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'रूस से तेल खरीद पर भारत को फिर से सोचना चाहिए... ' पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने साफ बोला है

RBI के पूर्व गवर्नर Raghuram Rajan ने कहा है कि भारत को रूस से तेल खरीदने के बारे में फिर से सोचना चाहिए. उनका मानना है कि इसके फायदे और नुकसान के बारे में सोचने का वक्त आ गया है.

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रवि सुमन
| राजदीप सरदेसाई
28 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 28 अगस्त 2025, 09:23 AM IST)
Raghuram Rajan
रघुराम राजन ने मौजूदा भारत-अमेरिका रिश्ते को चिंताजनक बताया है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर और अर्थशास्त्री डॉ. रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने भारत पर लगे भारी अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि ये भारत के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि उसे व्यापार के लिए किसी एक साझेदार पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए.

अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था, बाद में डॉनल्ड ट्रंप ने भारत-रूस तेल व्यापार पर आपत्ति जताई और 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया. इस तरह 27 अगस्त से भारत पर 50 प्रतिशत का भारी अमेरिकी टैरिफ लागू है. डॉ. राजन ने इसको लेकर चेतावनी दी और कहा कि आज की वैश्विक व्यवस्था में व्यापार, निवेश और फाइनेंस को हथियार बनाया जा रहा है, इसलिए भारत को सावधानी से फैसले लेने चाहिए. इंडिया टुडे ग्रुप से बात करते हुए डॉ. राजन ने कहा,

ये एक चेतावनी है. हमें किसी एक देश पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए. हमें पूर्व की ओर, यूरोप की ओर, अफ्रीका की ओर देखना चाहिए और अमेरिका के साथ आगे बढ़ना चाहिए. लेकिन ऐसे सुधार लाने चाहिए, जिससे 8 से 8.5 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने में मददगार हो. ये दर हमारे युवाओं को राजगार देने के लिए जरूरी है.

'रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत को फिर से सोचना चाहिए'

रूस से तेल खरीदने के कारण ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, जबकि रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक चीन और यूरोप है. लेकिन अमेरिका ने इन पर भारत जितना भारी टैरिफ नहीं लगाया है. इस मामले को लेकर डॉ. राजन ने कहा है कि भारत को रूसी तेल खरीद को लेकर अपनी नीति के बारे में फिर से सोचना चाहिए. उन्होंने कहा,

हमें ये देखना होगा कि इससे किसको फायदा हो रहा है और किसको नुकसान. रिफाइनर अत्यधिक मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन निर्यातक टैरिफ के जरिए इसकी कीमत चुका रहे हैं. अगर फायदा ज्यादा नहीं है, तो शायद इस पर फिर से सोचना चाहिए कि क्या हमको उनसे तेल खरीदना जारी रखना चाहिए.

ये भी पढ़ें: ये 13 लाख लोग अब क्या करेंगे? ट्रंप के टैरिफ से भारत का कालीन उद्योग परेशान

'मुद्दा निष्पक्षता का नहीं, बल्कि जियोपॉलिटिक्स का है'

भारत और चीन की तुलना करते हुए डॉ. राजन ने कहा कि ये निष्पक्षता का मामला नहीं है, बल्कि जियोपॉलिटिक्स का है. उन्होंने आगे कहा,

हमें किसी पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए. व्यापार को हथियार बना दिया गया है. निवेश को हथियार बना दिया गया है. वित्त को हथियार बना दिया गया है. हमें अपने आपूर्ति स्रोतों और निर्यात बाजारों में विविधता लानी होगी.

डॉ. रघुराम राजन इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के मुख्य अर्थशास्त्री भी रह चुके हैं. उनका मानना है कि भारत को इस संकट को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए. उन्होंने कहा,

हर हाल में चीन, जापान, अमेरिका या किसी और के साथ काम कीजिए. लेकिन उन पर निर्भर मत रहिए. सुनिश्चित कीजिए कि आपके पास विकल्प मौजूद हों, जिसमें जहां तक ​​संभव हो, आत्मनिर्भरता भी शामिल है.

डॉनल्ड ट्रंप ने ऐसा फैसला क्यों लिया?

ट्रंप के टैरिफ की नीतियों के पीछे डॉ. राजन ने तीन कारणों की ओर इशारा किया, 

  • ये धारणा कि व्यापार घाटा दूसरे देश द्वारा शोषण को दिखाता है.
  • ये धारणा कि टैरिफ लगाने से आसानी से राजस्व प्राप्त होता है.
  • विदेश नीति के दंडात्मक साधनों के रूप में टैरिफ का उपयोग.

उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप का ये फैसला मूल रूप से पावर का इस्तेमाल है, यहां निष्पक्षता कोई मुद्दा ही नहीं है. उन्होंने बताया कि भारत को उम्मीद थी कि अन्य एशियाई देशों की तरह ही उस पर भी लगभग 20 प्रतिशत का टैरिफ लगाया जाएगा. साथ ही ये भी उम्मीद थी कि पीएम मोदी और ट्रंप के संबंध और भी बेहतर होंगे. लेकिन स्पष्ट है कि ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा है.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: ट्रंप के टैरिफ से लाखों नौकरियों पर खतरा, अरबों के नुकसान पर सरकार का क्या प्लान है?

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