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वो फिल्म जिसमें 'मौत का तमाशा' दिखाकर नाना पाटेकर ने देशभर में तहलका मचा दिया

6 दिसंबर, 1992 की दोपहर 02:30 बजे कार सेवकों द्वारा बाबरी मस्जिद के गिराए जाने की खबर ब्रेक हुई. अगले कुछ घंटों में मामला काफी तनावपूर्ण हो गया. मुंबई में दंगे शुरू हो गए. सारे काम-धाम ठप पड़ गए. फिल्मों की शूटिंग रुक गई. ‘तिरंगा’ बनकर तैयार थी और नाना पाटेकर अगले कुछ दिनों में फिल्म ‘क्रांतिवीर’ की शूटिंग शुरू करने वाले थे. जब बाकी सुपरस्टार्स चौक-चौबंद घरों में अपने परिवार के साथ कैद हो गए, तब नाना सड़क पर उतर आए. अपनी जीप में बैठकर वो लोगों के घर-घर जाकर इस मारकाट से दूर रहने की अपील करने लगे. बाद के एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया.

”घर पे बैठे-बैठे घुटन सी हो गई थी”

नाना इतना कहकर चुप हो गए. जब 12 मार्च, 1993 को प्लाज़ा सिनेमा में ब्लास्ट हुआ, तब वहां नाना की ही फिल्म ‘तिरंगा’ चल रही थी. इन दंगों को उन्होंने काफी करीब से देखा था और इसका उन पर असर भी पड़ा.

फिल्म 'क्रांतिवीर' का फैनमेड पोस्टर.
फिल्म ‘क्रांतिवीर’ का फैनमेड पोस्टर.

मुंबई में जो खेल चल रहा था, ये बालासाहेब ठाकरे की पार्टी शिव सेना का रचाया हुआ था. नाना की बालासाहेब से बनती थी. वो उन्हें अपना फादर फिगर मानते थे. बताया जाता है कि इस मामले को लेकर वो उनके पास भी गए थे. दोनों की इस पर चर्चा हुई. नाना, बालासाहेब के साथ हुई इस चर्चा के बारे में रेडिफ को दिए एक इंटरव्यू में बताते हैं कि भले उनकी बाला साहेब से करीबियत थी. लेकिन वो उनकी हर बात से सहमत नहीं होते थे. अपने इस कथन को और पुष्ट करते हुए नाना जोड़ते हैं-

”मैं किसी पार्टी से नहीं जुड़ा. मैं बालासाहेब के करीब हूं. उन्होंने मुझसे अपनी पार्टी के टिकट पर इलेक्शन लड़ने को कहा. मैंने शिव सेना के कुछ नेताओं के लिए प्रचार किया लेकिन मैंने चुनाव नहीं लड़ा. मैं उस पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं हूं.”

फिल्म 'अग्निसाक्षी' के अनाउंसमेंट के मौके पर जैकी श्रॉफ और नाना पाटेकर के साथ बाल ठाकरे.
फिल्म ‘अग्निसाक्षी’ के अनाउंसमेंट के मौके पर जैकी श्रॉफ और नाना पाटेकर के साथ बाल ठाकरे.

जब दंगों का असर नाना की फिल्म में दिखने लगा

1993 ब्लास्ट के बाद जब हालात सामान्य हुए, तब मेहुल कुमार के डायरेक्शन में बनने वाली फिल्म ‘क्रांतिवीर’ की शूटिंग शुरू हुई. तिरंगा की भारी सफलता के बाद एक बार फिर से नाना और मेहुल साथ आ रहे थे. ‘क्रांतिवीर’ में नाना के अलावा डिंपल कपाड़िया, डैनी, परेश रावल, ममता कुलकर्णी और अतुल अग्निहोत्री भी काम कर रहे थे. जो ‘जंजीर’ अमिताभ बच्चन के लिए थी, वही ‘क्रांतिवीर’ नाना पाटेकर के लिए साबित हुई. समाज और वहां फैली गंदगी से परेशान एक आम आदमी, जो खुद इसकी सफाई करने का ज़िम्मा उठाता है. बीते समय में दंगों में मारकाट, धर्म के नाम पर लड़ाई उसमें नेताओं के योगदान ने नाना को परेशान कर दिया था. समाज से तकरीबन इसी तरह की दिक्कतें ‘क्रांतिवीर’ में उनके किरदार प्रताप को भी थी. नाना ने अपने गुस्से और फ्रस्ट्रेशन को उस किरदार की मदद से बाहर निकाल दिया. आपको वो सीन तो याद ही होगा, जिसमें प्रताप पब्लिक से हिंदू और मुसलमान के खून में अंतर पूछता है. ये काफी मेलोड्रमैटिक सीन था लेकिन नाना ने उसे ऐसा प्ले किया कि लोगों को आज भी वो डायलॉग याद है. इस पावरफुल परफॉरमेंस का नतीजा ये हुआ कि प्रताप के किरदार से पब्लिक ने रिलेट किया और फिल्म ब्लॉकबस्टर हो गई. अगर फिल्म का वो सीन नहीं याद, तो यहां देख लीजिए:

