Submit your post

Follow Us

जब वहीदा रहमान की जूती लेकर बेतहाशा उनकी ओर दौड़ पड़े अमिताभ बच्चन

अमिताभ बच्चन की फैन फॉलोविंग की जड़ें तीन जनरेशंस तक फैली हुई हैं. दादा, बाप और बेटा, वो तीनों के ही फेवरेट लिस्ट में शामिल रहे हैं. लेकिन जब भी उनसे पूछा जाता है कि उनका पसंदीदा एक्टर कौन है, तो वो दिलीप कुमार और वहीदा रहमान का नाम लेते हैं. इसे ह्यूमन टेंडेंसी कहें या फिल्म इंडस्ट्री की बिगड़ी हुई इमेज, लोग इस तरह से कही बातों का कम ही विश्वास करते हैं. मगर अमिताभ बच्चन ने जिस किस्से के साथ वहीदा रहमान को अपना फेवरेट बताया है, उसे आपको मानना ही पड़ेगा. क्योंकि ये तब की बात है, जब अमिताभ बच्चन को इमेज और स्टारडम का ख्याल नहीं रखना होता था.

जिस टीवी चैनल पर अमिताभ बच्चन की शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ आता है, उसी चैनल का एक शो है सुपरस्टार सिंगर. इसके एक स्पेशल एपिसोड में अमिताभ बच्चन, वहीदा रहमान और आशा पारेख को बतौर गेस्ट बुलाया गया था. बच्चन से यहां भी वही घिसा-पिटा सवाल पूछा गया कि फिल्म इंडस्ट्री में उनका फेवरेट कौन है. अमिताभ ने फिर से वही नाम लिया, जो अब तक लेते आए थे. दिलीप कुमार और वहीदा रहमान. वहीदा के प्रति अपनी दीवानगी का इज़हार करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे वो एक फिल्म की शूटिंग के दौरान वहीदा रहमान की जूती लेकर बेतहाशा उनकी ओर भागे थे.

एक इवेंट के दौरान अमिताभ बच्चन के साथ वहीदा रहमान.
एक इवेंट के दौरान अमिताभ बच्चन के साथ वहीदा रहमान. वहीदा ने अमिताभ की पत्नी और मां दोनों का रोल किया है. 

अमिताभ ने बताया कि उन्हें वहीदा रहमान के साथ पहली बार काम करने का मौका मिला 1971 में आई फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ में. फिल्म में सुनील दत्त और वहीदा रहमान के बीच रोमैंटिक एंगल था. और अमिताभ ने एक गूंगे लड़के का रोल किया था. इस फिल्म की शूटिंग के दौरान एक मौका ऐसा आया जब वहीदा रहमान और सुनील दत्त को नंगे पांव तपती रेत पर शूट करना था. लोकेशन का टेंपरेचर इतना ज़्यादा था कि वहां जूते पहनने के बावजूद पांव में तकलीफ हो रही थी, फिर नंगे पांव की तो क्या ही बात की जाए. अमिताभ इस बात से परेशान हुए पड़े थे कि इतनी दिक्कत वाली सिचुएशन में वहीदा रहमान नंगे पांव कैसे शूट करेंगी. शूट के दौरान जैसे ही डायरेक्टर ने ब्रेक लेने की बात कही अमिताभ ने फौरन वहीदा की जूती उठाई और उनकी ओर दौड़ने लग गए. बकौल अमिताभ, शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता कि वो पल उनके लिए कितना स्पेशल था.

सुनील दत्त डायरेक्टेड फिल्म 'रेशमा और शेरा' के फैनमेड पोस्टर में अमिताभ, वहीदा और सुनील दत्त.
सुनील दत्त डायरेक्टेड फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ के फैनमेड पोस्टर में अमिताभ, वहीदा और सुनील दत्त.

इतना ही नहीं उन्होंने शो पर ये भी बताया कि वहीदा रहमान और उनके बीच एक और बड़ा मज़ेदार कनेक्शन है. वहीदा ने बच्चन परिवार के तीन सदस्यों के साथ काम किया है. और वो सबकी मां के रोल में नज़र आई हैं.  1978 में आई फिल्म ‘त्रिशूल’ में उन्होंने अमिताभ की मां का किरदार निभाया था. फागुन (1973) में जया बच्चन और अनुपम खेर की डायरेक्टॉरियल डेब्यू ‘ओम जय जगदीश’ (2002) में वो अभिषेक बच्चन की मां बनी थीं. अमिताभ के इस स्वीट जेस्चर के जवाब में वहीदा ने मुस्कुराते हुए बस इतना कहा कि उन्हें ये बात बड़ी अजीब तरह की खुशी दे रही है. ऐसे ही चलता रहा, तो वो एक दिन अभिषेक के बच्चों की भी मां का किरदार निभाएंगी. अमिताभ और वहीदा रहमान ने आखिरी बार राकेश ओमप्रकाश मेहरा की ‘दिल्ली 6’ में साथ काम किया था. इसमें इन दोनों कलाकारों ने अभिषेक बच्चन के किरदार के दादा-दादी का रोल किया था.


वीडियो देखें: कौन बनेगा करोड़पति में इस महिला ने अमिताभ बच्चन की बोलती बंद कर दी

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्रिकेट के किस्से

26/11 नहीं होता तो श्रीलंका की जगह धोनी, सचिन, द्रविड़ पर होता हमला!

जयावर्धने ने गर्दन हिलाई और गोली उनके कान को लाल करते हुए निकली.

'आप की पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेली इनिंग ने विश्वकप को सफ़ल बना दिया है'

विश्वकप के आयोजक सदस्य ने जब भारतीय बल्लेबाज़ को फैक्स कर ये कहा था.

उस सीरीज का किस्सा, जिसने ऑस्ट्रेलिया में टीम इंडिया का 71 साल का सूखा खत्म किया

सीरीज के दौरान भी खूब ड्रामे हुए थे.

Vizag में जिन वेणुगोपाल का गेट बना है उन्होंने गुड़गांव में पीटरसन और इंग्लैंड को रुला दिया था

वेणुगोपाल की इस पारी के आगे द्रविड़ की ईडन की पारी भी फीकी थी.

जब तेज बुखार के बावजूद गावस्कर ने पहला वनडे शतक जड़ा और वो आखिरी साबित हुआ

मानों 107 वनडे मैचों से सुनील गावस्कर इसी एक दिन का इंतजार कर रहे थे.

चेहरे पर गेंद लगी, छह टांके लगे, लौटकर उसी बॉलर को पहली बॉल पर छक्का मार दिया

इन्होंने 1983 वर्ल्ड कप फाइनल और सेमी-फाइनल दोनों ही मैचों में 'मैन ऑफ द मैच' का अवॉर्ड जीता था.

पाकिस्तान आराम से जीत रहा था, फिर गांगुली ने गेंद थामी और गदर मचा दिया

बल्ले से बिल्कुल फेल रहे दादा, फिर भी मैन ऑफ दी मैच.

जब वाजपेयी ने क्रिकेट टीम से हंसते हुए कहा- फिर तो हम पाकिस्तान में भी चुनाव जीत जाएंगे

2004 में इंडियन टीम 19 साल बाद पाकिस्तान के दौरे पर गई थी.

शिवनारायण चंद्रपॉल की आंखों के नीचे ये काली पट्टी क्यों होती थी?

आज जन्मदिन है इस खब्बू बल्लेबाज का.

ऐशेज़: क्रिकेट के इतिहास की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी दुश्मनी की कहानी

और 5 किस्से जो इस सीरीज़ को और मज़ेदार बनाते हैं