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लोकसभा में गिर गया संविधान संशोधन बिल, 230 के मुकाबले 298 वोट पाकर भी क्यों हारी सरकार?

लोकसभा में वोटिंग की प्रक्रिया के बाद स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका, क्योंकि सदन में वोटिंग के दौरान इसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला.

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संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पास नहीं हो पाया. (फोटो- India Today)

लोकसभा और राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण को तेजी से लागू करने और नई जनगणना के बिना ही परिसीमन करने वाला विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाया. यह बिल लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा और 298 के मुकाबले 238 वोटों से गिर गया. बिल को पास होने के लिए 326 वोटों की जरूरत थी जबकि उसे सिर्फ 298 वोट मिले. संविधान संशोधन विधेयक होने के नाते इस बिल का फैसला ‘मत विभाजन’ के जरिए किया गया. 

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लोकसभा में वोटिंग की प्रक्रिया के बाद स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका, क्योंकि सदन में वोटिंग के दौरान इसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला. बिल के गिरने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा और कहा कि इतने बड़े और अहम बिल पर यह नतीजा बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. आपने एक बड़ा मौका खो दिया है. इसके बाद सदन को शनिवार, 18 अप्रैल की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. सदन की कार्यवाही खत्म होने के बाद बीजेपी की महिला सांसद कांग्रेस के खिलाफ संसद के गेट पर ही प्रदर्शन करने लगीं. मकर द्वार पर उन्होंने ‘कांग्रेस पार्टी हाय-हाय’ के नारे लगाए.

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बीजेपी सांसदों ने कांग्रेस हाय-हाय के नारे लगाए.

वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि हमने संविधान पर हमले को रोक दिया. सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का कभी विरोध नहीं किया. अखिलेश ने कहा, 

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हम तो उन लोगों के खिलाफ थे जो महिलाओं के अधिकारों को छीनना चाहते थे.

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि ये बिल महिलाओं के आरक्षण के लिए नहीं था. हम परिसीमन को महिला आरक्षण से जोड़ने पर कभी सहमत नहीं हो सकते. यह संभव ही नहीं था कि यह बिल पारित हो. प्रियंका गांधी ने कहा कि ‘मेरे ख्याल से यह हमारे देश के लोकतंत्र के लिए और अखंडता के लिए एक बड़ी जीत है.’

महिला विरोधी मानसिकता के आरोपों पर प्रियंका ने कहा कि जिन लोगों ने हाथरस, उन्नाव और मणिपुर की महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया, खिलाड़ियों के लिए कुछ नहीं किया. वो अब महिला-विरोधी मानसिकता की बात कर रहे हैं?

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क्यों नहीं पास हुआ बिल?

लोकसभा में इस बिल को लेकर सरकार नंबर गेम में हार गई. संविधान संशोधन बिल पास करने के लिए खास तरह का बहुमत चाहिए होता है. यानी जो सदस्य मौजूद हों और वोट करें, उनमें से दो-तिहाई का समर्थन जरूरी होता है. लोकसभा में फिलहाल कुल प्रभावी संख्या 537 है. ऐसे में दो-तिहाई का आंकड़ा करीब 360 का बनता है लेकिन सत्ताधारी एनडीए के पास सिर्फ 293 सांसद ही हैं. यानी वो 67 सीटों से पीछे रह जाते हैं. वहीं, राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा 163 का है. यहां एनडीए के पास 142 से थोड़ा ज्यादा सदस्य हैं. यानी यहां भी वे करीब 21 सीट कम पड़ जाते हैं.

शुक्रवार, 17 अप्रैल को पेश हुए बिल को पास कराने के लिए सरकार को 326 वोटों की जरूरत थी. इस वोटिंग में कुल 489 सांसदों ने भाग लिया. मतदान में बिल खारिज हो गया क्योंकि इसके पक्ष में कुल 298 वोट पड़े जबकि 230 सांसदों ने बिल के विपक्ष में मतदान किया.

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