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गुजरात चुनाव के बाद सुशील मोदी को खुला खत

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सेवा में,
श्री सुशील मोदी
उपमुख्यमंत्री, बिहार

विषय: चुनाव जीतने के बाद भी ऐसी लिचड़ई किसलिए!

महोदय,
लोग कहते हैं, बहुत नशे में आदमी की असलियत बाहर आ जाती है. मुझे लगता है बहुत खुशी या दुख में ऐसा जरूर होता है. आदमी की कलई खुल जाती है. जैसे आपकी कलई उतरी. गुजरात में अपनी पार्टी के जीतने पर आपने क्या दो-कौड़ी का बयान दिया. कि ये ‘हज पर राम की जीत’ है. सुशील जी, लानत है आपकी इस घटिया सोच पर. 1990 से राजनीति में हैं. तब भी जुबां पर लगाम रखना नहीं सीख सके? गुरु कौन था आपका महाराज? बेकार था एकदम. तभी आप इतने फालतू निकल गए. फालतू बातें बोलने वालों को फालतू ही तो बोलेंगे न!

ऐसे सांप्रदायिक बयान बहुत सोच-समझकर दिए जाते हैं. नेताओं को पता होता है कि बयान कहां तक पहुंचेंगे.
‘हज बनाम राम’ का ये विवाद गुजरात चुनाव में भी उठाया गया था. जब PM खुद सांप्रदायिक बयान देते हों, फिर तो ये असर ट्रिकल डाउन होकर नीचे तक पहुंचेगा ही. चुनाव जीतने के लिए मुसलमान, पाकिस्तान इन सबका इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर किया जाता है. नेताओं को पता होता है कि असर कहां होगा, कितना होगा.

खुलकर खेलिए न, हज क्यों सीधे मुसलमान बोलिए
सुशील दी, आपने ‘हज’ क्यों कहा? इतना घटियापन दिखा ही दिया था, तो सीधे ‘मुसलमान’ ही कह देते. वही मतलब था न आपका. फिर इतना पर्दा क्यों रखा आपने? आप चाहते भी होंगे कि लोग आपका ‘हिंदू-मुसलमान’ समझ जाएं. बेहतर होगा कि खुलकर खेलिए. ऐसे दबे-चुपे बोलेंगे तो नाहक बदनाम भी हो जाएंगे और फायदा भी कुछ नहीं होगा. खुलकर गंदगी उगलने से हो सकता है कि कट्टर हिंदुत्व वाले आपको अपना नया हीरो बना लें. ऐसे ही तो तरक्की कर रहे हैं नेता लोग. हो सकता है कि इसी फॉर्म्युले से आप कभी मुख्यमंत्री भी बन जाएं. केंद्र भी पहुंच सकते हैं. सांप्रदायिक राजनीति में आजकल बहुत स्कोप चल रहा है सर. बहती गंगा में पूरे हाथ धोइए. ऐसे उंगली भिगोने से कुछ नहीं मिलने वाला.

ये ‘हज’ और ‘राम’ वाले फॉर्म्युले के पोस्टर गुजरात इलेक्शन के वक्त वायरल करवाए गए थे. इलेक्शन के वक्त की लिचड़ई को आपने इलेक्शन जीतने के बाद भी कायम रखा.

पूरे कुएं में भांग घुल गई है क्या? कभी मुसलमान, कभी पाकिस्तान, कभी औरंगजेब, चुनाव लड़ने के लिए कोई तमीज का मुद्दा नहीं मिलता क्या?
पूरे कुएं में भांग घुल गई है क्या? कभी मुसलमान, कभी पाकिस्तान, कभी औरंगजेब, चुनाव लड़ने के लिए कोई तमीज का मुद्दा नहीं मिलता क्या? या फिर ये चीजें मास्टरस्ट्रोक का काम करती हैं. ब्रह्मास्त्र टाइप, जिसका वार कभी खाली नहीं जाता.

