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यूपी: जाटव समाज के जला दिए गए थे घर, 34 साल बाद मिला इंसाफ, पनवारी कांड में 36 लोग दोषी

आगरा के पनवारी गांव में 21 जून, 1990 को एक दलित की बारात को लेकर शुरू हुए झगड़े ने बड़ी हिंसा का रूप ले लिया. अब पनवारी कांड में 34 साल बाद 36 लोगों को दोषी माना गया है. 15 लोगों को बरी किया गया है.

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29 मई 2025 (अपडेटेड: 29 मई 2025, 09:51 AM IST)
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इस केस में 34 साल बाद इंसाफ मिला है | प्रतीकात्मक फोटो: आजतक
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उत्तर प्रदेश के आगरा के चर्चित पनवारी कांड में 34 साल बाद कोर्ट का फैसला आ गया है. आगरा के एससी/एसटी स्पेशल कोर्ट ने इस ऐतिहासिक फैसले में 36 आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि 15 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. तीन आरोपी आज भी फरार हैं. उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं. यह केस साल 1990 में हुई जातीय हिंसा से जुड़ा है. इस मामले में शामिल 27 लोगों की मौत हो चुकी है.

ये मामला आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र का है. यहां के पनवारी गांव में 21 जून, 1990 में चोखेलाल जाटव की बेटी मुंद्रा की शादी थी. थाना सदर के नगला पद्मा गांव से रामदीन की बारात आई थी. आरोप है कि जाटों ने अपने घर के सामने से बारात नहीं निकलने दी.

ये झगड़ा इतना बढ़ा कि उसने बड़ी हिंसा का रूप ले लिया. दूसरे दिन 22 जून को पुलिस ने अपनी मौजूदगी में बारात चढ़वाई, लेकिन 5-6 हजार लोगों की भीड़ ने बारात को घेर लिया और चढ़ने से रोक दिया. इस दौरान पुलिस ने बल का प्रयोग किया. फायरिंग भी हुई जिसमें सोनी राम जाट की मौत हो गई. इस घटना के बाद आगरा में कई जगहों पर जाटव समाज से जुड़े लोगों के घर जला दिए गए. आगरा में 10 दिन के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया.

तत्कालीन विपक्ष के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी खुद आगरा पहुंचे और पीड़ितों से मुलाकात की थी. उस समय आगरा से सांसद रहे अजय सिंह, जो केंद्र में मंत्री भी थे, उन्होंने दंगों को शांत कराने के लिए दोनों पक्षों से बात की थी.

इस मामले में 22 जून 1990 को सिकंदरा थाने में तत्कालीन थाना प्रभारी ने छह हजार अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा, जानलेवा हमला, एसएसी-एसटी एक्ट, लोक व्यवस्था भंग करने व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था. इस मामले में स्थानीय विधायक चौधरी बाबूलाल भी आरोपी थे, जिन्हें 2022 में बरी कर दिया गया था.

इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराएं 148, 149, 323, 144, 325, 452, 436, 427, 504, 395 और SC/ST एक्ट की धारा 3/2/5 लगाई गई थी. 2017 में एससीएसटी कोर्ट बना, तब यहां मुकदमा चला. इस मामले में 80 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी. 27 की मौत हो चुकी है. 53 जीवित हैं. बुधवार को सुनवाई के दौरान 31 लोगों की गवाही के बाद कोर्ट ने 32 दोषियों को जेल भेज दिया है. एक नाबालिग आरोपी का मामला जुवेनाइल कोर्ट में है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान तीन लोग हाजिर नहीं हुए थे, जिनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है. कोर्ट ने कहा कि दोषी ठहराए गए लोगों को 30 मई को सजा सुनाई जाएगी.

इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) बसंत गुप्ता ने कहा, "इस मामले की विवेचना के बाद 72 लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल हुई थी. मुकदमे की सुनवाई के दौरान 22 लोगों की डेथ हो गई…सबूतों के अभाव में 15 लोगों को बरी कर दिया गया है.' 

वीडियो: आगरा में दलित दूल्हे से मारपीट, DJ को लेकर क्या आरोप सामने आए?

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