्रेस उर्वशी रौतेला के साथ एक गाना रिलीज़ किया. गाने का टाइटल ‘हम तो दीवाने’ था. इसमें एल्विश ‘आदाब’ करते देखे गए थे. सोशल मीडिया पर लोगों ने इस पर एल्विश को धर लिया. लोग बोलने लगे कि एल्विश तो राम भक्त हैं पर ये सब क्यों कर रहे हैं? मामला बढ़ा तो गाने में से विवादित सीन हटा दिया गया. एल्विश ने अपने सीन का बचाव नहीं किया. उन्होंने सीन हटाने के पक्ष में दलीलें दीं. कहां कि चाहे इसके बाद इंडस्ट्री में काम न मिले, वो अपने धर्म के प्रति कट्टर थे, हैं और रहेंगे. लेकिन एल्विश ने ये नहीं बताया कि अगर ऐसा था, तो उन्होंने वो सीन किया क्यों? 

सांप के ज़हर की तस्करी

3 नवंबर 2023 को नोएडा पुलिस ने सेक्टर-51 इलाक़े में सेवरोन बैंक्वेट हॉल में छापेमारी की. 5 लोगों को गिरफ़्तार किया गया. पुलिस को वहां से 9 तरह के सांप मिले, और साथ ही 20 मिलीलीटर स्नेक वेनम यानी सांप का ज़हर मिला. जब पुलिस ने गिरफ़्तार लोगों से पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि वे लोग सांप के ज़हर का इस्तेमाल रेव पार्टी में करते हैं. पूछताछ में ही इन लोगों ने एल्विश यादव का भी नाम ले लिया. इसके बाद एल्विश समेत 7 लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई. इन सभी पर IPC की धारा 120(B) और वन्य जीव (संरक्षण) अधियनियम 1972 की धारा 9, 39, 48-ए, 49, 50 और 51 के तहत केस दर्ज हुआ. जो धाराएं लगाई गईं, वो ग़ैर-ज़मानती हैं. लेकिन एल्विश की गिरफ़्तारी तक कैलेंडर में 17 मार्च 2024 की तारीख आ गई थी. नोएडा पुलिस ने एल्विश को गिरफ़्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा दिया है. 

एल्विश के ख़िलाफ़ ऐक्शन हुआ एक NGO 'पीपल फ़ॉर ऐनिमल्स' (PFA) के चलते. ये संस्था बीजेपी सांसद मेनका गांधी चलाती हैं. उनके साथ काम करने वाले गौरव गुप्ता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. इसी शिकायत में ही एल्विश यादव का नाम लिया गया था.

ये भी पढ़ें - किस केस में जेल गए हैं एल्विश?

एल्विश ने लोगों पर थप्पड़ बरसाए, लोगों को गालियां दीं, धमकियां बांटी. मगर उन पर पहली बार कार्रवाई की गई है. वो अभी जेल में हैं. क्या सिस्टम ने अपना काम कर दिया? नहीं. उसने काम अभी बस शुरू किया है. अंजाम, भविष्य के गर्भ में है.

सवाल ये नहीं है कि एल्विश ग़लत हैं या नहीं. सवाल ये है कि समाज और सिस्टम से एल्विश और उनके काम को जिस तरह की स्वीकार्यता मिली हुई है, वो हमारे बारे में क्या कहती है.

इति.

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