भारतीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया (Mansukh Mandviya) ने 6 जनवरी को एलान किया कि 14 फरवरी से भारत की फर्स्ट डिविजन लीग इंडियन सुपर लीग (ISL) की शुरुआत होगी. एलान करते हुए मनसुख ने कहा कि इस लीग में 11 क्लब हिस्सा लेंगे. हालांकि, इन क्लब का नाम लेते हुए खेल मंत्री से एक गलती हो गई, जिसे लेकर लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया है. यहां तक की ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि यह बंगाल का तिरस्कार है.
मोहन बागान को 'बैंगन' बोल बुरी तरह ट्रोल हुए खेल मंत्री, TMC ने 'बाहरी' तक कह दिया
खेल मंत्री Mansukh Mandviya ने AIFF और ISL क्लबों के बीच साई हेडक्वाटर में हुई बैठक के बाद मीडिया से बात की थी. उन्होंने यहां ISL केे फिर से शुरू होने का एलान किया था.
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मांडविया ने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) और ISL क्लबों के साथ साई हेडक्वाटर में हुई बैठक के बाद मीडिया को बताया,
इंडियन सुपर लीग 14 फरवरी से होगी, जिसमें सभी क्लब भाग लेंगे. सरकार, AIFF और मोहन बागान तथा ईस्ट बंगाल समेत सभी 14 क्लबों के प्रतिनिधियों की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया कि लीग 14 फरवरी से शुरू होगी और सभी क्लब भाग लेंगे .
इस दौरान मनसुख ने बागान को 'बेंगन' कहा. वहीं, ईस्ट बंगाल को ईस्ट 'बेंगन' कहा. इसके बाद, उनके साथ बैठे शख्स ने उन्हें सही उच्चारण बताया, जिसके बाद खेल मंत्री ने फिर से नाम कहे. हालांकि, उनकी इस गलती के बाद लोग उनके पीछे पड़ गए हैं.
यूजर्स ने क्या-क्या लिखा?ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने आधिकारिक अकाउंट पर कहा,
नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया बंगाल के सौ साल पुराने प्रतिष्ठित फुटबॉल क्लब के नाम भी उचित सम्मान के साथ नहीं बोल पाते.
यह "मोहन बैंगन" नहीं, बल्कि "मोहन बागान" है.
यह "ईस्ट बैंगन" नहीं, बल्कि "ईस्ट बंगाल" है.
ये क्लब बंगाल की संस्थाएं हैं, और इसलिए बांग्ला-बिरोधी ताकतों की नज़र में ये केवल तिरस्कार और उपेक्षा के पात्र हैं.
फुटबॉल बंगाल के खून में है. हम इसे जीते हैं, सांस लेते हैं, इसे अपनी जान से भी ज़्यादा प्रिय मानते हैं. लेकिन, बंगाल को हमेशा तिरस्कार की नज़र से देखने वाले ये बाहर वाले इसे कभी नहीं समझेंगे.
हम प्रधानमंत्री को सुझाव देते हैं कि वे 17 जनवरी को राज्य के अपने निर्धारित दौरे से पहले कुछ बुनियादी बंगाली भाषा सीख लें, अन्यथा हमारी धरती पर वोट मांगते समय उन्हें और अधिक अपमान का सामना करना पड़ेगा.

एक यूजर मनोज रिझवानी ने लिखा,
बाप रे, ऐसे खेल मंत्री के साथ भारत ओलंपिक की मेजबानी करने की उम्मीद कर रहा है.

नजमस सायादत नाम के यूजर ने लिखा,
क्या यह असली आवाज है? मैं यह नहीं मान सकता कि खेल मंत्री देश के सबसे बड़े स्पोर्ट्स का क्लब के नाम का उच्चारण नहीं कर सकते.

सुराजीत नाम के यूजर ने लिखा,
क्या यह हमारे खेल मंत्री हैं? जो क्लब के नाम का उच्चारण भी नहीं कर सकते? सच में?

श्रीनजॉय देबनाथ नाम के यूजर ने लिखा,
खेल मंत्री देश के सबसे बड़े और 100 साल पुराने क्लब के नाम का उच्चारण नहीं कर सकते. यह दिखाता है कि भारत में फुटबॉल के हालात ऐसे क्यों है.

ISL के साथ शुरू होगी आई लीग
AIFF अध्यक्ष कल्याण चौबे ने बताया कि ISL के अलावा आई लीग भी उसी समय शुरू होगी. उन्होंने कहा,
ISL को चलाने के लिए गर्वनिंग काउंसिल बोर्ड का गठन होगा जो सारे फाइनेनशियल फैसले लेगा. आईएसएल में 14 टीमों के 91 मैच एक चरण में होम (घरेलू) और अवे (प्रतिद्वंद्वी टीम का घरेलू मैदान) आधार पर खेले जायेंगे. आई लीग में 11 टीमों के बीच 55 मैच खेले जाएंगे जो आईएसएल के साथ ही आरंभ होगी.
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चौबे ने कहा कि मैच कहां होंगे, यह क्लब AIFF के साथ मिल कर तय करेंगे. उन्होंने बताया कि ISL के संचालन लिए 25 करोड़ रुपये का पूल बनाया गया है, जिसमें 10 प्रतिशत AIFF, 15 प्रतिशत क्लब, 30 प्रतिशत व्यावसायिक साझेदार होंगे. ISL 2025-26 का आयोजन अधर में लटक गया था. AIFF के फाइनेनशियल साझेदार रिलायंस समूह के FSDL ने ‘मास्टर्स राइट एग्रीमेंट’ (MRA) को लेकर अनिश्चितता के कारण जुलाई में इसे स्थगित कर दिया था. MRA 8 दिसंबर 2025 को खत्म हो गया और बातचीत का भी कोई नतीजा नहीं निकला.
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