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1988 में दिल्ली के वकील किस पुलिस अफसर के ट्रांसफर के लिए हड़ताल पर चले गए थे?

6 नवंबर, 2019 का क्विज़ खेलिए हमारे साथ.

सवाल

1. ये महात्मा गांधी के सबसे पसंदीदा लेखक थे. 1910 में ट्रांसवाल में गांधीजी के आश्रम का नाम इस लेखक के नाम पर रखा गया था, जो दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह आंदोलन का मुख्यालय बन गया. किस लेखक की बात हो रही है?

2. 1995 में जब महाराष्ट्र में पहली बार बीजेपी-शिवसेना के गठबंधन वाली महायुति सरकार बनी तब मुख्यमंत्री पद किसे दिया गया था?

3. किस ब्रांड ने ‘Firm PM, Farm PM’ ऐड बनाकर सरकार को RCEP में शामिल न होने पर बधाई दी है?

4. 2002 में अक्षरधाम हमले के बाद इस बिल को गुजरात विधानसभा में लाया गया था. 2003 में इसे केंद्र सरकार के पास भेजा गया. इस बिल को तीन बार राष्ट्रपति वापस भेज चुके थे. अब रामनाथ कोविंद ने इसको 16 सालों के बाद मंजूरी दे दी है. किसकी बात हो रही है?

5. लोक जनशक्ति पार्टी के नए अध्यक्ष चिराग पासवान की पहली और इकलौती फ़िल्म कौन सी थी?

6. दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में स्थित इस मेमोरियल की स्थापना 1964 में की गई थी. हाल ही में इसके पैनल से मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश और कर्ण सिंह को बाहर कर दिया गया. किस मेमोरियल की बात हो रही है?

7. जनवरी 1988 में दिल्ली में वकील किस पुलिस अफसर के ट्रांसफर के लिए हड़ताल पर चले गए थे?

8. ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए अंगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रास्ते को क्या कहा जाता है?

9. पलासियो दो-काबो (Palacio do-cabo) किस राज्य के राजभवन का एक नाम है जिसे 6 महीनों तक जनता के लिए बंद कर दिया गया है?

10. 27 अक्टूबर, 2019 से पाकिस्तान में चल रहे ‘आज़ादी मार्च’ का लीडर कौन है?

11. किस मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश में रोड ट्रिप की शुरुआत की है?

12. ‘सलाम – द फर्स्ट ***** नॉबेल लॉरेट’ किस वैज्ञानिक के ऊपर बनी डॉक्यूमेंट्री का टाइटल है?

13. ‘शोले’ फ़िल्म के किस एक्टर का असली नाम नाम हरिहर जेठालाल जरीवाला था?

जवाब

1. लियो टॉल्सटॉय

इस आश्रम को ‘टॉल्सटॉय फार्म’ नाम दिया था गांधीजी के सहयोगी हरमन केलेनबैक ने. नवंबर 2019 में इस आश्रम में गांधी और नेल्सन मंडेला की प्रतिमाएं लगाई गई हैं.

टॉल्सटॉय का पूरा नाम था लेव निकोलायेविच ग्राफ (काउंट) टॉल्सटॉय. वॉर एंड पीस और अन्ना कैरीनिना  उनकी दो सबसे शानदार किताबें हैं. गांधी का जीवन टॉल्सटॉय के लिखे से काफी प्रभावित था. 1910 में टॉल्सटॉय दुनिया से छूटे. उसी साल गांधी ने इस आश्रम की स्थापना की थी.

टॉल्सटॉय ने कहा था,

अगर तुम खुश रहना चाहते हो तो, रहो.

हर कोई दुनिया बदलने के बारे में सोचता है, लेकिन खुद को बदले बिना.

वॉर एंड पीस में टॉल्सटॉय ने लिखा है – हम तब तक नींद में होते हैं जब तक कि प्रेम में नहीं पड़ जाते.

2. मनोहर गजानन जोशी

1989 में बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन पहली बार हुआ, महायुति नाम से. उससे पहले शिवसेना महाराष्ट्र में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के साथ चुनाव लड़ चुकी थी. 1995 में इस गठबंधन को बहुमत मिला. सरकार बनी तो शिवसेना के कद्दावर नेता मनोहर जोशी को सीएम पद दिया गया.

मनोहर जोशी 2002 से 2004 तक लोकसभा के स्पीकर भी रहे.

शिवसेना महाराष्ट्र में हमेशा से सीनियर सहयोगी की भूमिका में हुआ करती थी. 2014 में सीट शेयरिंग पर बात बिगड़ी. दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई. शिवसेना ने चुनाव के बाद बीजेपी को समर्थन देने का फैसला किया था.

