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वो इकलौता हीरो, जो दो-दो फिल्मों में शाहरुख की हीरोइन ले उड़ा

भारतीय सिनेमा में शाहरुख खान को किंग ऑफ रोमैंस कहा जाता है. लेकिन एक एक्टर ऐसा भी है, जो उनके हाथ से हीरोइन ले उड़ा. वो भी दो-दो बार. ये एक्टर हैं दीपक तिजोरी. हिन्दी फिल्म में हीरो के दोस्त का किरदार हमेशा से बहुत खास रहा है. इस सबजेक्ट में दीपक ने पीएचडी की हुई है. फिल्म में हीरो का जीवनसाथी चुनने से पहले इनका सेलेक्शन होता था. फिर उम्र बढ़ती गई और हीरो सेल्फ डेपेंडेंट हो गए. इसके बाद सबका साथ देने वाले दीपक का साथ किसी ने नहीं दिया. सपना दीपक का भी हीरो बनने का ही था लेकिन किस्मत साथ नहीं दे रही थी. एक बार मौका मिला था. जब शाहरुख और आमिर जैसे सितारों के साथ इन्हें फिल्म में हीरो बनाया गया. लेकिन उस फिल्म का साथ दर्शकों ने नहीं दिया और फिल्म डूब गई.

फिर इन्होंने डायरेक्शन में कदम रखा. उन्होंने ‘खामोश- खौफ की रात’ (2003), ‘फरेब’ (2005), ‘टॉम डिक एंड हैरी’ (2006) और ‘फॉक्स’ (2009) जैसी फिल्में डायरेक्ट की. यहां कहानियों ने साथ नहीं दिया. इसके बाद दीपक तिजोरी का पुकार नाम ‘खाली तिजोरी’ और ‘दीपक तले अंधेरा’ पड़ गया. बीच में उन्होंने कुछ टीवी सीरिसल में भी उन्होंने काम किया. जो पसंद भी की गईं. लेकिन तब तक पर्सनल लाइफ में दिक्कतें शुरू हो गईं. लेकिन इस आदमी ने कभी हार नहीं मानी.

1988 में आई फिल्म ‘तेरा नाम मेरा नाम’ से अपना फिल्मी करियर शुरू करने वाले दीपक 28 अगस्त, 1961 को मुंबई में पैदा हुए थे. स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई वहीं से पूरी हुई. थोड़ा बहुत ड्रामा का शौक था. इसलिए पढ़ाई-लिखाई के साथ एक थिएटर ग्रुप जॉइन कर लिया. आमिर खान, परेश रावल, आशुतोष गोवारिकर और विपुल शाह पहले से ही उस ग्रुप के मेंबर थे. दोस्तों ने दीपक की एक्टिंग को अप्रीशिएट किया. इसके बाद दीपक एक्टिंग में ही करियर बनाने को लेकर सीरियस हो गए.

'पहला नशा' वो एकमात्र फिल्म है. जिसमें शाहरुख और आमिर खान ने एक साथ काम किया है.
‘पहला नशा’ वो एकमात्र फिल्म है. जिसमें शाहरुख और आमिर खान ने एक साथ काम किया है. हालांकि इसमें इन दोनों कलाकारों ने गेस्ट रोल किया था.

अपने एक इंटरव्यू में दीपक ने बताया कि एक्टिंग का डिसीज़न तो ले लिया लेकिन काम मिल ही नहीं रहा था. प्रोड्यूसरों से मिलने के लिए उन्हें तीन साल ऑफिसों के चक्कर काटने पड़े. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इस दौरान एक होटल में काम किया. एक मशहूर सिनेमा मैग्ज़िन में भी काम किया. आखिरकार 1988 में पहला मौका मिला. फिल्म थी ‘तेरा नाम मेरा नाम’. रमेश तलवार डायरेक्टेड इस फिल्म में उन्हें करण शाह, तन्वी आज़मी और सुपर्णा आनंद के साथ काम करने का मौका मिला. इस फिल्म में पहली बार उन्होंने सपोर्टिंग रोल किया. ये सोचकर कि शुरुआत कर लेते हैं, लीड रोल्स आगे कर लेंगे. लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा कभी हो नहीं पाया.

