उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले बड़ा धमाका! अब देखिएगा, 'दामादजी' के साथ साथ 'भाईजी'का मुद्दा भी उठेगा! खबर ये है कि एक रिपोर्ट आई है. जिसमें कहा गया है कि 7 सालमें बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई आनंद कुमार ने 18000 परसेंट का 'असामान्य मुनाफा'कमाया है. 18000 परसेंट का मतलब? अगर धंधे में 1 लाख रुपये लगाए जाएं और 7 साल में1.81 करोड़ का मुनाफा बना लें. धांसू! जिन सात सालों में आनंद कुमार की संपत्तिकई गुना बढ़ने की बात कही जा रही है, उनमें से 5 सालों तक (2007 से 2012)प्रदेश में 'बहन' मायावती की सरकार थी. टीवी चैनल 'टाइम्स नाऊ' ने सोमवार शाम खबरदी कि कुमार का 'अद्भुत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय' मुनाफा अब इनकम टैक्स जांच केदायरे में आ गया है. खबर है कि कुमार की 1316 करोड़ की दौलत की जांच की जा रही है.इसे नए साल अब तक का सबसे बड़ा पॉलिटिकल स्कैंडल बताते हुए 'टाइम्स नाऊ' ने रिपोर्टकिया, 'कुमार कम से कम 12 कंपनियों के मालिक हैं. उनकी कुल दौलत में 440 करोड़ कैशऔर 870 करोड़ बाकी संपत्ति है.' रिपोर्ट के मुताबिक, आनंद कुमार ने कई फर्जीकंपनियां भी बनाई हैं. इनकी कंपनी दिया रियलटर्स प्राइवेट लिमिटेड ने सारे रिकॉर्डतोड़ते हुए 7 साल में 45257 परसेंट का मुनाफा कमाया है.https://twitter.com/TimesNow/status/818460947761209345 26 दिसंबर को हीएनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) की तरफ से पता चला था कि दो बैंक खातों में 104करोड़ रुपये जमा किए गए थे, जिनमें से एक बसपा का था और एक आनंद कुमार का. इनमें सेआनंद के यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया खाते में 1.43 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे.https://twitter.com/TimesNow/status/818457881078923264 ईडी अपने रुटीन सर्वे केतहत संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर नजर रखता है. इसी के तहत अधिकारी यूबीआई बैंक की करोलबाग ब्रांच में पहुंचे और पाया कि नोटबंदी के बाद दो बैंक खातों में काफी पैसा जमाकिया गया है. जब मामला खुला तो मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसे साजिश बतायाथा. डायरेक्ट अटैक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किया. कहा कि हमारी पार्टी नोटबंदीके खिलाफ जोर-शोर से बोल रही है, इसलिए राजनीतिक दुश्मनी के तहत उनके भाई को बदनामकरने की कोशिश हो रही है. मायावती के भाई के खिलाफ चुनाव से पहले बड़े आरोप सामनेआए हैं. पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ रही है. बहुत जल्द आप भाजपा प्रवक्ताओं कोरॉबर्ट वाड्रा के 'असामान्य' मुनाफे की याद दिलाते हुए आनंद कुमार के कथितभ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए भी देखेंगे. अभी तो पार्टी शुरू हुई है.कौन हैं आनंद कुमारमायावती के छोटे भाई एक समय नोएडा में क्लर्क हुआ करते थे. मायावती जब यूपी कीपॉलिटिक्स में चमकीं, तब से आनंद कुमार भी चमक गए. उन्होंने अपने हाथ-पैर मारे औररातों-रात जमकर पैसे बनाए. मायावती के दाहिने हाथ सतीश मिश्रा के बेटे कपिल मिश्राने भी दिल खोलकर उनका साथ दिया. नेताओं, उनके रिश्तेदारों और बिल्डरों के बीच कामेल-जोल पुराना रहा है. इन्हीं के साथ मिलकर आनंद कुमार ने कई कंपनी खोलीं. मायावतीजब सूबे की मुख्यमंत्री हुआ करती थीं तो इनकी कंपनियों की संख्या में वैसे हीजबरदस्त उछाल दर्ज किया गया, जैसे सेंसेक्स में किया जाता है. इससे पहले 2013 मेंइंडियन एक्सप्रेस ने इनके पूरे साम्राज्य का खुलासा किया था.2007 के बाद2007 में मायावती के सत्ता में आने के बाद आनंद कुमार ने 49 कंपनियां खोलीं. रियलस्टेट बिजनेस के धुरंधर जेपी, यूनिटेक, DLF के साथ मिलकर 2012 तक 760 करोड़ तक काबिजनेस किया. जैसा कि होता है इनमें से ज्यादातर कंपनी सिर्फ शेयर के नाम पर पैसेबटोरने के लिए खोली गई थीं. ज्यादातर फर्जी थीं. इन्हें एडवांस पेमेंट औरइन्वेस्टमेंट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था.