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एक ही बात नहीं है मिर्गी और दौरा पड़ना, जानें दोनों में क्या फर्क है?

हर दौरा सीज़र है, लेकिन हर सीज़र एपिलेप्सी नहीं है. मगर, इलाज दोनों का ही ज़रूरी है. लिहाज़ा अगर किसी को कभी दौरा पड़ा है. या बार-बार पड़ता है. तो जूते सुंघाने जैसे उपचार न करें. मरीज़ को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं.

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13 दिसंबर 2024 (पब्लिश्ड: 04:10 PM IST)
difference between seizure and epilepsy
सीज़र और एपिलेप्सी दोनों अलग चीज़ें हैं
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मिर्गी और दौरा. अक्सर दोनों को एक ही चीज़ समझा जाता है. मगर दोनों में बड़ा फर्क है. सबसे पहला फर्क तो नाम का ही है. मिर्गी को एपिलेप्सी (Epilepsy) कहते हैं. वहीं दौरे को सीज़र (Seizure). दोनों का इलाज भी अलग-अलग तरीके से किया जाता है.

हमने डॉक्टर प्रवीण गुप्ता से पूछा कि मिर्गी और दौरा क्या होता है. और, इनमें क्या-क्या फर्क हैं.

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डॉ. प्रवीण गुप्ता, प्रिंसिपल डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल

डॉक्टर प्रवीण बताते हैं कि हमारे दिमाग में न्यूरॉन्स होते हैं. ये न्यूरॉन्स इलेक्ट्रिकल और केमिकल सिग्नल्स के ज़रिए एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं. इन्हीं सिग्नल्स के ज़रिए कोई मैसेज दिमाग के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचता है. मगर, कई बार जब इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स में गड़बड़ी हो जाती है. उनमें एब्‍नॉर्मैलिटी आ जाती है. तब शरीर में कुछ लक्षण पैदा होते हैं. जिसे दौरा कहा जाता है. दौरा सिर्फ एक बार आता है. इसे सीज़र भी कहते हैं.

सीज़र होने पर व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाता है. उसकी आंखें ऊपर की ओर पलटने लगती हैं. शरीर में झटके-से लगने लगते है.

वहीं, अगर दो या उससे ज़्यादा बार दौरा आए तो इसे एपिलेप्सी कहते हैं. यानी मिर्गी होना. मिर्गी में भी व्यक्ति बार-बार बेहोश होता है. उसके हाथ-पैर अकड़ने लगते हैं. व्यक्ति झटके खाने लगता है. हालांकि, मिर्गी के दौरे में क्या लक्षण पैदा होंगे, ये इस बात पर निर्भर करता है कि दिमाग के किस हिस्से में इलेक्ट्रिकल डिस्टर्बेंस हुआ है.

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मिर्गी के दौरे हमेशा दिमाग की किसी बीमारी से जुड़े होते हैं. 

एपिलेप्सी और सीज़र में कुछ दूसरे फर्क भी हैं. जैसे मिर्गी के दौरे हमेशा दिमाग की किसी बीमारी से जुड़े होते हैं. जैसे ब्रेन स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर, सिर की कोई चोट या कोई दूसरी दिमागी बीमारी. जेनेटिक कारणों की वजह से भी मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं.

वहीं सीज़र दिमाग की किसी समस्या या दूसरी वजहों से भी पड़ सकता है. जैसे कोई चोट, बुखार, इंफेक्शन, चोकिंग, हाई बीपी, किडनी या लिवर फेलियर. कई बार जब लोग बहुत नशा करते हैं. या नशा करना अचानक से छोड़ देते हैं. तो भी उन्हें दौरा पड़ सकता है. सीज़र यानी दौरा सिर्फ एक बार पड़ता है. बार-बार नहीं.

इसके अलावा, मिर्गी का इलाज लंबा चलता है. जिन्हें बार-बार दौरे पड़ते हैं. उन्हें मिर्गी हो सकती है. इससे बचने के लिए प्रॉपर ट्रीटमेंट की ज़रूरत होती है. मरीज़ को दवाएं दी जाती हैं. कई बार सर्जरी भी करनी पड़ती है. वहीं, दौरे का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है. जैसे अगर किसी को बुखार की वजह से दौरा पड़ा है. तो उसका बुखार ठीक करने के लिए इलाज किया जाएगा. फिर बुखार ठीक होते ही दौरे पड़ना बंद हो जाएंगे.

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हर दौरा सीज़र है, लेकिन हर सीज़र एपिलेप्सी नहीं है

देखिए, हर दौरा सीज़र है, लेकिन हर सीज़र एपिलेप्सी नहीं है. मगर, इलाज दोनों का ही ज़रूरी है. लिहाज़ा अगर किसी को कभी दौरा पड़ा है. या बार-बार पड़ता है. तो जूते सुंघाने जैसे उपचार न करें. मरीज़ को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं. वहां कुछ ज़रूरी टेस्ट करने के बाद डॉक्टर बता पाएंगे कि आखिर समस्या क्या है और उसी हिसाब से, फिर इलाज होगा.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप' आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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