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UKSSSC: जिस पर थी पेपर सील करने की जिम्मेदारी उसी ने कर दिया लीक, खरीदी कार और बनवाया घर

STF ने अब तक कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया है. इसमें दो अपर निजी सचिव, UKSSSC के कर्मचारी और BJP नेता भी शामिल हैं.

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UKSSSC Paper leak
UKSSSC पेपर लीक मामले की जांच कर रही STF ने अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया है.
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प्रशांत सिंह
16 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 16 अगस्त 2022, 06:46 PM IST)
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UKSSSC, यानी उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC). आयोग ने 13 अलग-अलग विभागों के 916 पदों को भरने के लिए ग्रेजुएट लेवल एग्जाम कराया था. एग्जाम होने के बाद उसमें धांधली, नकल और पेपर लीक की बात सामने आई. छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया तो मामले की जांच शुरू हुई. मामले की जांच STF ने शुरू की तो जमकर गड़बड़ियां सामने आईं. पता चला कि जिसे पेपर सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दी गई थी उसी ने 36 लाख रुपए लेकर पेपर लीक करा दिया. STF ने अब तक कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया है. इसमें दो अपर निजी सचिव, UKSSSC के कर्मचारी और BJP नेता भी शामिल हैं.  

क्या है UKSSC पेपर लीक प्रकरण? 

13 अलग-अलग विभागों में छात्रावास अधीक्षक, सहायक समीक्षा अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी जैसे ग्रुप C के 916 पदों को भरने के लिए UKSSSC ने ग्रेजुएट लेवल की वैकेंसी निकाली थी. 4 और 5 दिसंबर 2021 को परीक्षा हुई.  भर्ती के लिए लगभग 2 लाख 50 हजार कैंडिडेट्स ने अप्लाई किया था. एग्जाम देने आये 1 लाख 60 हजार कैंडिडेट्स. अप्रैल 2022 में परीक्षा का रिजल्ट आ गया. इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और आगे का प्रोसेस शुरु हुआ. इसी बीच भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे. उत्तराखंड बेरोजगार संघ से जुड़े युवाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चिट्ठी लिख जांच कराने की मांग की. जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डीजीपी अशोक कुमार को मामले की जांच करने के आदेश दिये. बेरोजगार संघ से जुड़े बॉबी पंवार ने लल्लनटॉप से बात करते हुये कहा,  

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पेपर लीक के पैसे से खरीदी कार, बनवाया घर 

UKSSSC पेपर लीक मामले में प्रिंटिंग प्रेस से पेपर में गड़बड़ी होने के आरोप लगे थे. दरअसल UKSSSC ने पेपर प्रिंटिंग का काम आउटसोर्सिंग कंपनी आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया था. इसी कंपनी में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर काम करने वाले अभिषेक वर्मा को भी STF ने गिरफ्तार किया था. वर्मा की जिम्मेदारी पेपर छपने के बाद उसे सील करने की थी. लेकिन यहीं उसने खेल कर दिया. अभिषेक वर्मा ने टेलीग्राम ऐप के जरिये पेपर अपने साथियों को भेज दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिषेक को इसके लिए करीब 36 लाख रुपए मिले थे. STF के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर हमें बताया कि वर्मा ने पेपर लीक से जो पैसा इकट्ठा किया था उसमें से 9 लाख रुपए की उसने डिजायर कार बुक की थी. इसके अलावा उसने अपने घर के रिनोवेशन में भी पैसा लगाया था. जो पैसा बच गया था उसे उसने रिश्तेदारों के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया था. इस प्रिंटिंग प्रेस पर पहले भी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं. लल्लनटॉप से बात करते हुए बॉबी ने बताया, 

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STF के अधिकारी ने ये भी बताया की पेपर की प्रिंटिंग और पैकेजिंग के CCTV फुटेज भी नहीं मिले हैं. इसके अलावा ये भी सामने आया कि प्रिंटिंग के दौरान डमी कैमरे का इस्तेमाल किया गया था. 

STF ने शुरू की जांच तो खुला मामला 

 DGP अशोक कुमार ने मामले की जांच STF को सौंप दी थी. STF ने मामले की जांच शुरू की तो एक के बाद एक परतें खुलती गईं. STF ने UKSSSC में ग्रेड D  के कर्मचारी मनोज जोशी, नैनीताल के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में कनिष्ठ सहायक के पद पर तैनात महेंद्र, PWD विभाग में अपर निजी सचिव गौरव चौहान, न्यायिक विभाग में अपर निजी सचिव सूर्य प्रताप सिंह और बीजेपी नेता हाकम सिंह समेत 18 लोगों को गिरफ्तार किया है.  

STF के अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर हमसे बताया कि तुषार को एग्जाम का पेपर मनोज जोशी ने दिया था. मनोज और तुषार ने रामनगर के एक रिजार्ट में पेपर सॉल्व कराया था. मनोज जोशी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में काम करता है और ऐसे आरोप भी लगे हैं कि मनोज ने नौकरी, पेपर में गड़बड़ी कर पायी थी.  

चेयरमैन का इस्तीफा, सचिव हटाए गए

पेपर लीक प्रकरण सामने आने के बाद राज्य सरकार ने 13 अगस्त को UKSSSC सेक्रेटरी संतोष बड़ोनी को पद से हटा दिया था. जबकि UKSSSC के चेयरमैन एस राजू ने 6 अगस्त को इस्तीफा दे दिया था. एस राजू ने कहा था कि वो इस मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं. उन्होंने कहा था कि उनका किसी नेता से कोई रिश्ता नहीं है और कैंडिडेट्स को हुई परेशानी को वो समझते हैं. एस राजू साल 2016 से UKSSSC के चेयरमैन पद पर मौजूद थे. 

BJP नेता पार्टी से निष्कासित

BJP ने उत्तर काशी से जिला पंचायत सदस्य और UKSSSC पेपर लीक मामले में आरोपी हाकम सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. पार्टी के प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के निर्देश पर उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित किया गया है. हाकम सिंह को पूरे प्रकरण का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. पेपर लीक मामले की जांच शुरू होने पर हाकम सिंह बैंकॉक भाग गया था. 14 अगस्त को लौटा तो STF ने उसे हिमाचल बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में पता चला है कि हाकम सिंह पहले भी कई भर्तियों में धांधली कर चुका है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, 

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वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है. विधानसभा में उपनेता विपक्ष और खटीमा से कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी ने कहा कि स्नातक भर्ती घोटाले में अब तक जितने भी लोग पकड़े गए हैं वो केवल मोहरे हैं. सरकार असली घोटालेबाजों तक पहुंचना नहीं चाहती. कापड़ी ने मांग की है कि स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा से पहले हुई भर्तियों की भी जांच होनी चाहिए. साथ ही उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए. 

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