फिल्म के सबसे हिट डायलॉग बिना याद किए ही बोल दिया

”आ गए मेरी मौत का तमाशा देखा. अब मुझे लटका देंगे. ज़ुबान ऐसी बाहर आ जाएगी. आंखें बाहर आएंगी. थोड़ी देर लटका रहूंगा फिर ये मेरा भाई मुझे नीचे उतार देगा. फिर चें चें करते आप घर चले जाओगे. खाना खाओगे, सो जाओगे.”

फिल्म के आखिर में फांसी के फंदे के पास खड़ा प्रताप ये सब कहता है. ये फिल्म नाना पाटेकर की परफॉरमेंस के अलावा फिल्म के डायलॉग्स के लिए याद रखी जाती है. या इन मारक डायलॉग्स की वजह से नाना और ये फिल्म लोगों की स्मृतियों में बचे हुए हैं. ‘क्रांतिवीर’ के डायलॉग्स के.के. सिंह ने लिखे थे. खैर, आम तौर पर सीन्स के शूट होने से पहले एक्टर्स अपने डायलॉग्स याद करते हैं. लेकिन इस सीन के लिए नाना ने अपने डायलॉग्स एक बार पढ़े और शॉट देने चले गए. वो भी तब जब सीन काफी लंबा था. उन्होंने वो संवाद तो जस का तस नहीं बोला लेकिन इस सीन में उन्होंने जो किया वो इतना कमाल था कि ये सीन शूटिंग के दौरान ही फिल्म में स्टैंड आउट करने लगा था. फाइनली कई (बुरे) लोगों की मौत का ज़िम्मेदार प्रताप फांसी के फंदे पर खड़ा है. इतने में एक नेताजी आकर बताते हैं कि देशद्रोहियों को मारकर प्रताप ने देश का भला किया है. इसलिए राष्ट्रपति ने उसकी फांसी की सज़ा माफ कर दी है. वो 6 मिनट का पूरा सीन आप नीचे देख सकते हैं:

जब डिंपल का नाना को ‘अप्रिय’ कहना, नाना के गले की फांस बन गया

‘क्रांतिवीर’ में काम करने के 16 साल बाद नाना और डिंपल ने ‘तुम मिलो तो सही’ (2010) नाम की फिल्म पर साथ आए. इस फिल्म के प्रमोशन के दौरान डिंपल ने कुछ ऐसा कह दिया, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. डिंपल ने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि नाना हालांकि अब उन्हें बुली नहीं करते लेकिन वो बड़े ‘ऑबनॉक्सिसियस’ यानी अप्रिय टाइप के आदमी रहे हैं. उनका भी डार्क साइड है, जो लोगों की नज़र से परे रखा जाता है. डिंपल ने डैमैज कंट्रोल करते हुए कहा कि लेकिन वो इतने ज़्यादा टैलेंटेड हैं कि उन्हें 100 खून माफ होने चाहिए. ‘तुम मिलो तो सही’ में तो दोनों के बीच सबकुछ ठीक था. डिंपल पुरानी फिल्मों की बात कर रही थीं. इसी बीच फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज़’ के सेट पर एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने नाना पर उन्हें गलत तरीके से छूने और हैरसमेंट का आरोप लगाया. जब-जब नाना के खिलाफ हैरसमेंट वाली बात का ज़िक्र छिड़ा, हर बार ये वीडियो आकर उस पूरी नैरेटिव को बदल देने का काम करता. डिंपल के स्टेटमेंट के आधार पर लोगों को लगा कि हो सकता है नाना को ‘ऑबनॉक्सिसियस’ कहने से उनका यही मतलब था. हमारा काम फैसला सुनाना नहीं है. हम बस चेन ऑफ इवेंट्स बता रहे हैं. हैरसमेंट मामले में नाना के खिलाफ सबूतों और गवाहों की कमी की वजह से मुंबई पुलिस ने जून 2019 में क्लोज़र रिपोर्ट फाइल कर दी. डिंपल का वो वीडियो आप यहां देख सकते हैं:

