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आपको मनोज बाजपेयी याद हैं, नवाज और इरफान भी याद हैं, तो विनीत कुमार क्यों नहीं

फिल्म इंडस्ट्री के बेहतरीन अभिनेताओं का जिक्र करते ही हमारे सामने मनोज बाजपेयी, नवाज, इरफान, नसीर और ओम की छवियां प्रकट होती हैं, लेकिन एक नाम और भी है, जिसे याद रखा जाना चाहिए. 47 सालों से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे विनीत कुमार. इनके खाते में 'मसान', 'कच्चे धागे', 'शूल', 'अक्स', 'विक्रमारकुडू', 'मकड़ी' और 'मंजूनाथ' जैसी फिल्में दर्ज हैं. इन्होंने विज्ञापन भी किए, टीवी शो भी किए और हॉलीवुड फिल्में भी कीं. 22 फरवरी को उनका जन्मदिन होता है. इस मौके पर हम उनकी बात करेंगे.

बाऊ: ‘अरे गोड़वा मोड़ दे उसका भूतनी के…’
पात्र 1: ‘एक और बनाइये डोम राजा. एक चुक्कढ़ अऊर.’
बाऊ: ‘हम काहे के राजा?’
पात्र 1: ‘अरे! बनारस में दुए तो राजा हैं. एक कासी नरेस. एक डोम राजा. एक ऊ पार. एक ई पार.’
बाऊ: ‘देखा ऊ संभू चौधरी का. साल में कतना पारी आवेला? ए संभू चाचा!’
शंभू: ‘जी साहब! दस साल में एक दिना!’

बाऊ: ‘दस साल में एक दिन पारी आत है. मतलब पूरे दिन पूरे एक दिन घाट का कमाई इनका. संभू के बाप का साल में एक पारी आता था. इहे ठसक में दस ठो बच्चा पैदा कर लिए. पारी बंट गयी. संभू के बाप रहलन एक, औ संभू एक बटा दस. अब संभू के दस साल में एक पारी आत है. अगली पारी कब आऊ संभू चाचा?’

शंभू: ‘अब ना ह पारी. बेच देली लाला चौधरी के हाथ. एक लाख रुपिया मिलल रहा. बाकी उमर भिखारी.’
बाऊ: ‘हमऊ बेच दे पारी. तो दस लाख मिली. का हो लाला?’
लाला: ‘हम कह देहली अ तू बेच देहला.’
बाऊ: ‘बेच देई का?’

दीपक: ‘बाबू…’
लाला: ‘अरे ई लड़बकवा का जाने? इके घाट से का लेवे-देवे के? पढ़े-लिखे वाला बाबू हौ.’
बाऊ: ‘लड़का का गाली देहला? अब तौ कब्भौ न बेचब पारी!’
लाला: ‘अरे जइसे तू तैय्यारै बइठल रहला.’
दीपक: ‘बाऊ कुछ पइसा दै द. दुर्गा पूजा जाना है दोस्तों के साथ.’
बाऊ: ‘कुर्ता ओहर हौ.’
दीपक: ‘तीन सौ रुपया ले लें?’

बाऊ: ‘सब लइ ल. तूहे त हउअ.’


ये संवाद फिल्म ‘मसान’ के 27वें मिनट के सीन का है. इसमें जहां ‘बाऊ’ का जिक्र है, वो एक पिता के किरदार के डायलॉग हैं. वो पिता, जिसका किरदार निभाया है विनीत कुमार ने. जब आप गूगल पर ‘मसान’ की स्टारकास्ट देखेंगे, तो विनीत आपको वहां नहीं मिलेंगे. हो सकता है यूट्यूब पर भी आपको कोई ऐसा वीडियो न मिले, जो सिर्फ विनीत पर हो. लेकिन ये वो एक्टर है, जिसे आपको खोजकर देखना चाहिए.