आप जैसे नेताओं का सभ्य समाज में घुसना बैन कर देना चाहिए
और कितना आईना दिखाएं आपको? मासूमियत में तो गलत बोल नहीं गए हैं. जैसा सोचते थे, वैसा ही बोला है. आपने तो शायद स्कूल की किताब में भी कभी कबीर को नहीं पढ़ा होगा. किसी ने नहीं सिखाया होगा आपको कि सारे धर्म एक हैं. उनको मानने वाले इंसान एक हैं. कि अल्लाह और राम, एक ही बात है. आपने ये सब नहीं सीखा होगा. आप जैसे लोगों की पहचान कर किसी भी सभ्य समाज में आप लोगों की एंट्री बैन कर देनी चाहिए. इतनी नफरत लेकर जी रहा आदमी सभ्य तो नहीं कहला सकता!

'हज बनाम राम' की ये बात गुजरात चुनाव में भी उठ चुकी है. बीजेपी ने एक विवादित पोस्टर लगाया था, इसमें रुपाणी, अमित शाह और नरेंद्र मोदी के नाम के अक्षरों को लेकर RAM बनाया गया. हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश के नामों से HAJ बनाया गया. इसको नफरत और सांप्रदायिकता की घटिया राजनीति के अलावा क्या कहा जा सकता है.
‘हज बनाम राम’ की ये बात गुजरात चुनाव में भी उठ चुकी है. बीजेपी ने एक विवादित पोस्टर लगाया था, इसमें रुपाणी, अमित शाह और नरेंद्र मोदी के नाम के अक्षरों को लेकर RAM बनाया गया. हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश के नामों से HAJ बनाया गया.

हिम्मत हो, तो चुनाव में मुसलमानों से वोट मत मांगिएगा
एक चैलेंज फेंकना है आपकी तरफ. हिम्मत है, तो कैच कर लीजिएगा. अगली बार जब चुनाव लड़ें, तो गलती से भी मुसलमानों से वोट मत मांगिएगा. न बिहार में, न देश में कहीं ओर. ‘सर्व धर्म सद्भाव’ की नौटंकी मत कीजिएगा. वैसे एक सवाल का जवाब दीजिए? क्या राम को मुसलमानों से दिक्कत होती है? क्या वो मुसलमानों को दुश्मन मानते हैं? क्या आपको लगता है कि हिंदू और मुसलमान साथ नहीं जी सकते? अगर हां, तो आप संविधान विरोधी हैं. संविधान की बुनियादी धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है आपकी सोच. ऐसा है, तो इसे तत्काल संज्ञान में लिया जाना चाहिए.

रूम को सजाने के लिए बहुत सारी चीजें बिकती हैं बाजार में. ऐसी नफरती सोच पालने वाले इंसान को गांधी की तस्वीर लगाने की क्या जरूरत है?
रूम को सजाने के लिए बहुत सारी चीजें बिकती हैं बाजार में. ऐसी नफरती सोच पालने वाले इंसान को गांधी की तस्वीर लगाने की क्या जरूरत है?

गांधी जी की तस्वीर टांगकर उस महात्मा का अपमान मत कीजिए
अगर बीजेपी आपको इस बयान के लिए नहीं लताड़ती, तो उसको भी मुसलमानों से वोट मांगने का कोई हक नहीं. साफ खेलिए न. मुसलमानों से नफरत है, ये बोलकर बताइए. कहिए कि बस हिंदू वोट चाहिए आपको. देखिएगा, कैसे हालत पतली होती है आप जैसों की. एक बात लिखकर रख लीजिए. ये नफरत की राजनीति सदाबहार नहीं होती. इसकी एक्सपायरी डेट होती है. दुनियाभर का इतिहास देख लीजिए. जब ये मौसम गुजर जाएगा, तो आप जैसे ‘नफरतियों’ की बिरादरी का क्या होगा? आपकी ट्विटर टाइमलाइन पर एक तस्वीर देखी. शायद आपका दफ्तर है. पीछे गांधी जी की तस्वीर टंगी थी. तस्वीर रूम डेकोरेशन के लिए टांगी है क्या? जानते भी हैं कि गांधी कौन था, क्या कहते थे? कभी उनका वो भजन सुनिए: ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सम्मति दे भगवान. दुआ है कि आपको भी मिले सद्बुद्धि.

बाकी सब ठीक है. आपको ढेर सारी लानत पहुंचे.

बहुत सारी निंदा के साथ


गुजरात चुनाव की सबसे विस्तृत कवरेज के लिए हमारी वेबसाइट के चुनाव सेक्शन पर क्लिक करें. 

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