जब बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड लेते समय नाना रोने लगे

22 जुलाई, 1994 को रिलीज़ होने के बाद ‘क्रांतिवीर’ उस साल की तीसरी सबसे कमाऊ फिल्म साबित हुई. नाना पाटेकर हर ओर अपनी परफॉरमेंस के चर्चे सुन रहे थे. उन्हें अंदेशा था कि स्क्रीन अवॉर्ड्स में उनको बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिल सकता है. लेकिन उन्हें (1995 में) नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स और फिल्मफेयर से बेस्ट एक्टर अवॉर्ड की बिलकुल उम्मीद नहीं थी. वो ‘परिंदा’ और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए दो बार बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड जीत चुके थे. ‘क्रांतिवीर’ ने उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड जितवाया. फिल्मफेयर के बारे में उन्हें पता था कि इस अवॉर्ड को एक्टर पैसे देकर खरीद लेते हैं. मगर इमेज चाहे जितनी भी खराब हो नेशनल अवॉर्ड्स के बाद फिल्मफेयर इंडिया का दूसरा सबसे बड़ा फिल्म अवॉर्ड है. नाना, यहां बेस्ट एक्टर और बेस्ट विलन का अवॉर्ड पहले जीत चुके थे. ‘क्रांतिवीर’ के लिए जब उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला, तो उनके जैसा मजबूत आदमी भी रो पड़ा. नाना को अवॉर्ड्स की कभी कोई ज़्यादा परवाह नहीं थी. लेकिन उनकी पत्नी नीलकंठी हमेशा से उन्हें अवॉर्ड्स जीतते देखना चाहती थीं. लेकिन जब नाना ने बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड जीता, तब तक नाना अपना एक बच्चा खो चुके थे और नीलकंठी से अलग हो चुके थे. लेकिन इस मुबारक मौके पर वो उन्हें याद कर स्टेज पर ही फूट पड़े.

'क्रांतिवीर' के लिए फिल्मफेयर बेस्टर एक्टर का अवॉर्ड जीतने वाले नाना पाटेकर के साथ 'हम आपके हैं कौन' के लिए बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड विजेता माधुरी दीक्षित.
‘क्रांतिवीर’ के लिए फिल्मफेयर बेस्टर एक्टर का अवॉर्ड जीतने वाले नाना पाटेकर के साथ ‘हम आपके हैं कौन’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड विजेता माधुरी दीक्षित.

‘क्रांतिवीर’ अपनी रिलीज़ के दौर की ही तरह आज भी नाना पाटेकर के झामफाड़ परफॉर्मेंस के लिए याद रखी जाती है. तब फिल्म की पॉलिटिक्स को लेकर ज़्यादा बात नहीं हुई लेकिन तमाम सामाजिक कुरीतियों से लड़ते हुए भी वो एक विजिलांते फिल्म रह जाती है. हालांकि हिंदू-मुस्लिम एकता पर फिल्म का मजबूत स्टैंड भी इसकी एक यूएसपी बनती है. प्रॉब्लम वहां आती है, जब फिल्म के मुख्य किरदार को कई कत्ल और गैर-कानूनी काम करते दिखाने के बावजूद फिल्म का हीरो डिक्लेयर कर दिया जाता है. और राष्ट्रपति ऐन मौके पर उसकी फांसी पर रोक लगा देते हैं. शायद इसे शास्त्रों में क्रिएटिव लिबर्टी कहा गया है.


वीडियो देखें: 32 साल पहले Dr Dang को लगे थप्पड़ की गूंज आज तक सुनाई देती है

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