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पांच बार T20 वर्ल्ड कप में नाकाम हो चुके धोनी इस बार जिता पाएंगे?

T20 वर्ल्ड कप. पूरे पांच साल के बाद आयोजित हो रहा ICC का मेगाशो. बीते बरस कोरोना के चलते इसे टाल दिया गया था. लेकिन फिर हमें कोरोना की आदत पड़ गई और हम पूरे जोश के साथ T20 वर्ल्ड कप देखने के लिए तैयार हैं. ICC और BCCI मिलकर इसे UAE और ओमान में आयोजित करेंगे. इस मेगा इवेंट के लिए सभी देश अपनी-अपनी टीमें घोषित कर रहे हैं.

इसी सिलसिले में भारत ने भी अपनी T20 वर्ल्ड कप टीम घोषित की. लेकिन चूंकि हम स्टार सिस्टम के फॉलोअर हैं इसलिए टीम से ज्यादा चर्चा एक रिटायर प्लेयर पर हुई जो मेंटॉर के तौर पर टीम से जुड़ रहा था. जी हां, अपने पूर्व कैप्टन कूल और मौजूदा मार्गदर्शक मंडल के नव-निर्वाचित सदस्य महेंद्र सिंह धोनी. धोनी के मेंटॉर बनने के बाद से ही देवताओं में हर्ष का माहौल है और पुष्पवर्षा रुक ही नहीं रही.

ऐसा जताया जा रहा है मानो धोनी के अपॉइंटमेंट से ही हमारा विश्व चैंपियन बनना तय हो गया है. बाकी टीमें ड्रेसिंग रूम में माही को देखते ही सरेंडर कर देंगी. घुटनों के बल बैठकर अपने बल्ले सर के ऊपर लाकर कहेंगी- हे महेंद्र बाहुबली, आपके रहते हुए हम अधम कैसे जीत सकते हैं? अतएव, तोफू कुबूल कीजिए. हमें जाने दीजिए, ये बल्ले और ट्रॉफी सब रख लीजिए.

# MS Dhoni T20 World Cup Stats

लेकिन क्या सच में ऐसा है? क्या क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में धोनी का औरा इतना बड़ा है कि वह मैदान में घुसे बिना ही खेल पलट देंगे? इस सवाल के जवाब से पहले हम ये देख लें कि T20 वर्ल्ड कप में धोनी की कप्तानी और बैटिंग के रिकॉर्ड क्या कहते हैं.

धोनी ने कुल 33 T20 वर्ल्ड कप मैचों में भारत की कप्तानी की है. इन मैचों में से हम 21 बार जीते हैं. उन्होंने T20 वर्ल्ड कप में एक भी फिफ्टी नहीं मारी है. और उनका स्ट्राइक रेट भी 124 के अंदर है. T20 वर्ल्ड कप के इतिहास में किसी भी कप्तान ने 20 से ज्यादा मैचों में अपनी टीम की कप्तानी नहीं की है.

और धोनी की कप्तानी में हम इससे ज्यादा मैच तो जीत चुके हैं. लेकिन हमारे पास T20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफीज कितनी हैं- Uno, हिंदी में कहें तो एक. यानी सबसे ज्यादा मैच जीतकर भी हम सिर्फ एक वर्ल्ड कप जीत पाए. वहीं डैरेन सैमी ने सिर्फ 18 मैच में कप्तानी कर, दो T20 वर्ल्ड कप जीत लिए.

2007 में हम T20 वर्ल्ड चैंपियन बने. कई लोगों का मानना है कि पहली बार था, लोग इसे हल्के में ले रहे थे और इसी के चलते मजे-मजे में हमने ये वर्ल्ड कप जीत लिया. और जब बाकी टीमें इस फॉर्मेट और इसके वर्ल्ड कप को गंभीरता से लेने लगीं तो हमारी पोल खुल गई. ऐसा कहने वाले अपनी बात में वजन लाने के लिए कहते हैं कि इसी के चलते हमें अगला फाइनल खेलने में सात साल लग गए और जीतने में तो अभी जाने कितने लगेंगे.

