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लक्षद्वीप को अपने प्रशासक से क्या ख़तरा लग रहा कि इसे बचाने के लिए कैंपेन शुरू हो गया है?

लक्षद्वीप. अरब महासागर में बसा 36 द्वीपों का समूह. भारत का केंद्र शासित प्रदेश. यहां के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल (Praful Khoda Patel) से लोग नाराज हैं. इतने नाराज कि ट्विटर पर #SaveLakshadweep कैंपेन चल रहा है. कारण है दिसंबर, 2020 में उनकी नियुक्ति के बाद लिए गए फ़ैसले.

विवाद के केंद्र में हैं कुछ मसौदे. पहला है LDAR (Lakshadweep Development Authority Regulation 2021). हिन्दी में कहें तो लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन का मसौदा. दूसरा है असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम यानी कि PASA, तीसरा है पंचायत अधिसूचना का मसौदा और चौथा लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, 2021 का मसौदा. इसके अलावा भी कई और मुद्दे हैं. इन मुद्दों पर तफ़सील से बात करते हैं.

#SaveLakshadweep

ट्विटर पर 23 और 24 मई को SaveLakshadweep ट्रेंड कर रहा था. ज्यादातर लोग वहां पर लाए जा रहे एक नए क़ानून के मसौदे को रद्द करने की मांग कर रहे थे. इसमें ना सिर्फ़ लक्षद्वीप बल्कि पड़ोसी राज्य केरल से भी हज़ारों लोगों ने ट्वीट किया. कई लोगों ने लक्षद्वीप में प्रस्तावित क़ानूनी बदलावों की तुलना जम्मू-कश्मीर से भी कर दी.

लक्षद्वीप के करावत्ति द्वीप के स्थानीय निवासी शिहाज खां ने ट्वीट किया –

“विकास के नाम पर इनका छिपा हुआ एजेंडा है. अगर प्रशासक (प्रफुल्ल पटेल) यहां हमारी सेवा के लिए यहां आए हैं तो हम सभी पहले ही दिन से क्यों परेशान हैं? वे हमारी सेवा नहीं करना चाहते. उन्होंने इस जमीन को पैसा कमाने के लिए निशाना बनाया है. शुद्ध व्यापार.”

एक अन्य यूज़र ने लिखा –

“प्रशासक की राजनीतिक नियुक्ति हुई है. पहले कश्मीर में अमानवीय काम हुआ. अब बारी लक्षद्वीप की है. हमारे भाइयों के लिए खड़े हो जाओ.”

 

स्थानीय निवासी सुहा सको ने ट्वीट किया –

“लक्षद्वीप समूह के हम सभी लोगों को मदद की सख़्त ज़रूरत है. विकास के नाम पर हमारी जमीन हमसे छीनी जा रही है. कृपया इस अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज उठाने में हमारी मदद करें. #RevokeLDAR #SaveLakshadweep,”

मलयालम अभिनेता और निर्देशक पृथ्वीराज सुकुमारन ने इस कैंपेन को सपोर्ट किया है. उन्होंने एक ट्वीट में लक्षद्वीप से जुड़ी अपनी बचपन की यादों का ज़िक्र किया और सत्ता प्रशासन से ये अपील की कि लोगों को हो रही समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए.

छात्रों के संगठन स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI), भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) की केरल शाखा, केरल छात्र संघ भी इस कैंपेन का हिस्सा बने. वहीं केरल छात्र संघ के ट्विटर अकाउंट को कथित तौर पर SaveLakshadweep हैशटैग के समर्थन में ट्वीट करने के लिए निलंबित कर दिया गया था, ऐसा उनका दावा है.

प्रशासक ही कर्ताधर्ता

लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली और दमन एवं दीव, चंडीगढ़ और लद्दाख, चार ऐसे केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां चुनी हुई राज्य सरकारें नहीं हैं. यहां प्रशासक ही सरकार में सबसे बड़ा पद है. वहीं चंडीगढ़ प्रशासन का दायित्व पंजाब के राज्यपाल के पास है. लद्दाख में उपराज्यपाल का पद होता है. दिल्ली, पुद्दचेरी और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भी हैं और उपराज्यपाल भी होते हैं. प्रफुल खोड़ा पटेल को 26 जनवरी 2020 को दादरा और नगर हवेली और दमन एंड दीव का प्रशासक बनाया गया था.

