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करिश्मा कपूर की कामयाबी का क्रेडिट जूही चावला क्यों ले रही हैं?

साल 1984. उस साल मिस इंडिया का खिताब जीता था जूही चावला ने. जूही, जिन्होंने बॉलीवुड में फ्लॉप फिल्म से डेब्यू किया, फिर एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं. फिर कई फ्लॉप का भी सामना किया. 1986 में आई फिल्म ‘सल्तनत’ जूही की पहली फिल्म थी. तब से वो इंडस्ट्री में एक्टिव हैं. आखिरी बार ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ (2019) में नजर आई आई थीं.

जूही चावला आज अपने फिल्मी सफर को कैसे देखती हैं, इसके बारे में उन्होंने राजीव मसंद को दिए एक इंटरव्यू में बताया.

फिल्में रिजेक्ट करने का अफसोस

जूही ने अपने करियर में कई हिट फिल्मों को रिजेक्ट किया. इसकी वजह वो बताती हैं कि उन्हें मन का काम करना पसंद था. उन्होंने चैलेंज एक्सेप्ट नहीं किए. कई बार सिर्फ ईगो की वजह से फिल्में छोड़ दीं. बकौल जूही,

मेरा दिमाग खराब हो गया था. मुझे अचानक लगने लगा था कि अगर मैं काम नहीं करूंगी, तो फिल्म इंडस्ट्री बंद हो जाएगी. मुझे कई शानदार फिल्मों में काम करने के मौके मिले, लेकिन मेरा ईगो आड़े आने लगा था. मैंने कुछ ऐसी फिल्में नहीं कीं, जो मैं कर सकती थी. सिर्फ इसलिए नहीं किया, क्योंकि मैं आसान काम करना चाहती थी. अपने कम्फर्ट ज़ोन में रहना चाहती थी. उन लोगों के साथ काम करना चाहती थी, जिनके साथ मैं सहज हूं.

‘करिश्मा के स्टारडम के लिए मैं जिम्मेदार’

‘राजा हिंदुस्तानी’ (1996) और ‘दिल तो पागल है’ (1997) ब्लॉक बस्टर फिल्में थीं. दोनों ही फिल्मों ने करिश्मा कपूर के फिल्मी करियर में चार चांद लगाए. ‘दिल तो पागल है’ के लिए तो करिश्मा कपूर ने नेशनल अवॉर्ड भी जीता था. लेकिन ये दोनों ही फिल्में जूही चावला को ऑफर हुई थीं. उनके मना करने के बाद मेकर्स स्क्रिप्ट लेकर करिश्मा कपूर के पास पहुंचे थे. इंटरव्यू में जूही ने कहा,

मेरी वजह से दूसरे लोग स्टार बन पाए. करिश्मा कपूर के स्टारडम के लिए मैं जिम्मेदार हूं. उन्हें मुझे थैंक्स कहना चाहिए.

जूही चावला और करिश्मा कपूर ने 1994 में आई ‘अंदाज’ में साथ में काम किया था. इसके बाद दोनों एक्ट्रेस ‘एक रिश्ता’ (2001) में नजर आई थीं. इस फिल्म में अक्षय कुमार और करिश्मा कपूर लीड हीरो-हीरोइन थे. जूही अक्षय कुमार की बहन के किरदार में थीं. फिल्म में अमिताभ बच्चन ने भी काम किया था.

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फिल्म एक रिश्ता का एक सीन. (फोटो सोर्स- बॉलीवुड हंगामा)

बोल्ड सीन से परहेज

जूही चावला ने बताया कि वो फिल्मों में बोल्ड सीन करने से बचती थीं. एक बोल्ड सीन करने से पहले उन्हें टेंशन हो जाता था. ऐसा ही एक किस्सा उन्होंने फिल्म ‘लुटेरे’ (1993) से जुड़ा बताया. फिल्म में जूही के अपोजिट थे सनी देओल थे. जूही ने कहा,

‘लुटेरे’ का गाना ‘मैं तेरी रानी, तू मेरा राजा’ की शूटिंग करना आसान नहीं था. तब ये बहुत बड़ी बात थी. मुझे समुद्र किनारे सिर्फ एक शर्ट पहनकर पूरा गाना करना था. ‘कयामत से कयामत’ तक के बाद मुझे ये फिल्म मिली थी. मेरे लिए ये काफी बड़ा बदलाव थी. ये निर्देशक धर्मेंश दर्शन की सोच थी. सभी का यही मानना था कि गाने की खूबसूरती उसी में है. लेकिन मैं सिर्फ एक शर्ट पहनने में नर्वस हो रही थी. बाद में मुझे पता चला कि सरोज खान इस गाने को कोरियोग्राफ कर रही हैं, तो मैंने राहत की सांस ली. मैं खुश थी क्योंकि उन्होंने इससे पहले श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित को कोरियोग्राफ किया था. वो बेहतरीन कोरियोग्राफर हैं. उनके साथ मैं इस गाने को लेकर सहज हो गई थी.

