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आधी उम्र के ISI एजेंट से प्यार... जब RAW ने सूचना लीक कर पकड़ी पाकिस्तान की जासूस माधुरी गुप्ता

Spy Madhuri Gupta: देश 26/11 हमले के दुख से उभरा नहीं था. तभी पता चला कि पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में एक महिला जासूस है. लेकिन दिक्कत ये थी कि महिला का प्रोफाइल किसी जासूस से मैच नहीं करता था. इसलिए RAW ने पहले एक जाल बिछाया.

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Pakistani Spy Madhuri Gupta
ट्रायल कोर्ट ने 2018 में माधुरी गुप्ता को दोषी ठहराया. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
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रवि सुमन
21 मई 2025 (अपडेटेड: 22 मई 2025, 06:21 AM IST)
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पहलगाम आतंकी हमला. ऑपरेशन सिंदूर. दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता ही गया. अंत में सीजफायर हुआ. पड़ोसी देश के साथ मिसाइल और ड्रोन्स हमलों का सिलसिला थमा. लेकिन इस बीच देश के भीतर कुछ गंभीर मामलों का पता चला. आरोप लगे कि पैसे और लग्जरी के लालच में कुछ लोगों ने पाकिस्तान के लिए जासूसी की. एक नाम जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा हुई, वो थीं यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा (Jyoti Malhotra). हनीट्रैप के एंगल की भी चर्चा हुई.

उनके साथ कई और गिरफ्तारियां भी हुईं. लेकिन इस घटना के कई सालों पहले भी ऐसी ही एक घटना घटी थी. एक महिला जो ज्योति की तरह यूट्यूबर नहीं थी बल्कि विदेश मंत्रालय की अधिकारी थी. नाम था- माधुरी गुप्ता (Madhuri Gupta). 

2008 में 26/11 मुंबई हमला हुआ. लगभग 175 लोगों की हत्या कर दी गई. करीब डेढ़ साल बाद का समय था. 2010 का शुरुआती महीना. खबर लगी कि ‘पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग’ में कोई जासूस है. ये खबर तत्कालीन इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) चीफ राजीव माथुर तक पहुंची. थोड़ी जांच पड़ताल की गई तो वही नाम सामने आया, माधुरी गुप्ता

दिल्ली के विकासपुरी में जन्मी गुप्ता इस्लामाबाद स्थित उच्चायोग में सेकेंड सेक्रेटरी (प्रेस एंड इंफॉर्मेशन) थी.

जानबूझ कर लीक की गई जानकारी

राजीव माथुर ने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के तत्कालीन प्रमुख केसी वर्मा और तत्कालीन होम सेक्रेटरी जीके पिल्लई को इसकी जानकारी दी. दिक्कत ये आई कि माधुरी गुप्ता को सीधे-सीधे वापस नहीं बुला सकते थे. क्योंकि उनका प्रोफाइल किसी जासूस से बिल्कुल भी मैच नहीं करता था. लिहाजा भारतीय अधिकारियों ने इस खबर की पुष्टि के लिए एक योजना बनाई. 

अगले दो सप्ताह तक उन पर कड़ी नजर रखी गई. इसी दौरान माधुरी को जानबूझकर एक प्लांटेड जानकारी दी गई जो लीक हो गई. माधुरी को इस बात की कोई भनक नहीं थी कि वो भारतीय अधिकारियों के बिछाए जाल में फंस गई है. उसी साल भूटान में SAARC सम्मेलन होना था. माधुरी गुप्ता को बहाने से दिल्ली बुलाया गया. कहा गया कि SAARC सम्मेलन में मीडिया से जुड़े मामलों में उनकी मदद चाहिए.

21 अप्रैल, 2010 को माधुरी दिल्ली पहुंची. रात को पश्चिमी दिल्ली में अपने आवास पर रही. अगली सुबह रिपोर्ट करने के लिए विदेश मंत्रालय के कार्यालय पहुंची.