उनके फिल्मी करियर और जीवन से जुड़े कुछ किस्से हम आपको बताएंगे. पढ़िए-

फिल्म 'तेरा नाम मेरा नाम' का पोस्टर और दूसरी ओर दीपक तिजोरी.
फिल्म ‘तेरा नाम मेरा नाम’ का पोस्टर और दूसरी ओर दीपक तिजोरी.

एक बड़ी फिल्म में हीरो का रोल करने वाले थे, बाद में उसी फिल्म में हीरो के दोस्त का रोल किया

‘तेरा नाम मेरा नाम’ के बाद दीपक को कुछ और फिल्मों में साइड रोल्स मिले. मगर उन्हें पहचान दिलाई महेश भट्ट की 1990 में आई फिल्म आशिकी ने. बताया जाता है कि ये फिल्म महेश भट्ट की पहली शादी की कहानी पर आधारित थी. महेश ने इस फिल्म में लीड रोल के लिए दीपक तिजोरी को साइन कर लिया था. इसी दौरान महेश यूनिसेफ के साथ काम कर रही इंदिरा रॉय के घर किसी काम से गए. यहां महेश ने उनके बेटे राहुल को स्पॉट किया. राहुल उन्हें पहली ही नज़र में पसंद आ गए. महेश भट्ट ने वहीं सोच लिया कि उनकी फिल्म का हीरो यही लड़का होगा. ये बात उन्होंने लौटने के बाद दीपक को भी बताई. दीपक निराश थे. लेकिन महेश ने उन्हें फिल्म से निकाला नहीं था. उनके लिए एक नया किरदार गढ़ा था.

ये अनु अग्रवाल और राहुल राय दोनों की ही पहली फिल्म थी.
फिल्म ‘आशिकी’ के एक सीन में राहुल रॉय और दीपक तिजोरी. ये अनु अग्रवाल और राहुल रॉय दोनों की ही पहली फिल्म थी. 

इस फिल्म में दीपक को बल्लू के कैरेक्टर में कास्ट किया गया था, जो हीरो का बेस्ट फ्रेंड था. ये फिल्म रिलीज़ हुई और बहुत बड़ी हिट हुई. इसके बाद लोग दीपक को पहचानने लगे. इंडस्ट्री ने भी बतौर एक्टर उनपर भरोसा दिखाना शुरू कर दिया. काम मिलने लगा. लेकिन कैरेक्टर में ज़्यादा वेरिएशन नहीं मिल रही थी. 90 के दशक की हर दूसरी फिल्म में दीपक तिजोरी हीरो के दोस्त के रोल में दिखाई देते थे.

जिस रोल के लिए अक्षय कुमार ने ऑडिशन दिया वो दीपक को मिल गया

आशिकी में दीपक के काम से इंप्रेस होकर महेश भट्ट ने उन्हें अपनी दो और फिल्मों में काम दिया. ये फिल्में थीं दिल है कि मानता नहीं और संजय दत्त स्टारर सड़क. दिल है कि मानता नहीं में दीपक एक छोटे से गेस्ट रोल में दिखाई दिए थे. मगर सड़क में उनका किरदार फिर से हीरो के खास दोस्त का था. फिल्म में गोट्या का उनका किरदार बहुत पसंद किया गया था. लेकिन इससे दीपक खास संतुष्ट नहीं थे. ठीक इसी समय उन्हें मिली उनके करियर की सबसे यादगार फिल्म. ये एक एंटी-हीरो कैरेक्टर था, जो उनके पिछले रोल्स से अलग था. फिल्म थी आमिर खान और आयशा जुल्का स्टारर जो जीता वही सिकंदर. इस फिल्म में दीपक के कास्ट होने के पीछे की कहानी बड़ी इंट्रेस्टिंग है.

फिल्म 'जो जीता ही सिकंदर' के एक सीन में आमिर खान और दीपक तिजोरी. इस फिल्म का एक बड़ा हिस्सा दोबारा शूट करना पड़ा क्योंकि हीरोइन और साइड हीरो ने बीच में ही फिल्म छोड़ दी थी.
फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ के एक सीन में आमिर खान और दीपक तिजोरी. इस फिल्म का एक बड़ा हिस्सा दोबारा शूट करना पड़ा क्योंकि हीरोइन और दूसरे हीरो ने बीच में ही फिल्म छोड़ दी थी.

