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'मुगलों ने छत्रपति को चूहा कहा था', उद्धव ठाकरे ने Gen Z की तुलना शिवाजी से कर दी

शिवसेना (UBT) चीफ उद्धव ठाकरे ने जेन जी के साहस की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से की है. उद्धव ठाकरे ने कहा कि जिस तरह मुगलों ने शिवाजी की उपलब्धियों के बावजूद उनको चूहा कहकर उनका अपमान किया था, उसी तरह आज जेन जी को कॉकरोच बताकर उनका अपमान किया जा रहा है.

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उद्धव ठाकरे ने जेन जी की तुलना शिवाजी महाराज से की. (तस्वीरें- PTI और इंडिया टुडे)

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  • उद्धव ठाकरे ने शिवसेना (UBT) के एक कार्यक्रम में कहा कि जेनरेशन जेड को 'कॉकरोच' कहकर अपमानित किया जा रहा है, जैसा कि मुगलों ने शिवाजी महाराज को 'चूहा' कहकर कम आंका था।
  • जेनरेशन जेड के युवाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी और संसद में उनके प्रोटेस्ट को केंद्र में रखते हुए उद्धव ठाकरे ने उनकी तुलना शिवाजी महाराज से की, जो कम उम्र में मुगलों को चुनौती दे रहे थे।
  • नीट पेपर लीक प्रोटेस्ट के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित घटनाओं के आधार पर जेनरेशन जेड की भूमिका पर चर्चा बढ़ी, जिससे राजनीतिक दलों द्वारा उनकी सक्रियता पर प्रतिक्रिया आई।

जेनरेशन जेड इन दिनों जेर-ए-बहस हैं. उनके समर्थन या विरोध में तमाम बहस मुबाहसे चल रहे हैं. इस बीच शिवसेना (UBT) चीफ उद्धव ठाकरे ने उनकी तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी है. उन्होंने कहा कि जिस तरह आज की नई पीढ़ी को 'कॉकरोच' कहकर खारिज किया जा रहा है, ठीक उसी तरह मुगलों ने शिवाजी महाराज को ‘चूहा’ कहकर उनका मजाक उड़ाया था.

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Gen Z की शिवाजी महाराज से तुलना

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्धव ठाकरे मुंबई में शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता हर्षल प्रधान की लिखी किताबों के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए थे. यहां उन्होंने कहा,

जिन लोगों को हाल में कॉकरोच कहकर अपमानित किया गया था, वे जेनरेशन जेड के युवा हैं. जिनकी उम्र लगभग 13-14 से 27-28 साल के बीच है. शिवाजी महाराज भी केवल 17 साल के थे, जब उन्होंने तोरण किला जीता था. तब मुगलों ने शिवाजी महाराज को भी 'चूहा' कहा था. संत ज्ञानेश्वर भी काफी उम्र के थे जब उन्होंने ज्ञानेश्वरी लिखी थी. दोनों को अपने समय में काफी विरोध का सामना करना पड़ा था.

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उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवाजी महाराज ने अपनी कम उम्र के बावजूद मुगल साम्राज्य को चुनौती दी थी. उन्होंने तर्क दिया कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने पर आज के युवाओं को छोटा या कमतर नहीं आंका जाना चाहिए. बल्कि उनको प्रोत्साहन देना चाहिए.

'Gen Z ने बचाई लोकतंत्र की आत्मा'

नीट एग्जाम 2026 पेपर लीक के खिलाफ छात्रों ने प्रोटेस्ट किया. इसके चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. उद्धव ठाकरे ने इस प्रोटेस्ट का नेतृत्व करने वाले युवाओं की तारीफ की. उन्होंने कहा, “ऐसे वक्त में जब कई लोगों का मानना था कि लोकतंत्र अपनी आत्मा खो चुका है, तब देश के युवाओं ने अपने प्रोटेस्ट के माध्यम से इसे फिर से जीवन दिया.”

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संसद में Gen Z की धूम

संसद का मानसून सेशन चल रहा है. इस दौरान सभी पार्टियों के नेताओं ने Gen Z के प्रोटेस्ट या फिर उनकी भाषा पर कॉमेंट किया है. सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं की ओर से Gen Z को निशाना बनाया गया था. उद्धव ठाकरे का बयान उसके जवाब में आया है.

आरोप प्रत्यारोप से परे संसद में दोनों पक्षों के नेता Gen Z टर्मिनोलॉजी का इस्तेमाल करते दिखे हैं. बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने एक सरकारी विधेयक को डिफेंड करते हुए 'क्लॉक इट' फ्रेज का इस्तेमाल किया. यह किसी चीज को स्वीकार करने के लिए इंटरनेट पर पॉपुलर Gen Z टर्म है.

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कम्युनिकेशन स्ट्रैटजी पर सवाल उठाते हुए Gen Z का जिक्र किया. उन्होंने पीएम को सलाह दी कि अगर वे Gen Z का दिल जीतना चाहते हैं, तो अलग-अलग कैमरा एंगल से वीडियो बनाने से काम नहीं बनेगा. पीएम को अपने दिल का एंगल बदलना होगा.

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