‘स्पेशल सेल ऑफ दिल्ली पुलिस’ को पहले ही सूचना दे दी गई थी. माधुरी के वहां पहुंचने के कुछ ही मिनटों बाद उसे हिरासत में ले लिया गया. पूछताछ का सिलसिला चला. आरोप लगाए गए कि उसने डिफेंस से जुड़ी खुफिया जानकारी ISI को दी. और वो ISI के दो अधिकारियों मुदस्सिर रजा राणा और जमशेद के संपर्क में थी. उसी दिन बाद में माधुरी को गिरफ्तार कर लिया गया. 

हनीट्रैप का एंगल

NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की जांच करने वाले अधिकारियों ने बताया कि माधुरी गुप्ता हनीट्रैप का शिकार हुई थी. जांच अधिकारी पंकज सूद ने कारवां से बात करते हुए कहा था कि ISI ने एक युवक को गुप्ता की जिंदगी में ऐसा लाया कि वो फंस गई. 30 साल का वो लड़का कोई और नहीं बल्कि ISI का एजेंट जमशेद उर्फ ​​जिम था. वो माधुरी गुप्ता से करीब 20 साल छोटा था. उसे विदेश मंत्रालय के अधिकारी को बहकाने और उनसे संवेदनशील जानकारी निकालने का काम सौंपा गया था.

दूसरा हैंडलर, मुदस्सर रजा राणा था जो पाकिस्तान के तत्कालीन गृह मंत्री रहमान मलिक का बैचमेट था. उसने इस ऑपरेशन को कॉर्डिनेट किया. सबसे पहले उसी ने एक महिला पत्रकार जावेद रशीद के जरिए गुप्ता से संपर्क किया था. और कहा कि उन्हें आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर की एक दुर्लभ किताब खोजने में मदद चाहिए. इस तरह दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और दोनों ISI एजेंटों ने गुप्ता का भरोसा जीत लिया.

शादी करने और इस्तांबुल जाने की इच्छा

आरोप के मुताबिक, इस्लामाबाद में गुप्ता के आवास पर जो कंप्यूटर लगा था उससे… और उनके ब्लैकबेरी फोन के जरिए ISI की इन दोनों से बातचीत होती थी. जांच में ये भी पता चला कि गुप्ता 30 साल के उस युवक जमशेद से बहुत प्रभावित थी. वो इस्लाम अपनाने, उससे शादी करने और इस्तांबुल जाकर रहना चाहती थी. जमशेद ने इस बात का फायदा उठाया.

एक गंभीर आरोप ये भी लगा कि राणा के कहने पर मार्च 2010 में माधुरी जम्मू-कश्मीर गई थी. वहां उसने राज्य की वार्षिक योजना रिपोर्ट और 310 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की. 

चार्जशीट में जांचकर्ताओं ने लिखा कि पाकिस्तानी एजेंटों ने गुप्ता से बात करने के लिए दो ईमेल बनाए थे. इनके जरिए लगभग 73 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था. 

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चार्जशीट और सजा का इंतजार

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2010 में पुलिस ने गुप्ता के खिलाफ हलफनामा दायर किया. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, माधुरी ने ये बात स्वीकार कर ली थी कि उसने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को जानकारी दी थी. और वो राणा और जावेद रशीद के संपर्क में थी. 

जनवरी 2012 में दिल्ली के एक ट्रायल कोर्ट ने माधुरी गुप्ता के खिलाफ आरोप तय किये. इसके बाद उसे जमानत मिल गई. इस तरह वो अप्रैल 2010 से जनवरी 2012 तक जेल तिहाड़ जेल में रही. 

मई 2018 में माधुरी को दिल्ली की अदालत ने तीन साल की जेल की सजा सुनाई. उसे ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट की धारा 3 और 5 के तहत दोषी ठहराया गया था. हालांकि, माधुरी गुप्ता ने कोर्ट में इन आरोपों को खारिज कर दिया. उसने कहा कि वो निर्दोष है और उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है. सजा सुनाने के बाद कोर्ट ने उनको जमानत दे दी, ताकि वो आगे की अदालत में सजा के खिलाफ अपील कर सके. 

जेल से बाहर आने के बाद वो राजस्थान के भिवाड़ी में रहने लगी. उसने दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. लेकिन इससे पहले कि इस मामले में फैसला आता, अक्टूबर 2021 में 64 साल की उम्र में माधुरी गुप्ता की मौत हो गई.

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