The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • supreme court on permanent commission for women officers in Indian army

सुप्रीम कोर्ट ने सेना की महिला अधिकारियों के लिए क्यों कहा- 'ये कोर्ट में चक्कर लगाने का समय नहीं'

महिला सेना अधिकारी को स्थायी कमीशन के इनकार मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये समय सैन्य बल के सुप्रीम कोर्ट का चक्कर लगाने का नहीं है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अभी उनके यानी सैनिकों के लिए प्रतिभा प्रदर्शन के लिए दूसरी जगह है. हम चाहते हैं कि इस समय उनका मनोबल ऊंचा रहे.

Advertisement
Sophia Qureshi
महिला सेना के स्थायी कमीशन पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा (India Today)
pic
राघवेंद्र शुक्ला
9 मई 2025 (अपडेटेड: 9 मई 2025, 07:51 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

भारतीय सेना में महिला अधिकारियों के स्थाई कमीशन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पर फैसला कुछ समय बाद लिया जाएगा. ऐसे मामलों के लिए ये समय सही नहीं है. कोर्ट ने कहा कि 

Embed

कोर्ट ने भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनावूर्ण हालात की तरफ इशारा किया. कोर्ट की ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत की पाकिस्तान पर कार्रवाई की ब्रीफिंग देने वाली दो महिला अधिकारियों की पूरे देश में चर्चा है. कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह, भारत-पाकिस्तान तनाव पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश को लगातार जानकारी दे रही हैं. 

क्या है मामला?

दरअसल, भारतीय सेना में महिला सेना अधिकारी स्थाई कमीशन (Permanent Commission) के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं. परमानेंट कमीशन का मतलब होता है कि कोई भी अधिकारी रिटायरमेंट की उम्र तक सेना में काम कर सकता है. वहीं, शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत नियुक्त अधिकारी का कार्यकाल केवल 10 या 14 साल का होता है. इसके बाद वो रिटायर हो जाते हैं. सेना में महिला अधिकारियों की भर्ती इसी कमीशन के तहत होती है. इससे जुड़े मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है. 

ये भी पढ़ेंः क्या है परमानेंट कमीशन, जिस पर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट में बहस छिड़ी हुई है?

इंडिया टुडे ग्रुप के रिपोर्टर संजय शर्मा के अनुसार, 9 मई 2025 शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी इस पर बात करने के लिए ठीक समय नहीं है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 

Embed

कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर बाद में मेरिट के आधार पर सुनवाई की जाएगी. तब तक सरकार महिला सैनिकों की सेवाओं का उपयोग करे. सुनवाई की अगली तारीख तक सभी महिला सैन्य अधिकारियों को सर्विस में रखा जाए. उनको रिलीव नहीं किया जाए. कोर्ट ने कहा कि मामले में जो भी तय किया जाएगा, योग्यता के आधार पर तय किया जाएगा.

Embed
सुप्रीम कोर्ट में है केस

महिला सेना अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) देने से इनकार करने के मामले को लेकर 67 महिला सेना अधिकारियों ने याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है. इसमें महिला सेना अधिकारियों ने उन्हें परमानेंट कमीशन देने की गुहार लगाई है. याचिकाकर्ताओ में से कई महिला अधिकारी अब रिटायर भी हो चुकी हैं. साल 2020 में इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने बहुत महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा था कि सेना में महिलाओं को कमांड नियुक्तियों से वंचित रखना कानून के हिसाब से सही नहीं है. इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी की उपलब्धियों की तारीफ की थी और इस उदाहरण के जरिए सेना में महिला अधिकारियों के योगदान को भी सराहा था. 

वीडियो: महिला अफसरों ने जवाबी कार्रवाई को लेकर क्या बताया?

Advertisement

Advertisement

()