विवाद की चार वजह

पहला विवादित मसौदा है लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन (LDAR). इसे जनवरी, 2021 में पेश किया गया था. ये मसौदा प्रशासक को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से जुड़े काम के लिए स्थानीय बाशिंदों को उनकी जगह या ज़मीन से हटाने या कहीं और विस्थापित करने की ताक़त देता है. इसके तहत किसी भी तरह की अचल संपत्ति विकास कार्य के लिए दी जा सकती है.

दूसरा है PASA, (Prevention of Anti-Social Activities Act) जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को सरकार एक साल के लिए हिरासत में ले सकती है, बिना कोई सार्वजनिक जानकारी जारी किए.

तीसरा है पंचायत अधिसूचना का मसौदा, जिसके मुताबिक़ किसी भी दो से अधिक बच्चों वाले पंचायत सदस्य को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा, ना ही किसी ऐसे व्यक्ति को चुनाव लड़ने की इजाज़त होगी.

इकाले के NCP सांसद मोहम्मद फ़ैज़ल ने इस को “असंवैधानिक करार दिया है. जबकि केरल से CPM के सांसद एलामरम करीम ने भी राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को चिट्ठी लिखी है. उन्होंने लक्षद्वीप में प्रशासक के ‘अथॉरिटेरीयन’ शासन के बारे में शिकायत की. आसान शब्दों में कहें तो दबंगई के ख़िलाफ़ राष्ट्रपति से शिकायत की है.

चौथी वजह लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, 2021 का मसौदा है जिसे 25 फरवरी को जनता की प्रतिक्रिया लेने के लिए जारी किया गया था. इस मसौदे के मुताबिक़ किसी भी जानवर को मारना बहुत मुश्किल हो सकता है. किसी भी पशु को मारने से पहले उसका फिटनेस सर्टिफिकेट लेना ज़रूरी होगा. इसी मसौदे की धारा 5(2) के अनुसार, यदि पशु गाय, गाय का बछड़ा, बैल है तो फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दी जाएगी. इन तीन जानवरों के अलावा कोई भी अन्य जानवर जिसका इस्तेमाल कृषि कार्यों, प्रजनन या दूध देने और बच्चा पैदा करने के लिए होता है तो उसका भी फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा. साथ ही धारा 5(2) में इन सभी उल्लेख किए गए पशुओं को मारने के लिए कहीं ले जाना सख़्त मना है. यदि कोई व्यक्ति ऐसे जानवर को ले जाते हुए पाया जाता है, तो यह साबित करना होगा कि वो उस जानवर को मारने के लिए नहीं ले जा रहा है.

इसी मसौदे की धारा 8 में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बीफ या बीफ से बनी चीजों को किसी भी रूप में बेचने, रखने, स्टोर करने या कहीं ले जाने की इजाज़त नहीं है. बीफ के ले जाने के लिए इस्तेमाल हुए वाहनों को ज़ब्त किया जा सकता है. गाय की हत्या पर कम से कम 10 साल की जेल और उम्र कैद तक की सजा और 5 लाख रुपये का जुर्माना है. गोमांस प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों को न्यूनतम सात साल की जेल की सजा हो सकती है.

