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नेगेटिव-जी मेन्यूवर क्या बला है, जो फाइटर पायलट की जान भी ले सकता है?

एक्सपर्ट्स कहते हैं, 'ये एविएशन की सबसे खतरनाक टेरिटरी है.' विमान के लिए तो और बुरा. स्ट्रक्चर पर अलग लोड, फ्यूल सिस्टम उल्टा बहता है, सेंसर्स और एवियोनिक्स गड़बड़ा जाते हैं.

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लड़ाकू विमान ज्यादातर पॉजिटिव-जी के लिए बने होते हैं. (फाइल फोटो- PTI)

आसमान में रंग-बिरंगे धुएं के निशान, दर्शकों की तालियां और तेज रफ्तार में हवा को चीरते हुए फाइटर जेट. 21 नवंबर की दोपहर तक दुबई एयर शो का नजारा कुछ ऐसा ही था. लेकिन फिर इस शो में एक ऐसा पल आया, जब ये एयर शो मौत का खेल बन गया. इंडियन एयर फोर्स का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस अचानक जमीन पर गिर गया. आशंका जताई जा रही है कि शायद विंग कमांडर नमांश स्याल का तेजस विमान नेगेटिव-जी मेन्यूवर करते हुए क्रैश हुआ जिसमें उनकी मौत हो गई. सवाल उठ रहे हैं कि ये नेगेटिव-जी मेन्यूवर इतना खतरनाक क्यों और कैसे है?

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नेगेटिव-जी क्या है?

सामान्य उड़ान में क्या होता है? पॉजिटिव जी. माने, पायलट सीट में दब जाता है. जैसे कोई भारी कंबल में घुस गया हो. लेकिन नेगेटिव-जी? इसका उल्टा. जेट तेजी से नीचे की ओर झुकता है, या ऊंचाई से 'पुश ओवर' करता है. ग्रेविटी पायलट को सीट से बाहर उछाल देती है. हार्नेस स्ट्रैप्स कसकर खींचते हैं, खून सिर की ओर दौड़ता है, और वो पल आता है- वेटलेसनेस का, जैसे स्पेस में तैरना. 

लेकिन ये जादू नहीं, बल्कि तेजस जैसी उड़ती मशीन की फुर्ती दिखाने का तरीका है. लड़ाकू विमान ज्यादातर पॉजिटिव-जी के लिए बने होते हैं. चाहे टर्न्स हों, या क्लाइंब्स. पर नेगेटिव-जी? वो तो एक्स्ट्रा चैलेंज है. जो दुश्मन को तो चौंका दे, लेकिन खुद के भी फंसने का खतरा रहता है. यानी, एक हल्की सी गलती, और सब खत्म!

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नेगेटिव-जी की वजह से खून सिर की ओर दौड़ता है.
क्यों है ये 'रेड-आउट' वाली बला?

अब असली सवाल, ये इतना रिस्की क्यों है? पहले पायलट की बात. नेगेटिव-जी में खून सिर में भर जाता है. आंखें लाल हो जाती हैं. इसे कहते हैं 'रेड-आउट'. माने, कुछ सेकेंड्स के लिए कुछ समझ नहीं आता. वहीं, पॉजिटिव-जी का ब्लैकआउट धीरे आता है. लेकिन नेगेटिव-जी? बिजली की स्पीड से. जजमेंट बिगड़ जाता है, रिएक्शन टाइम खत्म, और कम ऊंचाई पर एयरोबेटिक्स कर रहे हो तो? बस, गेम ओवर!

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नेगेटिव जी फ्लूइड्स उल्टे चले जाते हैं, कंट्रोल इनपुट्स बिगड़ सकते हैं.

एक्सपर्ट्स कहते हैं, 'ये एविएशन की सबसे खतरनाक टेरिटरी है.' विमान के लिए तो और बुरा. स्ट्रक्चर पर अलग लोड, फ्यूल सिस्टम उल्टा बहता है, सेंसर्स और एवियोनिक्स गड़बड़ा जाते हैं. तेजस जैसा फाइटर पॉजिटिव-जी झेलने के लिए बने हैं. पर नेगेटिव में? फ्लूइड्स उल्टे चले जाते हैं, कंट्रोल इनपुट्स बिगड़ सकते हैं. हाई स्पीड, ग्राउंड क्लोज, एक गड़बड़ी, और सब खत्म. एयर शो में तो मार्जिन पतली रेखा जैसा. रिकवरी का मौका? नामुमकिन.

कौन थे विंग कमांडर नमांश?

नमांश स्याल करीब 20 साल की आयु में ही एयरफोर्स में भर्ती हो गए थे. उन्होंने NDA का एग्जाम पास किया था. उन्हें 2009 में एयरफोर्स में कमीशन किया गया था. बतौर पायलट, नमांश भारतीय वायुसेना की नंबर 45 स्क्वाड्रन का हिस्सा थे. इसे ‘फ्लाइंग डैगर्स’ के नाम से भी जाना जाता है. ये स्क्वाड्रन तमिलनाडु के सूलुर एयर बेस पर तैनात है. तेजस लड़ाकू विमान के सर्विस में आने के बाद से ये स्क्वाड्रन इसे मुख्य रूप से ऑपरेट करने वाली प्रमुख यूनिट्स में से एक रही है.

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नमांश स्याल एक डिफेंस बैकग्राउंड वाले परिवार से थे. उनके पिता जगन नाथ स्याल ने आर्मी मेडिकल कोर में सेवा दी थी. उसके बाद रिटायर होकर एक स्कूल के प्रिंसिपल बने थे. नमांश की पत्नी अफशां भी भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर के पद पर तैनात हैं.

वीडियो: क्रैश से पहले तेजस के पायलट नमांश ने पिता से की थी आखिरी बात

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