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ऋषभ पंत के फैंस खुद से पूछ रहे होंगे- हम करें तो करें क्या!

आसान नहीं है इस दुनिया में 'पंत पंथी' होना.

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Sydney Test में Rishabh Pant ने Will Pucovski को लगातार दो जीवनदान दिए (ट्विटर/BCCI)
ऋषभ पंत. भारतीय क्रिकेट का भविष्य. एक वक्त में धोनी के उत्तराधिकारी माने गए पंत का करियर तेजी से उल्टी दिशा में जा रहा है. अपनी बैटिंग के लिए अक्सर तारीफें बटोरने वाले पंत विकेटकीपिंग में ब्लंडर पर ब्लंडर किए जा रहे हैं. अक्सर ही वह विकेट के पीछे अपने खराब प्रदर्शन के लिए ट्रोल होते हैं. ऐसे तमाम मौके हैं जब लोगों ने उनकी कीपिंग देख मैदान में ही धोनी-धोनी के नारे तक लगा दिए. विकेट के पीछे उनकी नाकामी के चलते ही टेस्ट टीम में ऋद्धिमान साहा को अक्सर वरीयता मिलती है. लिमिटेड ओवर्स टीम से तो पंत का पत्ता पूरी तरह साफ हो ही चुका है. लेकिन इसके बाद भी पंत की कीपिंग में कुछ खास सुधार होता नहीं दिख रहा. # Pant की गलतियां सिडनी टेस्ट के पहले दिन भी उन्होंने विकेट के पीछे गलतियां की जिससे भारत को नुकसान हुआ. उन्होंने डेब्यू कर रहे ओपनर विल पुकोव्स्की को लगातार दो जीवनदान दिए. पहली बार तो पंत ने पारी के 22वें ओवर में पुकोव्स्की का कैच गिराया. ओवर की आखिरी बॉल पड़कर ड्रिफ्ट हुई. पुकोव्स्की आगे आए लेकिन बॉल टर्न होने की जगह डिप हो गई. डिप होने के साथ बॉल ने उनके बल्ले का मोटा किनारा लिया और सीधे पंत के दस्तानों की ओर बढ़ चली. लेकिन पंत बॉल को संभाल नहीं पाए और कैच गिरा दिया. इस वक्त पुकोव्स्की सिर्फ 26 रन पर खेल रहे थे. इसके थोड़ी ही देर बाद पंत को एक मौका और मिला. पारी का 25वां ओवर. सिराज ने अपने ओवर की इस आखिरी बॉल को शॉर्ट रखा. पुकोव्स्की ने अक्रॉस जाते हुए इसे पुल करने की कोशिश की. बॉल उनके ग्लव्स को छूती हुई विकेट के पीछे निकल गई. पंत ने अपने पीछे भागकर छलांग मारी. पहले प्रयास में उनके ग्लव्स में आई बॉल हाथ से छिटकी और पंत अपने दूसरे प्रयास में इसे कलेक्ट नहीं कर पाए. पंत समय रहते अपने ग्लव्स बॉल के नीचे नहीं ला पाए और कैच गिर गया. पुकोव्स्की फिर बच गए. पुकोव्स्की ने पंत से मिले इन दोनों जीवनदानों का पूरा फायदा उठाया. अंत में वह 62 रन बनाकर आउट हुए. उन्हें भारतीय डेब्यूटांट नवदीप सैनी ने LBW आउट किया. आउट होने से पहले उन्होंने मार्नस लाबुशेन के साथ 100 रन की पार्टनरशिप की. पंत की खराब कीपिंग देखते ही देखते ट्विटर पर ट्रेंड होने लगी. और इतिहास गवाह है कि जब भी ऐसे ट्रेंड्स आते हैं तो सबसे ज्यादा दुखी पंत के फैंस होते हैं. उन्हें समझ नहीं आता कि अब करें तो करें क्या. मेरे जैसे लोग. जो पंत की विस्फोटक बैटिंग का ज़िक्र कर उन्हें डिफेंड करते हैं. उनके पास भी कहने को कुछ बचता नहीं. कैच पकड़कर ही मैच जीता जाता है. ये बात भारत का बच्चा-बच्चा जानता है. उम्मीद है कि पंत जल्दी ही इस पर अमल करेंगे और अपनी ओर आए हर कैच को पकड़कर हम जैसे फैंन का मनोबल बढ़ाएंगे. तब तक के लिए सॉरी पंत. इन ट्रोल्स से हम भी आपको ना बचा पाएंगे.

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