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NCERT में बड़ा बदलाव, अब किताबों में जुड़ेंगे फील्ड मार्शल मानेकशॉ और युद्ध के वीरों के चैप्टर

रक्षा मंत्रालय ने शिक्षा मंत्रालय और NCERT के साथ मिलकर, नेशनल वॉर मेमोरियल (NWM) को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्थल बनाने के लिए पहल की है. इन्हीं प्रयासों के तहत, NWM और उससे जुड़ी हुई कहानियों को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा.

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रवि सुमन
| शिवानी शर्मा
8 अगस्त 2025 (पब्लिश्ड: 02:44 PM IST)
New Chapters in NCERT Book
ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान, मेजर सोमनाथ शर्मा और फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ. (तस्वीर: इंडिया टुडे)
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NCERT की कुछ किताबों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. बच्चों को अब फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और देश के लिए शहीद हुए ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और मेजर सोमनाथ शर्मा के बारे में पढ़ाया जाएगा. कक्षा आठवीं और सातवीं की उर्दू की किताब के साथ-साथ आठवीं कक्षा की अंग्रेजी की किताब में इनके जीवन और बलिदान के बारे में चैप्टर जोड़े गए हैं.

इन चैप्टर्स का उद्देश्य बच्चों को साहस और कर्तव्य की कहानियों से प्रेरित करना है. फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, भारत के ऐसे पहले अधिकारी थे, जिनको फील्ड मार्शल का पद दिया गया था. उनके असाधारण नेतृत्व और रणनीतिक कौशल के लिए उनको याद किया जाता है. 1971 के युद्ध में मिली जीत के सबसे बड़े हीरो हैं. इसी युद्ध के कारण पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए और बांग्लादेश का निर्माण हुआ.

ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और मेजर सोमनाथ शर्मा, दोनों को क्रमशः महावीर चक्र और परमवीर चक्र (मरणोपरांत) प्राप्त हुए. मेजर सोमनाथ शर्मा वो सबसे पहले व्यक्ति थे, जिनको परमवीर चक्र दिया गया. 

मोहम्मद उस्मान का जन्म सन 1912 में यूपी (तब यूनाइटेड प्रोविंस) के आजमगढ़ के बीबीपुर गांव में हुआ था. पिता काजी मोहम्मद फारुक बनारस के कोतवाल थे. ब्रिटिश सरकार ने मोहम्मद फारुक के काम से खुश होकर उन्हें 'खान बहादुर' की उपाधि दी थी. उस्मान की तीन बड़ी बहनें थीं और 2 भाई थे. एक भाई गुफरान भी भारतीय सेना में ब्रिगेडियर के पद से रिटायर हुए. और दूसरे भाई सुभान पत्रकार थे.

ये भी पढ़ें: इंदिरा गांधी के बारे में क्या कहते थे सैम मानेकशॉ? बेटी माया ने सच बता दिया

शिक्षा मंत्रालय और NCERT की साझा पहल

रक्षा मंत्रालय ने शिक्षा मंत्रालय और NCERT के साथ मिलकर, नेशनल वॉर मेमोरियल (NWM) को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्थल बनाने के लिए पहल की है. इन्हीं प्रयासों के तहत, NWM और उससे जुड़ी हुई कहानियों को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा. इससे छात्रों को न केवल भारत के सैन्य इतिहास के बारे में जानकारी मिलेगी, बल्कि वो जीवन के महत्वपूर्ण पाठ जैसे सहनशीलता, सहानुभूति, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और देश निर्माण में योगदान की अहमियत भी समझ सकेंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2019 को दिल्ली के इंडिया गेट के पास स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल को देश को समर्पित किया था. ये स्मारक हमारे वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ सभी नागरिकों में देशभक्ति, उच्च नैतिक मूल्य, बलिदान, राष्ट्रीय भावना और अपनापन का अहसास कराने के लिए स्थापित किया गया है.

वीडियो: बैठकी: फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की बेटी ने कैमरे पर सुनाए 'सैम बहादुर' के अनकहे किस्से

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