हुआ ये कि मंसूर खान की इस फिल्म के लिए आमिर खान के बाद दूसरे लीड रोल के लिए अक्षय कुमार ने ऑडिशन दिया था. ये ऑडिशन लिया था मशहूर कोरियोग्राफर और फिल्ममेकर फराह खान ने. फराह जो जीता वही सिकंदर से बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर जुड़ी हुई थीं. लेकिन उन्हें इस फिल्म में हर तरह का काम करने को मिला. फराह को अपने करियर का पहला गाना भी इसी फिल्म में कोरियोग्राफ करने को मिला. वो गाना था ‘पहला नशा’. खैर, अक्षय ने इस फिल्म के लिए ऑडिशन तो दिया मगर उन्हें वो रोल नहीं मिल पाया. वो रोल गया मॉडल से एक्टर बने मिलिंद सोमण के खाते में. तमिल नाडु के कोडैकनाल में फिल्म की शूटिंग शुरू हुई. लंबे समय तक फिल्म की शूटिंग करने के बाद मिलिंद समेत कई एक्टर्स ने फिल्म से अलग होने का फैसला कर लिया. फिल्म की शूटिंग रुक गई. दोबारा कास्टिंग शुरू हुई.

दीपक तिजोरी इस फिल्म के लिए पहले ही ऑडिशन दे चुके थे मगर तब उन्हें कोई रोल नहीं मिला था. महेश भट्ट ने दीपक को कहा कि मंसूर की फिल्म की कास्टिंग चल रही है, उन्हें वहां जाना चाहिए. दीपक ने कहा- ‘भट्ट साहब, वहां ऑडिशन दे चुका हूं. कुछ नहीं हुआ.’ महेश भट्ट ने कहा, दोबारा जाओ. दीपक दोबारा जो जीता वही सिकंदर की कास्टिंग प्रोसेस का हिस्सा बने और उन्हें फिल्म में कास्ट कर लिया गया. इस फिल्म में दीपक ने शेखर मल्होत्रा नाम के एक कॉलेज स्टूडेंट का रोल किया था. इसमें दीपक को कुछ अलग करने का मौका मिला क्योंकि उनका किरदार ग्रे शेड लिए हुए था. फिल्म के आखिर में आमिर उन्हें ही हराकर साइकल रेस जीतते हैं.

जो जीता वही सिकंदर का फाइनल साइकल रेस जिसमें दीपक को हराकर आमिर जीत हासिल करते हैं.
जो जीता वही सिकंदर का फाइनल साइकल रेस जिसमें दीपक को हराकर आमिर जीत हासिल करते हैं.

अक्षय कुमार को हिट कराने के लिए लेना पड़ा दीपक का सहारा

आशिकी और जो जीता वही सिकंदर की सक्सेस की वजह से दीपक तिजोरी की इमेज एक बैंकेबल स्टार की बन गई थी. 1991 में अक्षय कुमार अपनी पहली फिल्म सौगंध की शूटिंग कर रहे थे. ठीक इसी समय अब्बास-मुस्तन की जोड़ी भी अपनी पहली फिल्म बनाने जा रही थी. प्रोड्यूसर रतन जैन से बात करके फिल्म का नाम रखा गया खिलाड़ी. रतन जैन वीनस रिकॉर्ड्स के मालिक थे. उनकी कंपनी अब तक म्यूज़िक की फील्ड में काम कर रही थी. अब वो भी फिल्म प्रोडक्शन में एंट्री ले रहे थे. खैर, खिलाड़ी फिल्म की कास्टिंग शुरू हुई. अब्बास-मुस्तन की डायरेक्टर जोड़ी रोनित रॉय को अपनी फिल्म में लेना चाहती थी. जब उनके मैनेजर से संपर्क किया गया, तो पता चला कि रोनित की फीस चार लाख रुपए है. ये अमाउंट अब्बास-मुस्तन की फिल्म के बजट के बाहर था. इसके बाद डायरेक्टर जोड़ी ने अक्षय कुमार से बातचीत शुरू की.