 

आदिवासी मुस्लिम आबादी ज़्यादा

2011 के जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक 64 हज़ार की आबादी वाले लक्षद्वीप को अगर धर्म के आधार पर देखें तो वहां 96.58 फीसदी मुसलमान हैं. जनसंख्या को जाति के आधार पर देखें तो 94.8 फीसदी आदिवासी भी हैं. इन आंकड़ों से ये साफ है कि ज़्यादातर आबादी आदिवासी मुसलमानों की है. यहां सबसे ज़्यादा बोले जाने वाली भाषा मलयालम है. केरल और लक्षद्वीप में बीफ खाने का प्रचलन है. राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी में CPM सांसद करीम दावा करते हैं कि प्रफुल पटेल ने लक्षद्वीप के लोगों की ‘पारंपरिक और सांस्कृतिक विविधता को नष्ट करने’ के लिए ये कदम उठाए हैं. वो आगे कहते हैं कि शराब पर प्रतिबंध हटाने सहित कई अन्य ऐसे फैसले पटेल ने लिए हैं, जिससे लोग आहत हुए हैं. दरअसल लक्षद्वीप इकलौता ऐसा केंद्र शासित प्रदेश था, जहां शराब के सेवन पर प्रतिबंध था. 36 द्वीपों में से सिर्फ एक द्वीप बंगारम में शराब पर प्रतिबंध नहीं था. हालांकि प्रफुल पटेल की नियुक्ति के बाद ये प्रतिबंध हटा दिया गया.

प्रफुल पटेल का क्या कहना है?

वहीं प्रफुल पटेल इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हैं. वेबसाइट ‘द प्रिंट’ से बातचीत में उन्होंने LDAR के मसौदे पर कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के विकास के लिए इसे पेश किया जा रहा है. उन्होंने विकास कार्यों के लिए ली जा रही अपनी जमीन को लेकर लोगों की चिंता को ‘गलत और दूसरे लोगों का एजेंडा’ करार दे दिया. उन्होंने आगे कहा, ‘मेरा एकमात्र एजेंडा लक्षद्वीप का विकास है.” उन्होंने लक्षद्वीप की पर्यटन क्षमता की तुलना मालदीव से की और सवालिया अंदाज में कहा –

“ऐसा क्यों है कि लोग मालदीव जाने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन लक्षद्वीप आने को भी तैयार नहीं हैं? पर्यटन को विकसित करने और लंबे समय में लोगों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए हमने LDAR की शुरुआत की है.”

लक्षद्वीप के प्रशासक पटेल ये भी कहते हैं कि अगर लोगों ने कुछ भी गलत नहीं किया है तो उन्हें PASA के बारे में चिंतित नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा,“केवल अपराध करने वालों को सज़ा दी जाएगी, दूसरों के लिए यह कोई मुद्दा नहीं होना चाहिए. देश के बाकी हिस्सों में, भारतीय दंड संहिता के तहत धारा 302 किसी कारण से है.”

कोविड केस भी बढ़े

इसका अलावा लक्षद्वीप में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के लिए भी लोग और विपक्षी पार्टियों के नेता प्रफुल पटेल को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. 24 मई के आंकड़ों के मुताबिक़ लक्षद्वीप में कोरोना वायरस के 6,487 मामले दर्ज हुए हैं. अब तक 24 लोग मारे गए हैं. जनवरी महीने में कोविड-19 का पहला मामला दर्ज हुआ था. लेकिन उससे पहले ये एक कोविड फ्री इलाका था.

इसके लिए स्थानीय सांसद मोहम्मद फैसल सीधा पटेल को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. क्योंकि उनके मुताबिक़ दिसंबर-2020 में कड़े क्वॉरंटीन नियमों में ढील देने की वजह से ऐसा हुआ है. वहीं प्रशासन के अधिकारी दावा करते हैं कि ये आर्थिक गतिविधियों के फिर से शुरू होने के कारण हुआ है.

लक्षद्वीप कुल तीन जगहों से जाया जा सकता है. केरल में कोच्चि और कोझीकोड और कर्नाटक में मंगलुरू से. दिसंबर, 2020 से पहले के क्वारंटीन नियमों के तहत यात्रियों को RT-PCR टेस्ट लेने से पहले कोच्चि, कोझीकोड और मंगलुरू में लक्षद्वीप प्रशासन द्वारा संचालित गेस्ट हाउस में सात दिनों के लिए रखा जाता था. और लक्षद्वीप में पहुंचने के बाद भी उन्हें और 14 दिन क्वारंटीन में गुजारने होते थे. हालांकि, दिसंबर, 2020 में जारी किए गए नए नियमों के मुताबिक लक्षद्वीप में प्रवेश करने के लिए ICMR द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी लैब से एक नेगेटिव RT-PCR रिपोर्ट की ज़रूरत है.

