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कहानी उस क्रिकेटर की, जो जूते में घुसी कील से मर गया

क्रिकेट का मैदान देखिए, घास का हर कतरा करीने से कटा होता है. मैदान इतने सुंदर दिखते हैं कि मन करता है जाकर घास में बैठ जाएं. लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था. टीवी कैमरों की चकाचौंध से पहले का क्रिकेट इतना ग्लैमरस नहीं था. मैदान की सफाई भी तरीके से नहीं होती थी. घास बेहरतीब तरीके से उगी रहती थी. इस घास में कई बार सांप भी निकल आए. आज का ये क़िस्सा भी ऐसा ही कुछ है. हालांकि इसमें सांप नहीं एक कील थी. एक कील, जिसने एक क्रिकेटर की जान ले ली.

1933-34 सीजन. साल 1934. त्रिनिदाद एंड टोबैगो अब भी अंग्रेजों का ग़ुलाम था. आज नेशनल स्पोर्ट का दर्जा पा चुका क्रिकेट तब वहां अपने पांव जमा चुका था. त्रिनिदाद की टीमें साल 1869 से ही फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल रही थीं. यहां टीमें इंटर-कोलोनियल टूर्नामेंट में खेलती थीं. आज बात 1936-37 में हुए एक मैच की, जो एक बेहतरीन क्रिकेटर का आखिरी मैच साबित हुआ.

# कील ने ली जान

साल 1909 में पैदा हुए पेस बोलर डॉनल्ड एलिगन ने 1934 में अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया. एलिगन ने अपने करियर में सिर्फ चार फर्स्ट क्लास मैच खेले. इनमें से तीन मैच इंटर-कोलोनियल टूर्नामेंट के थे जबकि एक मैच मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के खिलाफ था. डॉनल्ड बेहद शानदार पेस बोलर थे लेकिन उस दौर में मैच बेहद कम खेले जाते थे. इसके चलते उनका करियर और छोटा हो गया.

1933-34 सीजन में उन्होंने बस दो मैच खेले जिसमें नौ विकेट लिए. 1934-35 और 1936-37 सीजन में डॉनल्ड ने एक-एक मैच खेला. इन दोनों मैचों में मिलाकर उन्होंने नौ विकेट और लिए. 1936-37 सीजन में डॉनल्ड ने अपना बेस्ट प्रदर्शन किया. उन्होंने इस इकलौते मैच की एक पारी में 63 रन देकर सात विकेट झटके. बताते हैं कि इसी मैच के दौरान एक कील उनके जूतों को चीरते हुए पैर में घुस गई.

इस कील के घुसने के चलते उन्हें ब्लड पॉइजनिंग हो गई. और सही इलाज ना मिलने की वजह से उनकी मौत हो गई. तब वो सिर्फ 28 साल के थे. चार मैचों के अपने फर्स्ट क्लास करियर में डॉनल्ड ने 17.77 की ऐवरेज से 18 विकेट लिए.


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