शुद्ध स्टैट्स की बात करें तो 2009 के T20 वर्ल्ड कप में हम सुपर-8 के तीनों मैच हारकर बाहर हुए. दो बार चेज करते हुए जबकि एक बार पहले बैटिंग कर. इंग्लैंड के खिलाफ हम तीन रन से हारे. धोनी 20 गेंदों पर 30 रन बनाकर नाबाद रहे. साउथ अफ्रीका ने हमें 12 रन से मात दी. और इसमें धोनी जबरदस्ती का सिंगल लेने के चक्कर में रनआउट हुए. और रनआउट होने से पहले उन्होंने 12 गेंदों में पांच रन बनाए.

वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ हमारी सात विकेट की हार में सबसे खराब स्ट्राइक रेट धोनी का रहा. धोनी ने यहां 23 गेंदों पर 11 रन बनाए. और टीम का कुल स्कोर रहा 153 रन. फिर आया 2010 का T20 वर्ल्ड कप, हम फिर से सुपर-8 में तीनों मैच हारकर बाहर हुए. ऑस्ट्रेलिया ने हमें 49 रन से हराया. पांच से ज्यादा गेंदें खेले बल्लेबाजों में सबसे खराब स्ट्राइक रेट फिर धोनी का रहा.

वेस्ट इंडीज़ से हम 14 रन से हारे. धोनी 19वें ओवर में रनआउट हुए. उन्होंने 18 गेंदों पर 29 रन बनाए. श्रीलंका ने हमें पांच विकेट से पीटा. 12वें ओवर में 96 के टोटल पर बैटिंग करने आए धोनी ने 19 गेंदों पर 23 रन बनाए. साल 2012 के वर्ल्ड कप में हम फिर से सुपर-8 से बाहर हुए. इस बार हमें ऑस्ट्रेलिया ने नौ विकेट से कूटा. धोनी ने 21 गेंदों पर 15 रन बनाए. यह इस सुपर-8 की इकलौती हार रही. लेकिन यह इतनी बड़ी हार थी कि हमारा नेट रनरेट और उम्मीदें दोनों रसातल में चले गए.

2014 का वर्ल्ड कप. हमने पहले दो ग्रुप मैच सात विकेट से जीते. तीसरा आठ विकेट से. पहले दोनों मैचों में बैटिंग ना करने वाले धोनी ने बांग्लादेश के खिलाफ हुए इस मैच में 12 गेंदों पर 22 रन बनाए. अगले मैच में हमने ऑस्ट्रेलिया को 73 रन से कूटा. धोनी के नाम 20 गेंदों पर 24 रन रहे. सेमीफाइनल में हमने साउथ अफ्रीका को छह विकेट से पीटा. धोनी बिना खाता खोले नाबाद लौटे. जबकि फाइनल में हम श्रीलंका से हार गए. यहां धोनी ने सात गेंदों पर चार रन बनाए. आमतौर पर रैना के बाद आने वाले धोनी इस मैच में रैना से पहले आए थे.

2016 के T20 वर्ल्ड कप में हमने विराट कोहली के दम पर सेमीफाइनल खेला. जहां हमें वेस्ट इंडीज़ ने हराया. इस सेमीफाइनल में भी धोनी सुरेश रैना, मनीष पांडेय और हार्दिक पंड्या जैसे बल्लेबाजों से पहले बैटिंग करने आए, जो कि उनकी आदत के विपरीत है. धोनी ने इस मैच में नौ गेंदों पर एक चौके की मदद से 15 रन का योगदान दिया.

इन तमाम स्टैट्स को देखें तो T2o वर्ल्ड कप में एक बल्लेबाज के तौर पर धोनी का प्रदर्शन औसत से भी घटिया लगता है. और साथ में उनकी कप्तानी में भी बहुत धार नहीं दिखती. जरूरत के वक्त हमने हमेशा चोक किया था. सेमी और फाइनल तो छोड़ दीजिए. धोनी की कप्तानी में हमने सुपर-8 तक में चोक किया है. ऐसे में जनभावनाएं और मार्केट जो भी कहे, लेकिन एक बात तो तय है कि धोनी का आना वर्ल्ड कप जीतने की गारंटी नहीं है.

# Power Struggle

अब आंकड़ों के बाद थोड़ी प्रैक्टिकल बात. जाहिर है, सालों से विराट कोहली अपने अंदाज में टीम चला रहे हैं. और जैसा कि लोगों का आरोप है, रवि शास्त्री वही करते थे जो कोहली चाहते थे. अब इस जोड़ी के बीच में धोनी भी आ रहे हैं. और सेम उसी रोल में जो शास्त्री के पास है. ऐसे में टकराव होना तो तय है.