कौन हैं प्रफुल खोड़ा पटेल?

प्रफुल खोड़ा पटेल, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार में 21 अगस्त 2010 से 17 दिसंबर 2012 तक गृह राज्य मंत्री रह चुके हैं. उन्होंने अमित शाह की जगह ली थी. शाह उस वक्त सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में जेल में थे.

2016 में पटेल को दमन-दीव और दादरा और नगर हवेली का प्रशासक बनाया गया. लक्षद्वीप के पूर्व प्रशासक दिनेश्वर शर्मा के निधन के बाद दिसंबर 2020 में पटेल को लक्षद्वीप का प्रशासक बनाया गया था. पड़ोसी राज्य केरल से राज्यसभा सांसद एलामरम करीम कहते हैं –

“2014 तक आम तौर पर प्रशासक पूर्व IAS अफसर या सिविल सर्वेंट हुआ करते थे, लेकिन 2014 के बाद से BJP ने सिर्फ राजनीतिक नियुक्तियां की हैं.”

फरवरी 2021 में दादरा और नगर हवेली के निर्दलीय सांसद मोहन डेलकर ने मुंबई के एक होटल में आत्महत्या कर ली थी. उनके 15 पन्नों के सुसाइड नोट में कथित तौर पर पटेल को उनकी मौत के लिए ज़िम्मेदार बताया गया था.  मोहन डेलकर सात बार सांसद रह चुके थे. वे बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टी के साथ जुड़े रहे थे.

डेलकर के बेटे अभिनव ने महाराष्ट्र पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि पटेल ने उनके पिता से 25 करोड़ रुपये मांगे थे या उनपर असामाजिक गतिविधि रोकथाम अधिनियम (PASA) के तहत झूठा मुकदमा लगाने की बात कही थी, इसी मामले को लेकर अभिनव से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी मुलाक़ात की थी. जिसके बाद मुंबई पुलिस ने मार्च में पटेल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी और महाराष्ट्र सरकार ने भी आत्महत्या की जांच के लिए एक विशेष जांच कमेटी का गठन किया था.

कन्नन गोपीनाथन से विवाद

पटेल का पूर्व IAS अधिकारी कन्नन गोपीनाथन से भी विवाद रह चुका है. पटेल ने गोपीनाथन को एक कारण बताओ नोटिस दिया था. उसमें कहा गया था कि गोपीनाथन का व्यवहार ‘एक अधिकारी के लिए अशोभनीय’ था. इस पर स्पष्टीकरण मांगा कि उनका आचरण उनकी वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट में क्यों नहीं दिखाया जाना चाहिए.

पूर्व आईएस अफसर कन्नन गोपीनाथन
पूर्व आईएस अफसर कन्नन गोपीनाथन, फ़ाइल फ़ोटो

गोपीनाथन 2019 के लोकसभा चुनाव में दादरा और नगर हवेली के लिए रिटर्निंग ऑफिसर भी थे. तब गोपीनाथन ने दादरा और नगर हवेली के मुख्य चुनाव अधिकारी से शिकायत की, जिसमें उन्होंने पटेल द्वारा उन पर दिए जा रहे दबाव का ज़िक्र किया था. सीईओ ने बदले में इसे चुनाव आयोग के पास भेज दिया, जिसने पटेल से कारण बताओ नोटिस वापस लेने को कहा.

2019 के लोकसभा चुनावों से पहले, चुनाव आयोग ने पटेल को निर्देश दिया था कि वे दादरा और नगर हवेली के तत्कालीन कलेक्टर कन्नन गोपीनाथन को विभिन्न आधिकारिक कार्यों पर उनके निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए जारी नोटिस को वापस लें. गोपीनाथन जो दादरा और नगर हवेली के बिजली, शहरी विकास और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभागों के सचिव के रूप में कार्यरत थे, उन्होंने अगस्त 2019 में नौकरी से इस्तीफा दे दिया था.


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