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हिमाचल चुनाव 2017: चंबा की रानी ने बीजेपी की इस लहर में भी अपनी सीट बचा ली

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भले पूरी तरह गुजरात विधानसभा चुनाव में व्यस्त रहे हों, लेकिन नतीजे हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से भी रोचक आ रहे हैं. दी लल्लनटॉप आप तक पहुंचा रहा है गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजे. हिमाचल, जहां बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल और कांग्रेस के वीरभद्र सिंह के बीच सीधी टक्कर है. जुड़े रहिए.

विधानसभा सीट: डलहौजी (सीट नंबर 4)
जिला: चंबा
लोकसभा सीट: कांगड़ा

2017 विधानसभा चुनाव का नतीजा

2017 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस की आशा कुमारी ने बीजेपी के डीएस ठाकुर को 556 वोटों से हरा दिया.

1. आशा कुमारी (कांग्रेस) – 24,224
2. डीएस ठाकुर (बीजेपी) – 23,668
3. ध्यान सिंह (सीपीएम) – 720


सीट की डीटेल

चंबा में पड़ने वाला डलहौजी हिल स्टेशन है. डलहौजी विधानसभा सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. पहले इसे बनीखेत के नाम से जानते थे. परिसीमन में बनीखेत की नौ पंचायतें भटियात में गईं, दो चुराह में मिलीं और डलहौजी के नाम से नई सीट बनी. यहां गद्दी और गुज्जर वोटर्स चुनाव का परिणाम तय करते हैं.

बनीखेत में पहला चुनाव 1967 में हुआ था, जिसमें कांग्रेस के देशराज जीते थे. 1972 में फिर कांग्रेस के देशराज जीते. 1977 में जनता पार्टी के ज्ञानचंद जीते. 1982 में कांग्रेस के देशराज महाजन जीते. 1985 में कांग्रेस से आशा कुमारी जीतीं. 1990 में बीजेपी के गंधर्व सिंह जीते. फिर 1993, 1998 और 2003 में कांग्रेस की आशा कुमारी जीतीं. 2007 में बीजेपी की रेनू चड्ढा जीतीं और 2012 में इस सीट के बजाय डलहौजी सीट पर चुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस की आशा कुमारी जीतीं.

डलहौजी सीट से कोई बड़ा नेता

इस सीट पर लंबे समय से महिला उम्मीदवारों का प्रभाव रहा है. सबसे बड़ा नाम भी कांग्रेस की आशा कुमारी का ही है. ये मध्य प्रदेश के पूर्व चीफ सेक्रेटरी मादनेश्वर सिंह की बेटी हैं. 1979 में आशा की चंबा के राजा बिजेंद्र सिंह से शादी हुई थी. ये ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की सदस्य और पंजाब की प्रभारी भी हैं. आशा 1995 से 1998 और 2003 से 2005 के बीच हिमाचल की शिक्षामंत्री रह चुकी हैं. इन पर अपने इलाके में वक्त न देने का आरोप भी लगता रहा है.

आशा कुमारी
आशा कुमारी

2012 चुनाव का परिणाम

2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 60,828 वोटर्स थे. कुल 75.83 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें कांग्रेस की आशा कुमारी ने बीजेपी की रेनू को 7,365 वोटों से हराया था.

1. आशा कुमारी (कांग्रेस): 25,541 वोट (55.38%)
2. रेनू (बीजेपी): 18,176 वोट (39.41%)
3. तिलक राज (सीपीआई): 1,310 वोट (2.84%)

2017 विधानसभा चुनाव में ये उम्मीदवार थे

कांग्रेस ने इस सीट पर अपनी पुरानी नेता आशा कुमारी पर ही भरोसा जताया और उन्हें टिकट दिया था. 2017 से पहले वो पांच बार विधायकी का चुनाव जीत चुकी थीं.

धविंदर सिंह ठाकुर
धविंदर सिंह ठाकुर

बीजेपी ने डीएस ठाकुर (धविंदर सिंह ठाकुर) को टिकट दिया था. रेनू चड्ढा को बीजेपी ने चार बार टिकट दिया था, लेकिन वो एक बार ही चुनाव जीत पाईं. तो इस बार पार्टी ने कैंडिडेट बदल दिया. ठाकुर चंबा में बीजेपी के जिलाध्यक्ष भी हैं. साफ छवि की वजह से स्थानीय लोग इन्हें ‘बीजेपी का केजरीवाल’ कहते हैं और ये खुद को ‘मोदी का आम आदमी’. ठाकुर के चुनाव में आने से डलहौजी सीट की लड़ाई दो करोड़पतियों की लड़ाई हो गई थी.

सीपीआई ने इस सीट पर ध्यान सिंह को उतारा था और राष्ट्रीय आजाद मंच से विरेंदर शर्मा को टिकट मिला था.

2017 में जीत / हार के तीन फैक्टर्स

1. शहरी क्षेत्र में दखल की वजह से चुनाव जीतीं. हालांकि, बहुत मुश्किल था.
2. एक वजह ये भी है कि राजपरिवार से ताल्लुक रखती हैं. इलाके में असर था.


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