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पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाला ASI 15 लोगों के संपर्क में था, सभी सेना-पैरामिलिट्री अफसर हैं

CRPF के ASI मोती राम जाट को 27 मई को NIA ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था. वो पहलगाम में CRPF की एक बटालियन में तैनात था. लेकिन 22 अप्रैल को हुए पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले से ठीक 5 दिन पहले उसका दिल्ली ट्रांसफर हो गया था. अब इस केस में बड़े खुलासे हुए हैं.

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27 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 27 अगस्त 2025, 05:15 PM IST)
CRPF SI Moti Ram Jat Pakistani Spy Was In Contact Of 15 Army Official
मोती राम पाकिस्तान के लिए कर रहा था जासूसी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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मई 2025 के आखिर में NIA ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में CRPF के एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) को गिरफ्तार किया था. ASI का नाम था मोती राम जाट. आरोप था कि उसने कथित तौर पर पाकिस्तानी एजेंट्स से खुफिया जानकारी साझा की. अब इस मामले में बेहद अहम जानकारी सामने आई है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ASI मोती राम 15 ऐसे मोबाइल नंबरों पर बात करता था जो भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और सरकार के कर्मियों से जुड़े थे. 

मोती राम को 27 मई को NIA ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था. जाट पहलगाम में CRPF की एक बटालियन में तैनात था. लेकिन 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले से ठीक 5 दिन पहले उसका दिल्ली ट्रांसफर हो गया था.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी महेंद्र सिंह मनराल की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि मोती राम जिस पाकिस्तानी एजेंट को खुफिया जानकारी दे रहा था उसका कोड नाम सलीम अहमद है. वह एजेंट मोती राम के अलावा 15 अन्य फोन नंबरों के संपर्क में था. 

कैसे पता चला?

दावा किया गया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड और इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला कि इनमें से 4 नंबर सेना के जवानों के, 4 नंबर अर्धसैनिक बलों के और बाकी सात केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों के हैं. जांच एजेंसियां जांच के लिए डेटा खंगाल रही है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने यह भी पाया कि जिस फोन नंबर के जरिए मोती राम से संपर्क किया गया था, उसका सिम कार्ड कोलकाता से एक व्यक्ति ने खरीदा था. सिम एक्टिवेट करने के लिए उस शख्स ने लाहौर स्थित पाकिस्तानी एजेंट के साथ OTP भी शेयर किया था. कोलकाता के इस शख्स ने 2007 में पाकिस्तानी नागरिक से शादी की थी और 2014 में पाकिस्तान चला गया था. वह एक साल में दो बार कोलकाता आता था. 

ये डॉक्यूमेंट किए थे शेयर

रिपोर्ट में दावा किया गया कि मोती राम ने कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज, आधिकारिक वॉट्सऐप ग्रुपों पर पोस्ट की गई मल्टी-एजेंसी सेंट्रल रिपोर्ट और सैनिकों की आवाजाही से जुड़ी जानकारी साझा की.

पहले एक महिला ने किया था मोती राम से संपर्क

रिपोर्ट के मुताबिक, मोती राम का कहना है कि शुरुआत में उससे एक महिला ने संपर्क किया था. इस महिला ने खुद को चंडीगढ़ के एक टीवी चैनल की पत्रकार बताया था. जब दोनों के बीच लगातार फोन और वीडियो कॉल होने लगी तो मोती राम ने उसके साथ गोपनीय दस्तावेज साझा करने शुरू कर दिए. 

लाहौर के हैंडलर को भेजे थे दस्तावेज

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि पिछले दो वर्षों में मोती राम ने लाहौर में अपने हैंडलर को कथित तौर पर कई “संवेदनशील दस्तावेज” भेजे थे. इसके एवज में उसे 12,000 रुपये मिलते थे. यह रकम मोती राम और उसकी पत्नी के बैंक खातों में दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, असम और पश्चिम बंगाल समेत अलग-अलग जगहों के खातों से जमा कराई गई थी. 

सूत्रों ने बताया कि पैसे भेजने वालों में से एक की पहचान शहजाद के रूप में हुई है. इस शख्स को मई में यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किया था. उस पर आरोप था कि वह कपड़ों, मसालों और कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स की सीमा पार तस्करी की आड़ में ISI हैंडलर्स को कथित तौर पर गोपनीय जानकारी देता था. शहजाद ने यह भी बताया कि एक बार उसने पंजाब से दिल्ली जा रही ट्रेन से एक यात्री के जरिए मोती राम को 3,500 रुपये भेजे थे. 

वीडियो: NIA ने CRPF जवान को किया गिरफ्तार, पाकिस्तान के लिए जासूसी का आरोप

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