उस दौर में रौनित रॉय अक्षय कुमार से बड़े और बेहतर तरीके से स्थापित कलाकार थे.
उस दौर में रौनित रॉय अक्षय कुमार से बड़े और बेहतर स्थापित कलाकार थे.

अक्षय एक होटल में अब्बास-मुस्तन से मिलने आए. आते ही उन्होंने अपने पूरा प्रोग्राम बताया कि वो सौगंध, डांसर और दीदार जैसी फिल्मों में काम कर रहे हैं. ये सभी एक्शन फिल्में हैं. मगर अब्बास-मुस्तन कुछ और चाहते थे. वो अक्षय को अपनी थ्रिलर फिल्म में कॉमेडी करवाना चाहते थे. पहले तो अक्षय हड़बड़ाए क्योंकि वो नए थे और एक्टिंग में बहुत पारंगत नहीं थे. मगर अपने ऊपर डायरेक्टर जोड़ी का भरोसा देखकर वो ये फिल्म करने को तैयार हो गए. पूछा गया फिल्म के लिए कितने पैसे लोगे? एक इंटरव्यू में अब्बास-मुस्तन की जोड़ी बताती है कि थोड़ी भूमिका बांधने के बाद अक्षय ने कहा कि उन्हें ढाई लाख रुपए चाहिए. प्रोड्यूसर से बात करके सब कुछ फिक्स हो गया. मगर दिक्कत ये थी कि अक्षय कुमार स्टार नहीं थे और फिल्म चलाने के लिए अच्छे कॉन्टेंट के साथ स्टार पावर की भी ज़रूरत थी. यहां सीन में आते हैं दीपक तिजोरी.

उन दिनों आशिकी में काम करने के बाद अपने दीपक बाबू स्टार हो गए थे. साथ ही वो आमिर खान के साथ जो जीता वही सिकंदर जैसी बड़ी फिल्म में भी काम कर रहे थे. उनकी सफलता को भुनाने के लिए अक्षय के साथ उन्हें फिल्म में कास्ट कर लिया गया. दिक्कत बस ये रही कि इस फिल्म में भी दीपक को हीरो के बेस्ट फ्रेंड का रोल ही ऑफर हुआ.

फिल्म खिलाड़ी के एक सीन में अक्षय कुमार के साथ दीपक तिजोरी.
फिल्म खिलाड़ी के एक सीन में अक्षय कुमार के साथ दीपक तिजोरी.

जब शाहरुख के सामने डायरेक्टर को दीपक दिखाई ही नहीं पड़ रहे

अगले कुछ सालों में दीपक साइड रोल्स के लिए सबके फेवरेट हो गए थे. मगर 1994 में आई फिल्म कभी हां कभी ना में उन्हें शाहरुख खान के साथ पैरलेल लीड रोल करने का मौका मिला. ‘कभी हां कभी ना’ शाहरुख की शुरुआती फिल्मों में से थी. लेकिन इसकी रिलीज़ तक वो 1993 में आई डर और बाज़ीगर जैसी फिल्में कर बड़ा नाम बन चुके थे. इस फिल्म को डायरेक्ट कर रहे थे कुंदन शाह. कुंदन और शाहरुख का साथ पुराना था. दोनों ने कई प्रोजेक्ट्स पर साथ काम किया हुआ था. कुंदन बताते हैं कि वो शाहरुख के उनके टीवी के दिनों से फैन हैं. वो इतनी कमाल एक्टिंग करते हैं कि उनसे नज़र ही नहीं हटती.

