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दिल जीत लेने वाले आईफोन बॉक्स की कहानी जान स्टीव जॉब्स को सलाम करेंगे

आईफोन के बॉक्स में भी दिखता है स्टीव जॉब्स का जुनून.

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iPhone के बॉक्स की कहानी. (तस्वीर: ट्विटर)

फोन के बॉक्स में क्या रखा है? वही बॉक्स जिसका इस्तेमाल होता ही नहीं. एक बार खोला, फोन बाहर निकाला और फिर रख दिया कहीं ओटले पे. कभी जो फोन खराब हुआ या बेचा तो बेचारे की धूल झाड़ दी. ज्यादातर लोगों के लिए मोबाइल बॉक्स की कहानी इतनी ही है. लेकिन स्टीव जॉब्स के लिए तो बिल्कुल नहीं. ऐप्पल के फाउंडर ने पहला आईफोन लॉन्च करने से पहले उसके बॉक्स के 200 से ज्यादा पेटेंट लिए. अपने इंजीनियर्स के साथ घंटों मीटिंग की. एक स्पेशल रूम बनाया जिसमें सिर्फ कुछ लोग जा सकते थे. क्यों...हमसे जान लीजिए.

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परफेक्शन का उदाहरण

परफेक्शन शब्द की परिभाषा हर किसी के लिए अलग-अलग हो सकती है. बहुत से गुणीजन तो इस शब्द पर भरोसा ही नहीं करते. लेकिन शायद स्टीव जॉब्स को इसके करीब पहुचने का जुनून था. उन्होंने आईफोन और आइपैड बनाने के लिए तो मेहनत की ही, लेकिन यूजर्स के अनबॉक्सिंग अनुभव को भी बेहतरीन बनाने पर पूरी ताकत झोंक दी. फेमस टेक एक्सपर्ट Trung Phan के मुताबिक, ऐप्पल ने 2007 में आईफोन को बाजार में उतारने से पहले ही 200 से ज्यादा पेटेंट हासिल कर लिए थे. 

आप में से जिसने भी कभी ऐप्पल प्रोडक्ट, खासकर आईफोन का बॉक्स ओपन किया होगा तो उसे एक विशेष अनुभव हुआ होगा. बॉक्स को ओपन करने पर जैसे ही ऊपर के हिस्से को उठाते हैं तो नीचे का हिस्सा अपने आप आहिस्ता से नीचे आता है. दोनों बॉक्स के बीच एक किस्म की एयर होने का भी अहसास होता है. जिन्होंने बॉक्स ओपन किए हैं वो इसको और अच्छे से बयान कर सकते हैं. अगर आपने किया तो हमसे जरूर साझा करें, और नहीं किया तो अपने यार, मित्र, सखा, दोस्त, बंधु से इसके बारे में पूछें. 

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लेकिन ये अपनेआप नहीं होता बल्कि इसके पीछे स्टीव का दिमाग है.

स्टीव जॉब्स की घंटों की मेहनत

Trung Phan के बाद स्टीव जॉब्स की बायोग्राफी लिखने वाले Walter Isaacson के मुताबिक स्टीव जॉब्स और ऐप्पल के चीफ डिजाइन ऑफिसर Jony Ive ने अनगिनत घंटे सिर्फ इस बात पर खर्च किए कि फोन की पैकिंग कैसी होगी. जॉनी को प्रोडक्ट की अनपैकिंग बहुत पसंद थी और वो इसका अनुभव अपने यूजर्स के साथ बांटना चाहते थे.

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बॉक्स वाला रूम

फॉर्च्यून मैगजीन के एग्जीक्यूटिव एडिटर Adam Lashinsky अपनी किताब ‘Inside Apple’ में इस कमरे का ब्योरा देते हैं. उनके मुताबिक ऐप्पल के हेडक्वार्टर में एक खुफिया कमरा है जिसमें सिर्फ कुछ लोगों को जाने की इजाजत है. Adam के शब्दों में,

ऐप्पल अपने यूजर्स के हर छोटे से छोटे अनुभव के लिए कितनी गंभीर है इसका पता इस बात से चलता है कि इस रूम के अंदर महीनों तक एक पैंकिंग डिजाइनर सिर्फ बॉक्स ओपन करने का काम करता है.

बोले तो इसके लिए बाकायदा पैंकिंग डिजाइनर नाम की पोस्ट है कंपनी में.  

एडम के मुताबिक कंपनी का मानना है हर यूजर आईफोन का इस्तेमाल भले ना करे, लेकिन अगर वो इसका बॉक्स ही ओपन करता है, तो उसे एक शानदार अनुभव मिलना चाहिए. ये बॉक्स पहले पतले प्लास्टिक में लिपटे होते थे. उसका भी एक तयशुदा पैटर्न था. आजकल भले पेपर लॉक सिस्टम आता है. लेकिन इसमें भी कितने खांचे होंगे वो पहले से तय होता है. इसलिए इनको भी खींचते समय एक विशेष किस्म का साउंड आता है.

अब स्टीव और उनके बाद टिम कुक आईफोन के साथ परफेक्शन पर पहुंचे या नहीं, ये आप तय कीजिए. लेकिन एक पैकिंग बॉक्स के लिए इतना कुछ, शायद इसलिए ऐप्पल मोबाइल तकनीक की दुनिया में सबसे बड़ा नाम है.

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