होटल लाइब्रेरी क्लब प्राइवेट लिमिटेड2007 से पहले एक कंपनी थी – होटल लाइब्रेरी क्लब प्राइवेट लिमिटेड. इसकाहेडक्वॉर्टर मसूरी में था. वहां इसका ही एक होटल शिल्टन भी है. आनंद कुमार इसकेमैनेजिंग डायरेक्टर हुआ करते थे. खुद ही 1.2 करोड़ सालाना की सैलरी भी लेते थे.डायरेक्टर थे दीपक बंसल. ये कंपनी अपने आप में एक नदी थी, जिससे दूसरी कई नदियांनिकली हुई थीं. मार्च 2012 तक इस कंपनी का बैंक बैलेंस 320 करोड़ रुपए था. इस कंपनीकी तीन और फर्म थीं. इसकी तीन फर्म में एक थी रेवोल्यूशनरी रियल्टर्स(Revolutionary Realtors). नाम के हिसाब से ही क्रांति करते हुए इसने 2011-12 में60 करोड़ कमाए. इस क्रांति का जरिया था सट्टेबाजी. मार्च 2012 तक इस फर्म का बैंकबैलेंस था 54 करोड़ रुपए. रेवोल्यूशनरी रियल्टर्स से भी एक ब्रांच निकली हुई थी.तमन्ना डेवलपर्स. तमन्ना डेवलपर्स का डेवलपमेंट मार्च 2012 तक 160 करोड़ रुपए था.होटल लाइब्रेरी के पास 31 मार्च 2008 तक सिर्फ 43 करोड़ रुपए थे.कर्नाउस्टी मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड (CARNOUSTIE MANAGEMENT PVT LTD-CMPL)2007-08 में कुमार के बिजनेस पार्टनर और उनकी एक फर्म एक दूसरे बिजनेस ग्रुप सेजुड़े. इस ग्रुप का नाम है, कर्नाउस्टी मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड (CarnoustieManagement Pvt Ltd). इस कंपनी का रजिस्ट्रेशन दिल्ली के जनकपुरी इलाके में सितंबर2006 में हुआ था. CMPL रियल स्टेट के अलावा स्पोर्ट मैनेजमेंट, सिक्योरिटी,हॉस्पिटैलिटी के बिजनेस में भी है. मार्च 2012 तक इसका बिजनेस 620 करोड़ तक था. CMPLकी कुल 14 ब्रांच हैं, जो 2007 के बाद शुरू हुईं. 2010 से 2012 के बीच DLF ने 6करोड़ और यूनिटेक ने 335 करोड़ रूपए CMPL में लगाए. DLF और यूनिटेक ने तब कहा था किये सामान्य ट्रांजेक्शन थे. CMPL ने एक रियल स्टेट फर्म को खरीदा. SDS ग्रुप की SDSDevelopers. ये ग्रुप दीपक बंसल का है. 2010 में आनंद कुमार की होटल लाइब्रेरी क्लबप्राइवेट लिमिटेड ने भी इसी ग्रुप के SDS Infrastructure को खरीदा था. दीपक बंसलइसके डायरेक्टर थे. बाद में दीपक होटल लाइब्रेरी क्लब और आनंद कुमार की ही एक औरफर्म DKB इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर बनाए गए. बंसल के SDSग्रुप की एक फर्म ने इसी दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 2,500 अपार्टमेंट बनवाएथे. आनंद कुमार और कई दूसरे रियल स्टेट के लोगों ने CMPL में इन्वेस्ट किया. बंसलइस इन्वेस्टमेंट में लिंक का काम कर रहे थे. CMPL और आनंद कुमार के बीच एक और लिंकहैं शुभेंदु तिवारी. ये शुरू में आनंद कुमार की ही फर्म Revolutionary Realtors औरShivanand Real Estate Pvt Ltd. के डायरेक्टर थे. CMPL की 2011-12 की रिपोर्ट आनंदकुमार से जुड़े प्रशांत कुमार ने तैयार की थी. इस रिपोर्ट में UK की एक फर्मIbonshourne Limited को भी इसकी एसोसिएट फर्म बताया गया. Ibonshourne कारजिस्ट्रेशन लंदन में है. इसके बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में एक हैं समीर गौर. समीर गौरने जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर रहते हुए यमुनाएक्सप्रेसवे बनवाया. इसके अलावा हाईवे के कई प्रोजेक्ट भी उनके नाम हैं.