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'क्या इस वीडियो में आप हैं?' Facebook Messenger के इस लिंक पर क्लिक किया नहीं काम तमाम!

सोशल मीडिया हैक करने का नया तरीका निकाला है अपराधियों ने.

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सायबर ठग फ़ेसबुक मैसेंजर से ठगी का रास्ता निकाल रहे.

'क्या इस वीडियो में आप हैं?' Facebook Messenger पर दोस्त या जान पहचान वाले से मिला ऐसा कोई मैसेज आपका फ़ेसबुक अकाउंट हैक करवा सकता है. हां जी, ये सच है. सायबर ठगों ने फ़ेसबुक अकाउंट में सेंध लगाने का नया तरीका निकाल लिया है. बहुत सारे लोगों को ऐसे मैसेज आ रहे हैं. इधर आपने लिंक पर क्लिक किया नहीं उधर काम तमाम. दिक्कत वाली बात ये है कि मैसेज आपके दोस्त के अकाउंट से आएगा. मतलब आपके साथ आपके दोस्त का अकाउंट भी हैकर्स के हत्थे चढ़ चुका है. क्या है इस वीडियो में और बचने का कोई तरीका है भी या नहीं, इसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.      

सोशल मीडिया रहस्यमय हो जाए

सोशल मीडिया टाइमलाइन या फ़ीड पर कोई ऐसी पोस्ट नजर आने लगे जो आपकी नहीं है, लेकिन आप जैसी लगे, बीच पर खड़े होकर हाथ में शराब का गिलास लिए आपकी फोटो दिखे, लेकिन वो आपकी नहीं हो तो अपने आंख-कान खोल लें. ऐसे पोस्ट पर कई बार ये भी लिखा होता है कि कहीं ये आप तो नहीं. पोस्ट की जगह लिंक या यूआरएल (URL) का भी इस्तेमाल होता है, जैसा आजकल आने वाले मैसेज के साथ हो रहा है. 

अब फोटो एडिट करना कौन सा बड़ा काम है. चिपका दी आपकी फोटो किसी और पर. पोस्ट से अलग डायरेक्ट मैसेज (DM) में उल्टे-सीधे या लुभावने संदेश नजर आने लगे तो संकेत साफ है, आप फिशिंग के शिकार बनने वाले हैं. फिशिंग दरअसल सायबर वर्ल्ड में ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाला सबसे कॉमन शब्द है. वैसे ये अकेला तरीका नहीं है और भी तरीके हैं. जैसे हैकिंग, मतलब आपके लैपटॉप या स्मार्टफोन की सुरक्षा में सेंध लगाना या फिर मालवेयर के सहारे घुसपैठ करना. किसी और कंपनी के सर्वर में चोरी करके भी आपका निजी डेटा उड़ाया जा सकता है. 

साफ शब्दों में कहें तो सायबर अपराधियों ने पचासों तरीके निकाल रखे हैं आपके सोशल मीडिया अकाउंट से लेकर बैंक अकाउंट तक पहुंचने के. अभी जो तरीका इस्तेमाल हो रहा है, उसको कहते हैं आइडेंटिटी थेफ्ट. बोले तो किसी और कि पहचान चुराकर उसको अपने काम के लिए इस्तेमाल करना.

क्या है ये आइडेंटिटी थेफ्ट?

ऊपर बताए किसी भी तरीके से हैकर्स आपके अकाउंट में सेंध लगा सकते हैं. अब एक बार जो आपका स्मार्टफोन, लैपटॉप या सोशल मीडिया इनके हाथ लगा नहीं कि आपकी पूरी जन्म कुंडली इनके पास पहुंच जाती है. फिर वो आपके फोन से मैसेज भेजे या ईमेल करे, उसकी मर्जी. अब आपकी पहचान पर है एक अपराधी का कब्जा. इसको कहते हैं आइडेंटिटी थेफ्ट. सोचिए, आपको लिंक आए आपके दोस्त से या पहचान वाले से तो एक बारगी आपने सब ठीक ही लगेगा. लेकिन ध्यान रखिए ऐसी किसी भी लिंक पर क्लिक किया नहीं और आपके सारे लिंक सायबर ठगों के पास पहुंच जाएंगे.

हैकिंग से बचना कैसे है?

एक शब्द है सावधानी. बस वही बनाए रखनी है. अपने आंख और कान खुले रखिए. ऐसा कोई लिंक दिखे तो सीधे अपने दोस्त को फोन घुमा डालिए. सब पता चल जाएगा. पासवर्ड रखना है मजबूत और हर ऐप पर 2FA, बोले तो टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन इनेबल रखना है. एक बात का विशेष ख्याल रखिए. अगर लिंक https से स्टार्ट नहीं हो रहा तो समझ जाइए बड़ा वाला झोल है. इतना सब करने के बाद भी अगर अकाउंट हैक हुआ है तो घबराइए नहीं. हर सोशल मीडिया ऐप का हेल्पलाइन है जो आपकी मदद करेगा. आप सायबर पुलिस की भी मदद ले सकते हैं.

वीडियो: अब आपके स्मार्टफोन को गूगल और ऐप्पल ठीक करेंगे!!

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