पटना में पैदा हुए और एनएसडी से मास्टर्स करने वाले विनीत का 22 फरवरी को जन्मदिन होता है. आइए इस मौके पर जानते हैं उनके बारे में कुछ बातें और देखते हैं उनके कुछ यादगार सीन, जो उनकी अभिनय क्षमता के साथ न्याय करते हैं. क्योंकि अभिनय के 47 साल बाद भी उनके सम्मान के साथ न्याय नहीं किया गया और हम उन्हें याद नहीं रख पाते.

1. ‘मसान’

 

'मसान' के एक दृश्य में विनीत कुमार
‘मसान’ के एक दृश्य में विनीत कुमार

‘मसान’ में विनीत का सबसे इंटेंस सीन 27वें मिनट से देखा जा सकता है. डोम का उनका किरदार पहले ही स्थापित किया जा चुका होता है, जो मुख्य किरदार का पिता है. विनीत के किरदार में अपना प्रारब्ध स्वीकार करने के बावजूद उसके प्रति उदासीनता का भाव है. वो अपने हालात पर खिन्न नहीं हैं, न ही उससे कोई लगाव है. मोह है, तो सिर्फ अपने छोटे बेटे से, जिससे वो कहता है, ‘सब लइ ल. तूहे त हउअ’ (सब ले लो. तुम्हीं तो हो.).

विनीत ने थिएटर एक्टिंग की शुरुआत पटना में की थी. कुछ वक्त के लिए तक वो राजनीति के भी करीब रहे. जयप्रकाश नारायण के दौर में. लेकिन कला नहीं छूटी. जल्द ही एनएसडी लौटे और मास्टर्स पूरा किया. विनीत उन दुर्लभ अभिनेताओं में से हैं, जिन्होंने तमिल, तेलुगू और मराठी भाषी फिल्में कीं, तो हिंदी सिनेमा में भी छाप छोड़ी. ‘चिड़ियाघर’ और ‘लापतागंज’ जैसे टीवी शो किए, तो ‘रिटर्न टू राजापुर’ और ‘भोपाल: अ प्रेयर फॉर रेन’ में हॉलीवुड कलाकारों के साथ काम किया.

2. ‘विक्रमारकुडू’

 

'विक्रमारकुडू' के एक दृश्य में विनीत
‘विक्रमारकुडू’ के एक दृश्य में विनीत

2006 में रिलीज हुई तेलुगू फिल्म ‘विक्रमारकुडू’ में विनीत मुख्य खलनायक थे. विधायक के उनके किरदार का नाम भाउजी था, जिसके लिए उन्हें खूब तारीफ मिली. एक स्थानीय दबंग व्यक्ति का किरदार उन्होंने बखूबी उतारा. 2012 में प्रभु देवा ने इसी फिल्म का हिंदी रीमेक करके ‘राउडी राठौड़’ बनाई, जिसमें ‘भाउजी’ का नाम बदलकर ‘बापजी’ हो गया. रोचक बात ये है कि इस हिंदी फिल्म में मुख्य खलनायक का किरदार साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के बेहतरीन अभिनेता नासर ने निभाया था.

अभिनय की तरफ आकर्षित होने के बारे में विनीत एक इंटरव्यू में बताते हैं, ‘मैं बहुत पहले से मानव स्वभाव के बारे में जानना चाहता था. मुझे लोगों को सुनना और उन्हें ऑब्जर्व करना पसंद है. कई बार मेरे ऑब्जर्वेशन मुझे खुश कर देते हैं, पर कई बार ये गलत भी होते हैं. शायद यही वजह थी कि बाद में मैंने साइकॉलजी को अपने सब्जेक्ट्स में शामिल किया और मैं धीरे-धीरे अभिनय की तरफ मुड़ गया.’

