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तिरुपति मंदिर से 18 गैर हिंदू कर्मचारियों की छुट्टी, पता है इनसे क्या कहा गया है?

Tirupati Balaji Temple: इन 18 कर्मचारियों को TTD बोर्ड से जुड़े मंदिरों और उनसे संबद्ध विभागों से हटाया जा रहा है. इसके अलावा इन लोगों के किसी भी हिंदू धार्मिक आयोजन में भाग लेने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है.

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5 फ़रवरी 2025 (अपडेटेड: 5 फ़रवरी 2025, 07:12 PM IST)
Tirupati temple board removes 18 non-Hindu
तिरुपति के कर्मचारियों पर कार्रवाई | प्रतीकात्मक फोटो: आजतक
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आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर की देखरेख करने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बोर्ड ने एक बड़ा एक्शन लिया है. बोर्ड ने धार्मिक नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए अपने 18 गैर हिंदू कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है. बीआर नायडू के नेतृत्व वाले TTD बोर्ड ने पहले कहा था कि केवल हिंदू कर्मचारी ही TTD में काम कर सकते हैं. हालांकि, बताया जाता है कि इन 18 कर्मचारियों को गैर-हिंदू परंपराओं का पालन करते हुए पाया गया, जिसके कारण इन सब पर ये अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है.

TTD बोर्ड के प्रस्ताव के अनुसार इन कर्मचारियों को TTD मंदिरों और उनसे संबद्ध विभागों से हटाया जा रहा है. इसके अलावा इन लोगों के किसी भी हिंदू धार्मिक आयोजन में भाग लेने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन 18 कर्मचारियों को दो विकल्प दिए जा रहे हैं. उनसे कहा जा रहा है कि या तो ये सरकारी विभागों में ट्रांसफर ले लें या फिर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के लिए आवेदन कर दें. ये भी कहा गया है कि अगर इन्होंने दोनों में से कोई विकल्प नहीं चुना तो TTD द्वारा आगे की कार्रवाई की जायेगी.

बीआर नायडू ने कुछ समय पहले यह सुनिश्चित करने की बात कही थी कि तिरुमाला हिंदू आस्था और पवित्रता का प्रतीक बना रहे. 1989 बंदोबस्ती अधिनियम के अनुसार, TTD कर्मचारियों को हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करना चाहिए.

बीते नवंबर में TTD की 54वीं गवर्निंग काउंसिल की पहली बैठक हुई थी. इसमें लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए अध्यक्ष बीआर नायडू ने बताया था कि TTD में कार्यरत गैर-धार्मिक कर्मचारियों को लेकर उनसे चर्चा की जाएगी. यदि वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेना चाहें तो उन्हें ये विकल्प दिया जाएगा. नहीं तो उन्हें आंध्र प्रदेश सरकार के अन्य विभागों में ट्रांसफर किया जाएगा.

उन्होंने ये भी बताया था कि पिछले कुछ सालों में TTD अधिनियम में तीन बार संशोधन किया गया है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मंदिर बोर्ड और उसके संबद्ध संस्थानों में केवल हिंदुओं को ही नौकरी दी जा सके.

वीडियो: तिरुपति मंदिर से पाकिस्तानी कम्पनी का नाम जोड़े जाने की सच्चाई क्या है?

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