3. अमूल

RCEP यानी कि Regional Comprehensive Economic Partnership. इसी RCEP में ऑस्ट्रेलिया और न्यू ज़ीलैंड जैसे देश भी हैं जो डेयरी प्रोडक्शन में बादशाहत रखते हैं. अगर इंडिया इस डील में शामिल होता तो देशी डेयरी ब्रांड्स की हालत खराब हो सकती थी. अमूल ने सरकार को इस बाबत एक चिट्ठी भी लिखी थी.

अमूल देश का सबसे मशहूर डेयरी ब्रांड है. अमूल के प्रोडक्ट के साथ-साथ उसके ऐड भी कमाल किए रहते हैं. 6 नवंबर को अमूल ने ऐड बनाकर सरकार को इस फैसले के लिए धन्यवाद कहा.

4. गुजरात कंट्रोल ऑफ़ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम बिल/गुजरात एंटी-टेरर बिल

24 सितंबर, 2002. गांधीनगर का अक्षरधाम मंदिर. दो हथियारबंद आतंकी मंदिर में घुसे और बेतहाशा गोलियां चलानी शुरु कर दी. लगभग 30 लोगों की मौत हो गई, 80 से ज्यादा इंसान घायल हुए थे. इसी के बाद गुजरात सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कठोर कानून बनाने की दिशा में काम करना शुरु कर दिया था. ये बिल महाराष्ट्र के मकोका की तर्ज पर बना है.

5. मिले ना मिले हम

चिराग पासवान. केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के फाउंडर रामविलास पासवान के पुत्र. पार्टी की विरासत पिता ने बेटे को सौंप दी है. चिराग पासवान को लोक जनशक्ति पार्टी का नया प्रेसिडेंट बनाया गया है.

चिराग पासवान इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं. 2011 में ‘मिले ना मिले हम’ से अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत की थी. फ़िल्म के फ़्लॉप होने के साथ-साथ चिराग का फ़िल्मी करियर भी शांत पड़ गया. फिलहाल वो बिहार के जमुई से सांसद हैं. लगातार दूसरी बार.

6. नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी

5 नवंबर, 2019 को एक ऑर्डर जारी हुआ है. पीएम नरेंद्र मोदी को इस मेमोरियल का प्रेसिडेंट जबकि डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह को वाइस-प्रेसिडेंट बनाया गया है. सरकार कुछ समय पहले इस कॉम्पलेक्स में सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों का म्यूजियम बनाने का प्रस्ताव लाई थी. मेमोरियल के चार सदस्यों ने इसका विरोध किया था. अब वो चारों सदस्य पैनल से बाहर हो चुके हैं.

7. किरन बेदी

दिल्ली में हजारों की संख्या में पुलिसवाले वकीलों के खिलाफ आंदोलन के मूड में हैं. वो एक साथ नारा लगा रहे हैं – हमारा कमिश्नर ऑफ़ पुलिस कैसा हो, किरन बेदी जैसा हो. किरन बेदी फिलहाल पुड्डुचेरी की एलजी हैं. ऐसा क्या है जो पुलिसवाले किरन बेदी को याद कर रहे हैं.

दरअसल, बात तकरीबन 31 साल पुरानी है. सेंट स्टीफेंस कॉलेज के छात्रों ने राजेश अग्निहोत्री नाम के एक वकील को लेडीज रुम में पकड़ा था. 16 जनवरी 1988 को पुलिस ने राजेश अग्निहोत्री को हथकड़ी लगाकर तीस हज़ारी कोर्ट में पेश किया. इसपर वकील भड़क गए. कोर्ट ने वकील को उसी दिन छोड़ दिया और जिम्मेदार पुलिसवालों पर कार्रवाई के लिए कह दिया. 

20 जनवरी को किरन बेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, कहा – पुलिस ने जो किया सही किया. इससे गुस्साए वकीलों ने हड़ताल शुरु कर दी. दो महीने तक कोर्ट में कामकाज ठप रहा. दिल्ली हाईकोर्ट ने दो जजों की कमिटी बनाई. जस्टिस डीपी वाधवा के नेतृत्व में. इस मामले की जांच के लिए. तब जाकर हड़ताल खत्म हुई.

कमिटी ने कहा कि वकील साहब को हथकड़ी लगाकर कोर्ट में पेश करना गलत था. कमिटी ने किरन बेदी के ट्रांसफर की राय भी दी थी.