सतीश मिश्रा के बेटे से कनेक्शनआनंद कुमार की एक और कंपनी है दिया रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड. सतीश चंद्र मिश्राके बेटे कपिल मिश्रा दिया रियल्टर्स में आनंद कुमार के पार्टनर थे. दिया की 2012 तकलगभग 78.868 करोड़ की संपत्ति थी. इसके अलावा सतीश मिश्रा के बेटे की दो फर्म संकल्पएडवाइजरी सर्विसेज और यमुनोत्री इंफ्रास्ट्रक्चर में भी आनंद की फर्म का पैसा लगाहुआ है. कपिल मिश्रा की संकल्प फर्म दिल्ली के बंगाली मार्किट में है. इसके सामनेही एक होटल है. Check Inn. इसके मालिक भी मिश्रा ही हैं.आनंद कुमार की दूसरी फर्मआनंद कुमार की एक और फर्म है एक्सपीरियंस प्रोजेक्ट. इसने आनंद कुमार की ही दियारियल्टर्स में ही 1.5 करोड़ रुपए लगा रखे हैं. इसके अलावा उनकी दूसरी फर्म विंडसरकम्प्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड ने भी दिया रियल्टर्स के 8,62,500 शेयर खरीद रखे हैं.जब ये बातें सामने आई थीं तब मायावती ने कहा था कि मेरे भाई का इन सबसे कोई लेनादेना नहीं है. ये सारे आरोप गलत हैं. सतीश मिश्रा ने कहा था कि लीगल रूप से मेरेबेटे को बिजनेस करने का पूरा हक़ है. CMPL ने कहा था कि बसपा सरकार ने हमारी कोई मददनहीं की है. SDS Developers Pvt Ltd कंपनी हमने खरीदी थी लेकिन SDS ग्रुप के किसीबिजनेस से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. इन सबके अलावा खुद की बनाई दूसरी कंपनियोंमें आनंद कुमार का कितना शेयर है, ये सब झोल है और अब तक सामने नहीं आया है.मायावती के भाई का ट्रैक-रिकॉर्ड बहुत पेचीदा रहा है. कुल मिलाकर आनंद कुमार ज़मीनोंके मामलों में घाघ हैं. इसी के चलते अप्रैल 2015 में भी फाइनेंस मिनिस्ट्री ने इनकागला पकड़ा था. Financial Investigation Unit (FIU) ने उल्टे-सीधे ट्रांजेक्शन की एकरिपोर्ट तैयार की थी. फाइनेंस मिनिस्ट्री ने तब ED को 2176.08 करोड़ रुपयों के इसट्रांजेक्शन की जांच के आदेश दिए थे. यूपी चुनाव नजदीक हैं. जाहिर है मायावती फिरसे अपने भाई का बचाव करेंगी. आज की अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ऐसा दिखायाकि वो इन सब बातों का कोई लोड नहीं ले रही हैं. लगता नहीं कि इन सबसे यूपी के लोगोंको कोई ख़ास फर्क पड़ता है. उनके लिए नैतिकता के मायने कुछ दूसरे हैं. उनके अपनेमापदंड हैं, जिन पर वो वोट करते हैं. इसीलिए शायद अब तक मायावती के भाई पर कुछ ख़ासनहीं हुआ. देखते हैं, इस मामले में कुछ होता है या ये सिर्फ चुनावी लक्षण बनकर रहजाता है, जिसकी चर्चा ऊपर हुई थी.--------------------------------------------------------------------------------आपको छोड़ जाते हैं अवधी कवि प्रदीप शुक्ल की इस कविता के साथई चुनाव के झंझट मा खौख्याय लिहिन तौ का होईगा दुई जने जो याक दूसरे का फिरि नीचकहिन तौ का होईगा !! जिउ गर्मी मा बिल्लाय रहा कोउ बेमतलब बौराय रहा बहन भाइयों,बहन भाइयों दिन भर कोउ चिल्लाय रहा अब कोहू की जबान फिसली पागल कहि दिहिन तौ काहोईगा! दुई जने जो याक दूसरे का फिरि नीच कहिन तौ का होईगा!!--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:1. जीरो-हीरो-जीरो. क्या फिर हीरो बनेंगी मायावती2. जब मुलायम ने अखिलेश की बेटी से कहा 'तुम्हारे पापा बहुत ज़िद्दी हैं'3. तो अखिलेश का चुनाव चिह्न बदल दिया रामगोपाल ने 4. फेसबुक पर अबकी बार, BJP कररही सबसे क्रांतिकारी प्रचार, देखें सबूत