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एक हाथ, एक पसली और एक पैर से भारत ने कैसे बेस्ट पेस अटैक को रुलाया?

छलनी होकर भी सिडनी में टीम इंडिया ने घुटने नहीं टेके.

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रविचन्द्रन अश्विन, हनुमा विहारी, ऋषभ पंत. फोटो: AP
तीसरे दिन के आखिरी सेशन के बाद से ही हारे हुए मैच को भारत ने ड्रॉ कर बचा लिया है. बल्लेबाज़ों के शानदार खेल के साथ टीम इंडिया ने सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर इतिहास रच दिया है. चार मैचों की टेस्ट सीरीज़ का तीसरा मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ है. जिसकी वजह से सीरीज़ 1-1 की बराबरी पर ही मौजूद है.
इस जीत के बाद भारतीय टीम की तारीफ की असली वजह है. उसके चोटिल खिलाड़ियों का दिखाया गया जुझारूपन. भारतीय टीम ने सिडनी टेस्ट की दूसरी पारी में 334/5 रन बनाए. लेकिन इस पारी में जिन सात बल्लेबाज़ों ने बल्लेबाज़ी की. उनमें से तीन बल्लेबाज़ बुरी तरह से चोटिल थे. जबकि खेने के लिए आने वाले चौथा बल्लेबाज़ भी चोट से जूझ रहा था.
किसी के हाथ में चोट थी, तो किसी की पसलियां घायल थीं, कोई एक पैर पर खेल रहा था तो कोई टूटे अंगूठे के साथ पारी का इंतज़ार कर रहा था. भारतीय टीम इस पारी में बुरी तरह से छलनी थी. ऐसे में इस जीत की तारीफ होना लाज़मी है. आइये आपको बताते हैं कि किस खिलाड़ी ने किस चोट के बावजूद कैसा प्रदर्शन किया: # ऋषभ पंत: सिडनी टेस्ट की जब भी बात आएगी ऋषभ पंत का नाम कभी नहीं भुलाया जाएगा. पंत को उनकी पोज़ीशन चेंज़ करके नंबर पांच पर बैटिंग के लिए भेजा गया. लेकिन जो मैच हारा हुआ लग रहा था. पंत ने उस मैच को भारत की तरफ मोड़ दिया. करोड़ों को हिन्दुस्तानियों को जीत दिखने लगी. उन्होंने सिर्फ 118 गेंदों में 97 रनों की पारी खेली.
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ऋषभ पंत की चोट: फोटो: AP

इस पारी की खास बात ये है कि पंत को मैच के तीसरे दिन ही कोहनी में चोट लगी थी. जिसके बाद वो विकेटकीपिंग भी नहीं कर पाए थे. लेकिन उन्होंने आखिरी दिन शानदार खेल दिखाकर टीम इंडिया की हार का डर दूर कर दिया.
# हनुमा विहारी: चाय के बाद आते ही ऋषभ पंत आउट हुए तो हनुमा विहारी की एंट्री हुई. सबकी उम्मीदें टूट चुकी थीं. क्योंकि विहारी बहुत अच्छी फॉर्म में नहीं थे. आते ही एक रन लेने की कोशिश में विहारी को हेमस्ट्रिंग इंजरी हो गई. सबको लगा अब वो गए. लेकिन विहारी मैदान पर डटे रहे. और डटे भी ऐसे कि पूरे चार घंटे तक बैटिंग कर ऑस्ट्रेलियन गेंदबाज़ों को फ्रस्ट्रेट कर दिया.
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हनुमा विहारी की चोट. फोटो: AP

उन्होंने मैच की ज़रूरत के हिसाब से 161 गेंदें खेलीं और 23 रन बनाकर नॉट-आउट लौटे. लेकिन इस मुकाबले में रनों का उतना महत्व नहीं था. जितना की क्रीज़ पर समय बिताकर मैच बचाने का था.
# रविचन्द्रन अश्विन: सिडनी टेस्ट में अश्विन ने गेंद से सिर्फ दो विकेट चटकाए. लेकिन दिन के आखिरी सेशन में जब लंबा खेल बचा था तो उनकी मैदान पर बल्ले के साथ एंट्री हुई. अश्विन को आते ही पसलियों में गेंद लगी. जिसके बाद फिज़ियो ने उनकी जांच की. अश्विन काफी दर्द में थे. लेकिन इसके बाद भी रिब गार्ड लगाकर उन्होंने बल्लेबाज़ी जारी रखी. अश्विन ने ऐसी ऐतिहासिक पारी खेली जिसने ऑस्ट्रेलियाई टीम के सपने को तोड़ दिया.
अश्विन ने इस पारी में साढ़े तीन घंटे से ज़्यादा का समय बिताया और 128 गेंदों का सामना किया. उन्होंने नॉट-आउट 38 रन भी बनाए. वो ऐसी परिस्थिति में मैदान पर डटे रहे जब उनका साथी खिलाड़ी एक रन भी नहीं ले पा रहा था.
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अश्विन की चोट. फोटो: AP

अश्विन आज सुबह खेल से पहले ठीक से झुक भी नहीं पा रहे थे. उनकी कमर में बीते दिन के बाद से ही तकलीफ थी. लेकिन फिर भी उन्होंने आखिरी दिन गज़ब का जुनून दिखाया.
ये तीनों तो वो प्लेयर्स रहे. जिन्होंने मैदान पर आकर अपने खेल से अपनी चोट के दर्द को भुला दिया. इनके अलावा भी रविन्द्र जडेजा टूटे अंगूठे के साथ बल्लेबाज़ी करने के लिए तैयार थे. वो लगातार ड्रेसिंग रूम से अपनी पारी का इंतज़ार कर रहे थे.
भारतीय खिलाड़ियों के इसी ज़ज़्बे की वजह से सिडनी टेस्ट को भारत के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा. इस मुकाबले की वजह से भारत अब भी सीरीज़ में 1-1 की बराबरी पर है.

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