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दिल्ली: स्कूल ने मांगी 67 हजार फीस, बच्चों ने लीगल नोटिस भेज दिया

स्कूल ने EWS कोटे के करीब 14 छात्र छात्राओं को 67, 835 रूपए जमा करने को कहा था.

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22 जून 2022 (अपडेटेड: 22 जून 2022, 09:38 PM IST)
फोटो-स्कूल वेबसाइट
फोटो-स्कूल वेबसाइट
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दिल्ली के रहने वाले सार्थक का जब EWS कैटेगरी के तहत दिल्ली के नामी प्राइवेट स्कूल में एडमिशन हुआ तो वो बहुत खुश थे. EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसद सीटें रिजर्व होती हैं. सार्थक का एडमिशन इसी के अंतर्गत हुआ था. लेकिन उनकी खुशी तब काफूर हो गई जब स्कूल की ओर से उन्हें 67, 835  रूपए जमा कराने को कहा गया. ऐसा केवल सार्थक के ही साथ नहीं हुआ बल्कि उस स्कूल में EWS कोटे के अंतर्गत एडमिशन लेने वाले करीब 14 छात्र छात्राओं को स्कूल ने 67, 835 रूपए जमा करने को कहा था. जिसके बाद छात्रों के परिजनों की ओर से स्कूल को लीगल नोटिस भेजा गया है.  

क्या है मामला?

EWS कैटेगरी के अंतर्गत एडमिशन लेने वाले 14 बच्चों के माता-पिता को इस महीने की शुरुआत में स्कूल से संदेश मिला कि वे अप्रैल से जुलाई तक 2022-2023 शैक्षणिक सत्र के पहले 67,385 रुपये की बकाया फीस चुका दें. जिसके बाद परिजनों ने स्कूल को लीगल नोटिस भेजने का फैसला किया. छात्रों के वकील अशोक अग्रवाल ने आज तक को बताया, 

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के इन बच्चों ने हाल ही में दसवीं बोर्ड का पेपर दिया है. बच्चे रिजल्ट का इंतजार कर ही रहे थे कि स्कूल प्रशासन ने करीब 68 हज़ार रूपए की मांग कर डाली.  

EWS कैटेगरी के बच्चों की शिक्षा फ्री होती है.

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार अशोक अग्रवाल ने बताया कि स्कूल सरकारी जमीन पर बना हुआ है. कानून के मुताबिक ऐसे स्कूलों में EWS कैटेगरी के बच्चों की 12वीं तक की शिक्षा में फीस नही ली जाती है. नोटिस में साफ तौर पर बच्चों को 12वीं तक की शिक्षा फ्री देने और किसी भी तरह की फीस न वसूलने की बात कही गई है. मुख्यमंत्री और डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन को भी इसकी कॉपी भेजी जा चुकी है.

वकील अशोक अग्रवाल का कहना है कि अगर स्कूल प्राशसन इस डिमांड को नही मानता है तो हाई कोर्ट का रुख करेंगे. अगर सभी स्कूलों ने इसे फॉलो करना शुरू किया तो फिर पीड़ित बच्चों की संख्या हजारों में पहुंच सकती है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक संपर्क करने पर, दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि इसकी अनुमति नहीं है. हम इसका संज्ञान लेंगे और स्कूल को नोटिस जारी किया जाएगा. सार्वजनिक भूमि पर स्थापित स्कूलों का दायित्व है कि सरकार के नियमों का पालन करें.

EWS सीटों में आधी से ज्यादा खाली

NGO मिशन तालीम के फाउंडर इकरामुल हक का दावा है कि EWS ड्रॉ में नाम आने के बावजूद गरीब बच्चे और पैरेंट्स पिछले 2 महीनों से शिक्षा विभाग और स्कूल के चक्कर लगा रहे हैं. लेकिन उनका एडमिशन नही हो रहा है. आजतक की खबर के मुताबिक कई सालों का ट्रेंड ये कहता है कि EWS की 50 हज़ार सीटों में सिर्फ आधी यानी कि 25 हजार में ही एडमिशन हो पाए हैं. इस साल भी पहले ड्रॉ में 30 हजार बच्चों के नाम आए थे. पर इसमें से सैकड़ो बच्चो का अभी भी एडमिशन नही हुआ है. हक ने आरोप लगाया कि अधिकारी जानबूझकर गलतियां निकालकर एडमिशन देने से मना कर रहे हैं और गरीब बच्चों को परेशान कर रहे हैं. जबकि हाईकोर्ट का सख्त आदेश है कि खाली सीटें भरी जाएं. दिल्ली में 1700 के करीब प्राइवेट स्कूल हैं. 

 

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