3. ‘अक्स’

 

मंच से परे विनीत कुमार
मंच से परे विनीत कुमार

जुलाई 2001 में रिलीज हुई फिल्म ‘अक्स’ स्टारकास्ट के लिहाज से शानदार फिल्म थी. अमिताभ बच्चन, मनोज बाजपेयी, नंदिता दास, विजय राज और केके रैना जैसे अभिनेताओं के साथ-साथ विनीत भी इस फिल्म का हिस्सा थे. ये एक सुपरनेचुरल थ्रिलर फिल्म है, जिसके किरदार बेहद पेचीदा हैं. देखिए इसमें विनीत के किरदार का एक अंश:

‘अक्स’ राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने डायरेक्ट की थी, जिसे क्रिटिक्स ने सराहा था. विनीत राकेश ओमप्रकाश के अलावा गोविंद निहलानी, प्रकाश झा, एसएस राजमौली और रामगोपाल वर्मा जैसे डायरेक्टर्स के साथ काम कर चुके हैं.

4. ‘शूल’

 

'शूल' के एक सीन में विनीत
‘शूल’ के एक सीन में विनीत

मनोज बाजपेयी को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित करने वाली फिल्मों में से एक ‘शूल’ में भी विनीत अहम भूमिका में थे. उनका किरदार एक पुलिस ऑफिसर ‘तिवारी जी’ का है, जो अपने कायरतापूर्ण रवैये के साथ-साथ कुछ मौकों पर मनोज को संभालने का काम करता है. ये विनीत के करियर की चुनिंदा फिल्मों में से एक है.

एनएसडी और थिएटर के बारे में विनीत उसी इंटरव्यू में बताते हैं, ‘मैंने हमेशा महसूस किया कि मुझे खुद को एक एक्टर के तौर पर ट्रेन करने की जरूरत है. एनएसडी में तीन साल मेरी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण तीन साल हैं. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत के अधिकांश लोग समझते ही नहीं है कि थिएटर क्या है.’

5. ‘कच्चे धागे’

 

फिल्म 'कच्चे धागे' में विनीत
फिल्म ‘कच्चे धागे’ में विनीत

फरवरी 1999 में रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘कच्चे धागे’ में विनीत पुलिस कॉन्स्टेबल भक्ता की भूमिका में हैं. अजय देवगन और सैफ अली खान की इस फिल्म में विनीत के अधिकतर दृश्य दिग्गज अभिनेता गोविंद नामदेव के साथ हैं, जो पुलिस ऑफिसर बने हैं. पूरी फिल्म के दौरान भक्ता को देखकर लगता है जैसे ये कोई साधारण किरदार है, जिसे जरूरत से ज्यादा तवज्जो दी जा रही है. लेकिन फिल्म के आखिर में विनीत की भूमिका बदलती है और वो चौंकाते हैं. देखिए एक नमूना:

विनीत के अभिनय की शुरुआत भी मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन, मानव कौल और नसीरुद्दीन शाह जैसे एक्टर्स की तरह रहा है. विनीत के घरवाले भी उनके अभिनय के खिलाफ थे. विनीत के बड़े भाई सुनीत कुमार बिहार में IPS अफसर हैं. विनीत बताते हैं, ‘जब मेरा बड़ा भाई IPS अफसर बन गया, तब मुझ पर भी अपना करियर प्लान करने का दबाव आ गया. उस समय मैं थिएटर कर रहा था, लेकिन अपने पिता को खुश करने के लिए मुझे लॉ कॉलेज जॉइन करना पड़ा. इससे मुझे सीरियस थिएटर करने के लिए और वक्त मिल गया.’

विनीत को दी लल्लनटॉप की तरफ से जन्मदिन की शुभकामनाएं.


ऑस्कर-2017 में नामांकित अन्य फिल्मों के बारे में यहां पढ़ेंः

1. “मूनलाइट”
2. “ला ला लैंड”
3. “मैनचेस्टर बाय द सी”
4. “हैकसॉ रिज”
5. “नॉक्टर्नल एनिमल्स”
6. “फेंसेज़”
7. “अराइवल”
8. “हैल ऑर हाई वॉटर”
9. “फ्लोरेंस फॉस्टर जेनकिन्स”
10. “लविंग”


 वीडियो- केसरी में अक्षय कुमार के अलावा क्या खास है, जान लीजिए

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