आगे चलकर सरोज खान ने ‘राजू बन गया जेंटलमेन (1992), ‘इज्जत की रोटी’ (1993), ‘आईना’ (1993) और ‘डर’ (1993) जैसी फिल्मों में जूही चावला के साथ काम किया.

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जूही चावला और जय मेहता.

करियर के टॉप पर शादी का फैसला

जूही बॉलीवुड की उन हीरोइन में से हैं, जिन्होंने उस वक्त शादी की, जब उनका करियर सबसे जबरदस्त चल रहा था. उन्होंने 1995 में बिजनेसमैन जय मेहता से शादी की थी. लेकिन काफी वक्त तक मीडिया को उनकी शादी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. अपनी शादी को सीक्रेट रखने के बारे में जूही ने कहा,

तब सब ऐसा करते थे. तब लोगों के पास कैमरे वाला मोबाइल और इंटरनेट नहीं होता था, इसलिए ये पॉसिबल था. मैं तब इस्टेब्लिश हुई ही थी. मैंने जो कुछ भी हासिल किया था, मुझे उसे खोने का डर था.

जूही ने जय मेहता से अपनी पहली मुलाकात के बारे में कहा कि वो फिल्मों में आने से पहले भी एक बार जय से मिल चुकी थीं. वो अपने दोस्तों के साथ थीं और जय अपने दोस्तों के ग्रुप में. कुछ वक्त बाद दोनों का कॉन्टेक्ट टूट गया और जूही फिल्मों में बिजी हो गईं. कुछ साल बाद उनकी फिर से जय से मुलाकात हुई. जूही ने बताया कि उनकी मां की मौत के बाद जय ने उन्हें बहुत सपोर्ट किया. जूही ने कहा,

वो मेरे लिए बहुत मुश्किल वक्त था, क्योंकि मुझे लगने लगा था कि हर वो चीज खो दूंगी, जिससे मैं प्यार करती हूं. लेकिन तब से मैं जहां भी जाऊं, जय वहां होते थे. मैं जहां भी नजर घुमाऊं, वो फूल और गिफ्ट्स के साथ नजर आते थे. हर रोज. मेरे बर्थडे वाले दिन उन्होंने एक ट्रक भरकर लाल गुलाब मेरे घर भिजवाए थे. मैं खुद से पूछ रही थी कि इन ट्रक भरकर आए गुलाबों का करूंगी क्या? वो जितना कर सकते थे, उन्होंने किया.

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राजू बन गया जेंटलमेन के एक सीन में जूही चावला, शाहरुख खान और नाना पाटेकर.

शाहरुख को देखकर हंसी निकल गई

जूही ने बताया कि जब उनकी मां की मौत हुई, तब वो शाहरुख खान के साथ फिल्म ‘डुप्लीकेट’ में काम कर रही थीं. उन्हें मां की मौत के सदमे से बाहर लाने में शाहरुख ने बहुत मदद की थी. शाहरुख सेट का माहौल काफी हंसी-मजाक वाला रखते थे. उन्हें हंसाने के लिए जोक मारते रहते थे. लेकिन जूही खुद शाहरुख के लुक पर उनकी खिल्ली उड़ा चुकी हैं. इसके बारे में उन्होंने खुद ही बताया,

मुझे ‘राजू बन गया जेंटलमेन’ (1992) ऑफर हुई थी. मेकर्स ने मुझे बताया था कि आपके अपोजिट एक नया लड़का है, जो आमिर खान जैसा दिखता है. आमिर खान तब स्टार थे. हालांकि शाहरुख खान भी टीवी के स्टार थे. उनका ‘फौजी’ सीरीयल आ चुका था. लेकिन मैं उनको नहीं जानती थी. मैंने कहा- ठीक है. आमिर खान मतलब छोटे-छोटे बाल, भूरी सी आंखों वाला गोरा सा लड़का. लेकिन मैंने जब पहली बार को शाहरुख को देखा, तो हैरान रह गई. एक सांवला, मोटी-सी नाक वाला पतला-सा लड़का, जिसके बाल माथे पर रहते हैं. मैंने मेकर्स से पूछा कि ये कहां से आमिर खान जैसा लग रहा है? लेकिन शाहरुख खान के साथ काम करना मजेदार था. अगले कुछ सालों में तो हम दोस्त बन गए.

शाहरुख खान और जूही चावला ने साथ में ‘डर’ (1993), ‘राम जाने’ (1995) ‘यश बॉस’ (1997) और ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ (2000) जैसी फिल्मों में साथ काम किया.


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