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ग्राउंड रिपोर्ट अरावलीः जहां नरेंद्र मोदी लोगों को भावुक कर देते हैं लेकिन कांग्रेस जीत जाती है

दी लल्लनटॉप की टीम हीरा अपनी चुनाव यात्रा में अरावली ज़िले की मेघराज पहुंची.

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अगर आप गुजरात में साबरकांठा के डिस्ट्रिक्ट हेडक्वॉर्टर हिम्मतनगर से अरावली जिले के डिस्ट्रिक्ट हेडक्वॉर्टर मोडासा जा रहे हों, तो सहयोग मंदिर के पास गाड़ी थोड़ी धीमी रखिएगा. वहां एक बहुत बड़ा गड्ढा है. अगर आप बाइक पर हुए और पहले से ही आपने बाइक धीमी नहीं की, तो आपका ऐक्सीडेंट तय है. आप NH 48 पर हैं.

हमारे ड्राइवर मदन कह उठे कि लोगों को लगता है कि गुजरात की सड़कें बहुत अच्छी हैं. मैं पूरा गुजरात घूम चुका हूं इसलिए ऐसी कोई गलतफहमी मुझे नहीं है. मोडासा से एक तहसील मेघराज जाते हुए सड़क और खराब मिली. यहां रहने वालों के लिए ये तसल्ली की बात होगी कि कहीं-कहीं उस सड़क के बनने का सामान किनारे रखा हुआ है.

धवल पेशे से इंजीनियर हैं. बताते हैं कि गुजरात में लंबे समय तक फिक्स पे पर काम करना युवाओं की मजबूरी है. लेकिन कैमरे पर कम बात करते हैं.
धवल पेशे से इंजीनियर हैं. बताते हैं कि गुजरात में लंबे समय तक फिक्स पे पर काम करना युवाओं की मजबूरी है. लेकिन कैमरे पर कम बात करते हैं.

मेघराज में हमें धवल और उनके दो दोस्त मिले. वो सभी सिविल इंजीनियर हैं और कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर गुजरात सरकार का काम कर रहे हैं. उनकी सैलरी तेरह हजार रुपए हैं. कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरियों की बात को छोड़ देते हैं. परमानेंट सरकारी नौकरियों की बात करते हैं. इसमें भी कई नौकरियां शुरू के 5 साल तक कॉन्ट्रैक्ट की तरह ट्रीट की जाती हैं. मतलब कि पैसा बहुत कम और 5 साल तक एक ही सैलरी पर काम करना होगा.

वो लोग हमारे साथ-साथ थोड़ा और सीमांत इलाके तक गए. मेघराज और इसके आस-पास का इलाका भिलोड़ा नाम की सीट में पड़ता है. बांठीवाड़ा नाम के इस गांव से राजस्थान बॉर्डर मुश्किल से 5-10 किलोमीटर रहा होगा. कानूभाई मिले. बड़ी सी दुकान में बैठे. भाजपा की बंपर तारीफ. खुद भी की. दुकान में खड़े किसानों से भी करवाई.

इन्होंने अपना नाम नहीं बताया, लेकिन ये सरकार से नाराज़ बड़े थे.
इन्होंने अपना नाम नहीं बताया, लेकिन ये गैस सिलेंडर पर सब्सिडी हटने से नाराज़ बड़े थे.

जब हम दुकान से बाहर आ गए, तो उनकी दुकान में काम करने वाले एक शख्स आ गए. हमारा कार्ड मांगने. उन्होंने कहा, 400 रुपए का सिलिंडर 800 में कर दिया, क्या खाक अच्छा कर रही है सरकार. मैंने पूछा कि वहां दुकान के भीतर आपने कुछ क्यों नहीं बोला, उन्होंने कहा, मुझे यहां नौकरी करनी है.

धवल के दोनों दोस्त चले गए. मैंने उनसे फेसबुक लाइव में कुछ बोलने को कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. उससे पहले वो काफी कुछ बोल रहे थे.

दुकान के सामने रोड के दूसरी तरफ कुछ उत्सुक लोग दिख रहे थे. हम वहां जाकर उनसे बात करने लगे. CRPF में हेडकॉन्स्टेबल मयंक वहां थे. नक्सल एरिया में तैनात हैं, लेकिन अभी घर पर आए हुए हैं. सरकार को जी भरकर कोसा. लेकिन कैमरे पर, फेसबुक लाइव पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं. न मयंक, न ही कोई और.

Video: क्या सोचते हैं गुजरात के आदिवासी इलाक़े के लोग

हम लौटकर मेघराज आए. मार्केट में बातचीत करने लगे. और फिर हमारे फेसबुक लाइव पर कांग्रेस-भाजपा का पक्ष लेते लोग आपस में लड़ने पर उतारू हो गए. जिस आदमी ने पहले गला बैठा बताकर बोलने से इनकार किया था, वो इतने तैश में आ गए कि कांग्रेस का जिक्र करते हुए गाली दे बैठे. हमें लाइव वहीं बंद कर देना पड़ा.

इस इलाके के अपने दुख हैं. यहां से ज्यादातर कांग्रेस के अनिल जोशियारा जीतते रहे हैं. कांग्रेसी समर्थक उनकी तारीफ करते हुए कहते हैं कि काम किया है, लेकिन राज्य की भाजपा सरकार उनकी वजह से इलाके का विकास नहीं चाहती. भाजपाई समर्थक कहते हैं कि राज्य सरकार की वजह से काम हुआ है, लेकिन अनिल जोशियारा ने कुछ नहीं किया. दोनों एक साथ अपने-अपने गुट की तारीफ करते हुए ये भी कहते हैं कि काम हुआ है और सामने वाले की बुराई करते हुए ये भी कहते हैं कि काम नहीं हुआ है.

ताहिर पटेल पूछते हैं कि यदि जीएसटी से इतना फायदा हो रहा था तो सरकार ने दरें क्यों कम की?
ताहिर पटेल पूछते हैं कि यदि जीएसटी से इतना फायदा हो रहा था तो सरकार ने दरें क्यों कम की?

यहां के भाजपाई कैंडीडेट की कहानी मजेदार है. पीसी बरांडा. छोटा उदयपुर के एसपी थे. उनका इस्तीफा मंजूर हुआ. एक दिन भाजपा की पहली लिस्ट आई, जिसमें उनका नाम था.

आदिवासी इस इलाके में ज्यादा हैं. कांग्रेस का बहुत पहले से प्रभाव रहा है. इस बार कांग्रेस पिछले कई सालों की तुलना में ज्यादा मजबूत है. तो क्या ये कहा जाए कि कांग्रेस ही यहां से जीतेगी? संभावना ज्यादा है, लेकिन कुछ कहा नहीं जा सकता. हर कोई मानता है कि नरेंद्र मोदी अपनी रैली से बहुत कुछ बदल सकते हैं. फिर चाहे वो हिंदू-मुसलमान का ऐंगल हो या फिर खुद को उस स्थानीय जगह से जोड़कर लोगों को भावुक कर देना.

हिंदू-मुसलमान वाले ऐंगल का जिक्र पहले भी किसी से सुना-लिखा था. स्थानीय जगह से जोड़कर लोगों को भावुक कर देने वाला इस तरह से सीधे पहली बार सुना. आम लोग भी कैसी-कैसी चीजें पकड़ लेते हैं.

लेकिन ये सवाल बना रह जाता है कि अगर मोदी जी इस तरह से यहां पर भाजपा को जीत दिला सकते हैं, तो अब तक यहां कांग्रेस कैसे जीतती रही.


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