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बंगाल में सत्ता बदलते ही ED का एक्शन, ममता सरकार में मंत्री रहे सुजीत बोस गिरफ्तार

Sujit Bose की गिरफ्तारी कथित नगर निगम भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में हुई है. ईडी ने दावा किया है कि बोस जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और बार-बार बयान बदल रहे हैं. इसी वजह से उन्हें गिरफ्तार किया गया. क्या है बंगाल का नगरपालिका भर्ती घोटाला?

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ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे सुजीत बोस गिरफ्तार. (फाइल फोटो: ITG)
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मुनीष पांडे

पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद पहली राजनीतिक गिरफ्तारी हुई है. ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे सुजीत बोस को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी कथित नगर निगम भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में हुई है. 11 मई को ईडी ने सुजीत बोस से करीब साढ़े 10 घंटे पूछताछ की. ईडी के अधिकारियों ने दावा किया बोस जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और बार-बार बयान बदल रहे हैं. इसी वजह से उन्हें गिरफ्तार किया गया.

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क्या है बंगाल का नगरपालिका भर्ती घोटाला?

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने बताया कि सुजीत बोस ने ‘साउथ दम दम’ नगरपालिका में कई पदों पर भर्ती के लिए कथित तौर पर 150 उम्मीदवारों की अवैध सिफारिश की थी. सुजीत उस वक्त दमदम नगर पालिका के उपाध्यक्ष थे. जांच एजेंसी का दावा है कि इन सिफारिशों के बदले उन्होंने आर्थिक लाभ लिया था. ईडी ने अपराध की कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के रूप में कई लग्जरी फ्लैट्स की पहचान की है जो कथित तौर पर इन नियुक्तियों के बदले हासिल किए गए थे.

इसके अलावा ईडी को उनके नियंत्रण वाले बैंक खातों में भारी मात्रा में नकद जमा होने के सबूत भी मिले हैं. कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने FIR दर्ज की थी. इसी FIR के आधार पर ईडी ने इस मामले की जांच शुरू की. 10 अक्टूबर 2025 को ईडी ने पश्चिम बंगाल में 13 ठिकानों पर छापेमारी की थी. इनमें सुजीत बोस और पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मंत्री के दफ्तर भी शामिल थे. 

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इस दौरान जांच एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज और 45 लाख रुपये नकद बरामद किए थे. बोस को इस मामले में ED का समन चुनाव प्रचार के बीच मिला था. इसमें पहला समन 2 अप्रैल को आया था. 6 अप्रैल को मिले समन के बाद उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुजीत ने चुनाव प्रचार में अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए ED के सामने पेश होने से छूट मांगी थी. इसके बाद 1 मई को वो जांच एजेंसी के सामने पेश हुए थे. फिर 11 दिन बाद यानी आज सुजीत को अरेस्ट कर लिया गया.

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सुजीत बोस कौन हैं?

इस विधानसभा चुनाव में सुजीत बोस, उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर सीट से चुनाव मैदान में थे. इस सीट से वो तीन बार विधायक रह चुके है. पहला चुनाव 2009 जीते थे. लेकिन इस बार बीजेपी शरदवत मुखर्जी से 37,000 से अधिक वोटों के अंतर से हार गए. बिधाननगर सीट एक समय CPI(M) का गढ़ हुआ करती थी. 1977 से लेकर 2009 तक इस सीट से सुभाष चक्रवर्ती जीते थे. चक्रवर्ती की मृत्यु के बाद 2009 में उपचुनाव हुए और बोस इस सीट से जीत गए. 

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TMC में शामिल होने से पहले सुजीत बोस CPI(M) नेता सुभाष चक्रवर्ती के करीबी नेताओं में शामिल थे. हालांकि, 1990 के दशक के आखिर तक आते-आते, उन दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगी थीं. 2001 में, बोस TMC में शामिल हो गए. 2021 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद उन्हें पहली बार मंत्री पद मिला. 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में TMC की हार के बाद सुजीत बोस पहले नेता हैं, जिनकी गिरफ्तारी हुई है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वो संभवतः आखिरी भी नहीं होंगे. क्योंकि राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने TMC सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने का वादा किया है.

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