क्योंकि जिस देश में पूरा परिवार रात के खाने पर एकमत नहीं हो पाता, वहां वर्ल्ड कप की प्लेइंग XI पर सब कैसे एकमत हो सकते हैं? और अगर ये पावर स्ट्रगल हुआ तो जाहिर तौर पर नुकसान टीम का होगा. ये कुछ ऐसा है जैसे आपने अपने बड़े भाई के साथ मिलकर कोई दुकान खोली. सालों तक मेहनत की और अब वो दुकान चल निकली है.

आप दोनों बराबर की हिस्सेदारी के साथ मार्केट में मौज कर रहे हैं. एकाएक आपके पिताजी ने वहां अपने एक खास आदमी को भेज दिया कि आज से हर फैसला लेने में इनका भी रोल रहेगा. वो भी उतना ही जितना उस भाई का है जो पहले दिन से आपके साथ था. आपके हर स्ट्रगल में खड़ा रहा. धूप-बरसात की परवाह किए बिना साथ लगकर यहां तक लाया.

अब जाहिर है कि आप पहले भी भाई की रेस्पेक्ट करते हुए अपने मन की करते थे. और आगे भी करेंगे. लेकिन अब आपके भाई को कोई भी फैसला लेने से पहले आपके पिताजी के खास आदमी से बात करनी होगी, उसकी सहमति लेनी होगी. यानी उसका रोल पहले जैसा नहीं रह गया. ऐसे में निश्चित तौर पर उसे बुरा लगेगा.

और यहां तो खैर वर्ल्ड कप की बात है. जहां मैदान के अंदर रहकर बिना किसी खास योगदान के लोग हीरो बना दिए जाते हैं. वहां अगर बाहर बैठा कोई आदमी जीत का क्रेडिट ले गया तो इस टीम को बनाने वाले को कैसा लगेगा? रवि शास्त्री और विराट कोहली की जोड़ी, जो सालों से इस दिन के इंतजार में थी, एकाएक किसी और को रिपोर्ट करेगी. और जीत का क्रेडिट भी 60-70 परसेंट वही व्यक्ति ले जाएगा. क्या ये सही है?

# मार्केटिंग का खेल

इस मामले में एक और चीज की चर्चा है. लोगों का मानना है कि धोनी को T20 वर्ल्ड कप तक ले जाना मार्केटिंग स्ट्रैटेजी का हिस्सा है. इसके जरिए ICC और BCCI दोनों ही पैसे बनाना चाहते हैं. धोनी अभी तमाम ब्रांड्स का विज्ञापन करते हैं. इनमें फैंटेसी ऐप Dream11 भी शामिल है. और Dream11 ना सिर्फ IPL बल्कि T20 वर्ल्ड कप के लिए ICC का भी स्पॉन्सर है.

और ऐसे में अगर इस ऐप का चेहरा बने एमएस धोनी टूर्नामेंट के दौरान मौजूद रहेंगे तो निश्चित तौर पर ब्रांड को फायदा होगा. और साथ ही धोनी के दीवाने इस देश को भी टूर्नामेंट में खूब इंट्रेस्ट आएगा. कई लोग तो सिर्फ इस बात से उत्साहित हैं कि वह धोनी को दोबारा टीम इंडिया के कैंप में देख पाएंगे. और ऐसे दीवाने लोगों का फायदा उठाना मार्केट को खूब आता है.

धोनी निश्चित तौर पर भारतीय क्रिकेट के लेजेंड हैं. वनडे क्रिकेट में उनकी टक्कर के प्लेयर और कप्तान कम ही हुए होंगे. लेकिन क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट के लिए ऐसा नहीं कहा जा सकता. खासतौर से अगर बात T20 वर्ल्ड कप की हो तो. धोनी की कप्तानी में हमने एक T20 वर्ल्ड कप जीता है तो पांच बार नाकाम भी हुए हैं. और इनमें से तीन बार तो बुरी तरह से. ऐसे में हमें बहुत ओवरहाइप ना होकर धरातल पर रहना चाहिए.


मशहूर लेखक सत्य व्यास हमारे इस ओपिनियन से अलग सोचते हैं. उनकी राय यहां पढ़ी जा सकती है.


क्या भारत ने पांचवा टेस्ट खेलने से इनकार करते हुए इंग्लैंड को विजयी मान लिया?

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