‘कभी हां कभी ना’ की शूटिंग चल रही थी. शाहरुख और दीपक बीच एक सीन फिल्माया जा रहा था. दीपक की आदत थी कि वो हर शॉट के बाद जाकर डायरेक्टर से अपने काम के बारे में पूछते थे. इस सीन के बाद भी उन्होंने ऐसा ही किया. वो सीन खत्म होते ही कुंदन के पास पहुंचे और उनसे अपने सीन के बारे में पूछा. कुंदन ने कहा कि वो उन्हें रीटेक के बाद बताएंगे. समस्या ये थी कि कुंदन ने दीपक को देखा ही नहीं था. रीटेक के बाद दीपक फिर से कुंदन के पास पहुंचे और अपना सवाल दोहराया. कुंदन फिर से कुछ नहीं बता पाए. इससे दीपक नाराज हो गए. उन्होंने जब इसके पीछे का कारण पूछा तो पता चला कि वो शाहरुख की एक्टिंग देखने में इतने खो गए कि दीपक को देख ही नहीं पाए.

फिल्म कभी हां कभी ना के एक सीन में शाहरुख खान और दीपक तिजोरी.
फिल्म कभी हां कभी ना के एक सीन में शाहरुख खान और दीपक तिजोरी.

जब पत्नी ने घर से निकाल दिया तो पता चला शादी ही फर्जी थी

2017 में दीपक की पत्नी शिवानी तोमर ने उन्हें उनके ही घर से निकाल दिया. उनका इल्जाम था कि उनके पति के दूसरी महिलाओं के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल संबंध हैं. जब अपनी पत्नी पर एक्शन लेने के लिए दीपक अपने काउंसलर के पास पहुंचे तो उन्हें कुछ और ही पता चला. उनके काउंसलर ने उन्हें बताया कि शिवानी ने अपने पिछले पति को तलाक दिए बगैर उनकी शादी कर ली थी. इसलिए शिवानी के साथ उनकी शादी कभी लीगल थी ही नहीं. इतने सब तमाशे के बाद अब ये जोड़ा अपना मामला कोर्ट में ले गया है. शादी की वैधता संदेह के घेरे में होने के बावजूद शिवानी ने दीपक से अपनी बेटी के भरण-पोषण के लिए 1 लाख रुपए प्रति महीने गुज़ारा भत्ते की मांग की थी. दीपक और शिवानी की दो दशक से ज़्यादा पुरानी शादी से एक समारा नाम की एक बेटी है.

अपनी पत्नी शिवानी के साथ दीपक. एक्टर-डायरेक्टर कबीर सदानंद इनके साले हैं.
अपनी पत्नी शिवानी के साथ दीपक. एक्टर-डायरेक्टर कबीर सदानंद इनके साले हैं.

मई, 2009 में दीपक की बेटी समारा अपनी एक दोस्त के साथ शॉपिंग करने अंधेरी गई थी. शाम पांच बजे के तकरीबन शॉपिंग करके लौट रही समारा के पास ऑटो वाला रूका और उन्हें ऑटो में खींच लिया. उसके साथ गई लड़की ने इस बात की खबर फौरन दीपक को पहुंचाई. भागा-दौड़ी में पुलिस कंप्लेंट लिखाई गई. लेकिन किडनैप होने के कुछ ही घंटे बाद समारा घर वापस आ गई. उन्हें किडनैप करने वाले की उम्र 20-25 साल के आस पास बताई गई थी.

आज कल कहां हैं दीपक तिजोरी और क्या कर रहे हैं?

दीपक तिजोरी फिल्मों से कभी पूरी तरह गायब नहीं हुए. वो छोटी बड़ी फिल्मों में नज़र आते रहे. उन्हें आखिरी बार 2018 में आई संजय दत्त स्टारर फिल्म ‘साहब बीवी और गैंगस्टर 3’ में देखा गया था. 2003 में दीपक ने बतौर डायरेक्टर अपना डेब्यू किया फिल्म Oops से. आगे उन्होंने ‘फरेब’ और ‘टॉम डिक एंड हैरी’ जैसी फिल्में बनाईं. बतौर डायरेक्टर उनकी आखिरी फिल्म 2016 में रिलीज़ हुई थी. रणदीप हुड्डा और काजल अग्रवाल स्टारर इस फिल्म का नाम था ‘दो लफ्ज़ों की कहानी’. 2019 में उन्होंने ज़ी5 पर स्ट्रीम होने वाले वेब शो ‘अभय’ में भी काम किया था. दीपक फिलहाल मुंबई में ही हैं और आज कल अपनी अगली फिल्म बनाने के जुगाड़ में लगे हुए हैं.


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