8. ग्रीन कॉरिडोर

ग्रीन कॉरिडोर के जरिए ट्रांसप्लांट के लिए ऑर्गन ले जानेवाले एंबुलेंस को सीधा रास्ता दिया जाता है. इस रास्ते से अब तक कई लोगों की जान बचाई जा चुकी है. 5 नवंबर को भी कुछ ऐसा ही हुआ. हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए 31 मिनट में 31 किलोमीटर की दूरी तय की गई. गुरुग्राम से दिल्ली तक. ग्रीन कॉरिडोर के जरिए.

9. गोवा

इस किले को पुर्तगालियों ने बनाया था. 16वीं से 17वीं सदी के बीच. 88 एकड़ में फैला ये किला जुवारी और मंडोवी नदी के संगम पर है.

ये अब गोवा के गवर्नर का ऑफिशियल घर है. जनवरी 2019 में इसे टूरिस्टों के लिए खोला गया था. जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के गोवा का राज्यपाल बनते ही रोक लग गई है. सुरक्षा कारणों की वजह से.

1961 में पुर्तगाली गोवा को छोड़कर गए थे. 1987 में गोवा को भारत के 25वें राज्य का दर्जा मिला था. जब तक गोवा को स्टेट का दर्जा नहीं मिला था, तब तक ये गोवा, दमन और दीव केंद्रशासित प्रदेश के उपराज्यपाल का सरकारी घर हुआ करता था. तब इसे ‘काबो राज निवास’ कहते थे.

10. मौलाना फ़ज़लुर रहमान, जमियत उलेमा-ए-इस्लाम-फ़ज़्ल

ये हालिया कुछ सालों में पाकिस्तान में हो रहा तीसरा बड़ा आंदोलन है. 2014 में इमरान खान ने नवाज़ शरीफ़ के खिलाफ़ धरना दिया था. 2017 में बरेलवी तहरीक-ए-लब्बैक ने. दोनों ने जो मांगा, नहीं मिला. सवाल उठ रहा है कि क्या मौलाना सफल हो पाएंगे. हालांकि ये आंदोलन बाकी दोनों से काफी आगे निकल चुका है.

27 अक्टूबर को कराची से शुरु हुआ ये आज़ादी मार्च 31 अक्टूबर को इस्लामाबाद पहुंचा. 1450 किलोमीटर का सफर तय करके. हज़ारों की भीड़ एक मांग पर टिकी पड़ी है. और वो है इमरान खान का इस्तीफा. इमरान इस्तीफे को छोड़कर कोई भी मांग मानने के लिए तैयार हैं.

11. कोनराड संगमा

कोनराड संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री हैं. एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत ये रोड ट्रिप शुरु की गई है. चार दिनों की ट्रिप है. 5 नवंबर से 8 नवंबर तक चलेगी. मेघालय बांग्लादेश के साथ 443 किलोमीटर लंबा बॉर्डर शेयर करता है.

12. अब्दुस सलाम

नेटफ्लिक्स पर एक डॉक्यूमेंट्री आई है. अब्दुस सलाम के ऊपर. वो पहले पाकिस्तानी थे जिन्हें नोबेल प्राइज़ मिला था. फिजिक्स में. इलेक्ट्रोवीक यूनिफिकेशन थिअरी के रिसर्च में योगदान के लिए.

सलाम इस्लाम की अहमदिया धारा से ताल्लुक रखते हैं. पाकिस्तान में अहमदियों को असली मुसलमान नहीं माना जाता. इस वजह से अब्दुस सलाम को वो सम्मान कभी नहीं मिल सका जिसके वो हकदार थे. 1996 में जब सलाम की मौत हुई तो उन्हें पाकिस्तान के राबवाह शहर में दफनाया गया. उनकी कब्र पर लिखे पत्थर पर लिखा था- पहला मुस्लिम नोबेल लॉरेट. लेकिन जल्द ही स्थानीय अधिकारियों ने उनकी कब्र से मुस्लिम शब्द मिटा दिया.

13. संजीव कुमार

संजीव कुमार को उनके दोस्त हरिभाई के नाम से बुलाते थे. कहते हैं कि शोले में वीरु का रोल संजीव कुमार निभाने वाले थे, लेकिन बाद में बात बदल गई.

1960 में ‘हम हिंदुस्तानी’ से अपने कैरियर की शुरुआत की थी. बेस्ट एक्टर के दो नेशनल अवॉर्ड जीते. 1971 में दस्तक में हामिद के किरदार के लिए. 1973 में कोशिश में हरिचरण के रोल के लिए. 6 नवंबर 1985 को उनकी ज़िंदगी थम गई. महज 47 की उम्र में. साल 2020 में उनकी बायोग्राफी आने वाली है.

आज के लिए बस इतना ही. कल और भी नए सवालों के साथ हम आपके सामने हाजिर होंगे.


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