सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के नए डायरेक्टर को चुनने के लिए बुलाई गई मीटिंग काफी हंगामेदार रही. खबर है कि राहुल गांधी ने सीबीआई के डायरेक्टर को चुनने की प्रक्रिया से अपने आपको अलग कर दिया है. इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम एक 'नोट ऑफ डिसेंट' यानी असहमति का पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि विपक्ष कोई रबर स्टैंप नहीं है. वह किसी भी पक्षपात वाली प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकता. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि सीबीआई के डायरेक्टर के चुनाव लिए सेलेक्शन कमेटी के सामने उम्मीदवारों के जरूरी रिकॉर्ड समय पर नहीं पेश किए गए.
CBI डायरेक्टर चुनने के प्रोसेस से हटे राहुल गांधी, सरकार पर आरोप लगाकर बोले- 'विपक्ष रबर स्टैंप नहीं'
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीबीआई डायरेक्टर के लिए होने वाली मीटिंग में अपनी असहमति दर्ज कराई है. प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस की मौजूदगी में हुई इस बैठक में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने सेलेक्शन प्रोसेस को महज औपचारिकता भर बना दिया है.


प्रधानमंत्री आवास में हुई इस बैठक में पीएम मोदी के अलावा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सीजेआई सूर्यकांत मौजूद थे. इस बैठक के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर CBI डायरेक्टर के चयन प्रक्रिया से अलग होने की जानकारी दी. उन्होंने लिखा,
मैंने CBI डायरेक्टर के चयन प्रक्रिया पर असहममति जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. मैं किसी भी पक्षपात करने वाली प्रक्रिया का हिस्सा बनकर अपने संवैधानिक कर्तव्यों का उल्लंघन नहीं कर सकता. विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैंप नहीं है.
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि सरकार सीबीआई का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए कर रही है. इसी 'इंस्टीट्यूशनल कैप्चर' (संस्थागत कब्जे) को रोकने के लिए नेता विपक्ष को सेलेक्शन कमेटी में शामिल किया गया था लेकिन अब उन्हें सार्थक भूमिका निभाने से रोका जा रहा है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सेलेक्शन कमेटी के सामने उम्मीदवारों के जरूरी रिकॉर्ड समय पर नहीं पेश किए गए. उन्हें उम्मीदवारों की सेल्फ अप्रेजल रिपोर्ट और 360 डिग्री रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई. नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया,
विपक्ष रबर स्टैंप नहींः राहुलमीटिंग के दौरान ही मुझसे 69 उम्मीदवारों के रिकॉर्ड्स की जांच करने की उम्मीद की गई, जो व्यवहारिक तौर पर असंभव है. बिना किसी कानूनी आधार के जानकारी छिपाना सेलेक्शन प्रोसेस का मजाक उड़ाने जैसा है. मेरा मानना है कि यह सब इसलिए किया गया ताकि सरकार द्वारा पहले से तय किए गए उम्मीदवार को चुना जा सके.
राहुल गांधी ने आगे प्रधानमंत्री मोदी को लिखा कि सेलेक्शन कमेटी को महत्वपूर्ण जानकारी नहीं देकर सरकार ने इसे सिर्फ एक औपचारिकता में बदल दिया है. उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैंप नहीं है जो सरकार के हर फैसले पर आंख मूंदकर मुहर लगा दे. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वे इस पूरी कार्यवाही से अपनी असहमति दर्ज कराते हैं क्योंकि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
यह पहला मौका नहीं है, जब राहुल गांधी ने CBI डायरेक्टर के सेलेक्शन को लेकर आपत्ति जताई है. उन्होंने याद दिलाया कि 5 मई 2025 को हुई पिछली बैठक में भी उन्होंने अपनी असहमति जताई थी. इसके अलावा 21 अक्टूबर, 2025 को भी उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सेलेक्शन प्रोसेस को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के सुझाव दिए थे. राहुल गांधी ने बताया कि उनके इन सुझावों पर सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया.
कैसे होता है चुनाव?CBI के डायरेक्टर का चुनाव तीन सदस्यीय पैनल करता है. इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, जबकि लोकसभा में नेता विपक्ष और भारत के चीफ जस्टिस या फिर उनकी ओर से नामित सुप्रीम कोर्ट के कोई जस्टिस इसमें शामिल होते हैं. सीबीआई के मौजूदा डायरेक्टर 1986 बैच के IPS अधिकारी प्रवीण सूद हैं. उन्होंने 25 मई 2023 को पदभार ग्रहण किया था. उनका कार्यकाल मई 2025 में खत्म होने वाला था लेकिन सरकार ने एक साल के लिए उनको सर्विस एक्सटेंशन दे दिया.
अब 24 मई को उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा CBI के नए डायरेक्टर को चुनने की प्रक्रिया शुरू की है. लेकिन राहुल गांधी ने खुद को इससे अलग कर लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीबीआई के नए डायरेक्टर के लिए 1989 से 1992 बैच के आईपीएस अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है. इसमें आर एंड डब्ल्यू (R&W) के डायरेक्टर पराग जैन, अजय कुमार शर्मा, महाराष्ट्र के डीजीपी सदानंद दाते और CRPF के डायरेक्टर जीपी सिंह का नाम सबसे आगे है.
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