यूथ कांग्रेस ने 8 राज्यों में 200 से ज्यादा पदाधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. बताया गया कि ये लोग 1 नवंबर को दिल्ली में हुई INDIA ब्लॉक की रैली में शामिल नहीं हुए थे. मगर महारैली में शामिल ना होने के लोगों ने अपने-अपने कारण बताए. एक कार्यकर्ता ने दावा किया कि उसने अपनी सिचुएशन की पहले से जानकारी दी थी. तब भी उसके खिलाफ एक्शन लिया गया.
'चाचा की तेरहवीं थी इसलिए राहुल गांधी की रैली में नहीं गए', निलंबित कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दर्द छलका
Youth Congress 200 leaders suspended: 1 नवंबर को दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की रैली हुई थी. रैली में कई पदाधिकारी नहीं आए थे. अब बताया गया कि यूथ कांग्रेस ने रैली में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है.

दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली आयोजित की थी. यह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर की गई थी. यूथ कांग्रेस के पदाधिकारियों को रैली में शामिल होने का निर्देश दिया गया था. लेकिन कुछ लोग वहां नहीं पहुंचे.
रामलीला मैदान में ना आने वाले लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया. इनमें आठ राज्यों की इकाइयों के कुल 215 पदाधिकारियों के नाम हैं. यूथ कांग्रेस ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इसे बारे में बताया है. युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा,
“हमारे लगभग 20 हजार पदाधिकारी इस रैली में शामिल होने वाले थे. उनमें से कुछ लोग नहीं आए, जिसके बाद हमने उन्हें नोटिस जारी किया और उनके खिलाफ कार्रवाई की है.”
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यवार आंकड़ों में मध्य प्रदेश से 60, गुजरात से 49, झारखंड से 32, पश्चिम बंगाल से 26, तेलंगाना से 14, हिमाचल प्रदेश से 13, उत्तर प्रदेश सेंट्रल से 11 और हरियाणा से 10 पदाधिकारी शामिल हैं. अब इस एक्शन की काफी आलोचना भी हो रही है.
चाचा की तेरहवीं के कारण नहीं जा पाएINDIA टुडे के रवीश पाल सिंह ने रोहित राजोरिया से बात की. वह 2010 से NSUI और यूथ कांग्रेस से जुड़े हुए हैं. पार्टी के प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के दौरान पुलिस की कार्रवाई का सामना भी कर चुके हैं. सस्पेंड किए कार्यकर्ताओं में उनका भी नाम है. रवीश पाल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके साथ ‘अन्याय’ हुआ है.
उन्होंने कहा,
"मेरे साथ अन्याय हुआ है. मेरे चाचा का निधन हो गया था. दो दिन पहले तेरहवीं थी. घरों पर मेहमानों का आना-जाना लगा हुआ था. मैं दिल्ली कैसे जा सकता था? मैंने संगठन के लोगों को इस बारे में पहले ही बता दिया था. इसके बावजूद मुझे निलंबित कर दिया गया. "
उन्होंने कहा कि वो ज्यादातर कार्यक्रम में शामिल होते हैं. उन्होंने पूछा,
"2010 से मैंने पार्टी के लिए अनगिनत लाठियां खाई हैं. मैं तीन बार जेल जा चुका हूं. मेरे खिलाफ 12 मामले दर्ज हैं. इतना सब होने के बाद भी, मेरे साथ अन्याय हुआ है. मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?"
राजोरिया ने संगठन में जिम्मेदारियों के बंटवारे पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा,
"नेहा बोरा को प्रमोट करें, लेकिन हम जैसे लोगों को भी जिम्मेदारियां दें. जो कार्यकर्ता सालों से संगठन के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनके साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए."
उन्होंने कहा कि उनसे कोई जवाब नहीं लिया गया. बस सस्पेंड कर दिया गया. वह इस मामले को कांग्रेस नेतृत्व के सामने उठाएंगे. जरूरत पड़ी तो राहुल गांधी से भी पर्सनल मीटिंग करेंगे.
कोई शादी, तो कोई बीमारी के कारण नहीं आ पायाराजोरिया अकेले निलंबित यूथ कांग्रेस पदाधिकारी नहीं हैं. अन्य कई कार्यकर्ता हैं, जो अपने-अपने कारणों से कार्यक्रम में नहीं जा सके. इंडियन एक्सप्रेस VS बताया कि मध्य प्रदेश के मैहर जिले के यूथ कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा भी रैली में नहीं गए थे. क्योंकि उनके बड़े भाई के घर 12 साल बाद बेटे का जन्म हुआ था. वह सेलिब्रेशन में बिजी थे.
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यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष शिवराज सिंह यादव ने कहा कि उनकी छोटी बहन की शादी थी. इकलौते भाई होने के नाते उन पर शादी से जुड़ी जिम्मेदारियां थीं. इसलिए वह रैली में नहीं जा सके. अनूपपुर जिला अध्यक्ष मानवेंद्र मिश्रा की तबीयत ठीक नहीं थी. वहीं उपाध्यक्ष राजवीर सिंह कुड़िया और महासचिव सुमन मौर्य ने भी स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया.
हालांकि, मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस नेतृत्व ने निलंबन के फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ उन लोगों के खिलाफ की गई है, जो बिना पहले से सूचना दिए रैली में शामिल नहीं हुए थे.
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