एक चौंकाने वाली बात. टीबी आपके रीप्रोडकटिव सिस्टम में भी हो सकता है. यानी वो सारे अंग जो बच्चा पैदा करने में आपकी मदद करते हैं. इसके बारे में जानने के लिए हमनें बात की डॉक्टर लवलीना नादिर और डॉक्टर अनुराधा चोपड़ा से. डॉक्टर लवलीना नादिर फ़ोर्टिस दिल्ली में स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं. डॉक्टर अनुराधा चोपड़ा मुंबई में फर्टिलिटी क्लिनिक चलाती हैं.
तो सबसे पहली बात...
इस तरह के टीबी को क्या कहते हैं
डॉक्टर लवलीना नादिर बताती हैं-
‘इस तरह के टीबी को पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस कहते हैं. या जेनाइटिल ट्यूबरक्लोसिस. इस तरह का टीबी महिलाओं के रीप्रोडकटिव ऑर्गंस में होता है. जैसी कि आपकी ओवरीज़. ओवरीज़ से जुड़े फैलोपियन ट्यूब (गर्भनाल जो गर्भाशय के ऊपरी हिस्से के दोनों ओर से निकलती है और दोनों तरफ कूल्हे की हड्डियों तक जाती हैं.) गर्भाशय. और वजाइना. ज़्यादातर ये शरीर के किसी और हिस्से में इन्फेक्शन फैलने की वजह से होता है. ख़ासतौर पर फेफड़े. औरतों में ये ज़्यादातर बच्चा पैदा कर पाने की उम्र के दौरान होता है.’
आपका रिप्रोडक्टिव सिस्टम आपके गर्भाशय, ओवरीज़, वजाइना, और गर्भनलियां से बनता है.क्यों होता है पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस
माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस. ये एक तरह के जीवाणु होते हैं. बोले तो बैक्टीरिया. यही सारी मुसीबत की जड़ हैं. मतलब शरीर में इनकी एंट्री और टीबी की शुरुआत. अगर शरीर के किसी और हिस्से में ये बैक्टीरिया घर कर जाए तो ये आपके रीप्रोडक्टिव सिस्टम तक पहुंच सकते हैं. नतीजा? पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस.
पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस के क्या लक्षण हैं
डॉक्टर अनुराधा चोपड़ा ने बताया-
‘शुरुआती दौर में इस तरह के टीबी का पकड़ में आना थोड़ा मुश्किल होता है. कई लोग इसे कैंसर भी समझ लेते हैं. पर ये कैंसर नहीं है. ये तब सामने आता है जब औरत चाहकर भी मां नहीं बन पा रही होती. इसके कुछ लक्षण थकान, हल्का बुखार, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना, वजाइना से सफ़ेद पानी निकलना, पीरियड्स ठीक समय पर न होना होते हैं.’
अगर बार-बार कोशिश करने पर मां नहीं बन पा रहीं या पेट में लगातार दर्द रहता है तो ध्यान दीजिए. कैसे पता चलता है आपको पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस है
एक टेस्ट होता है. इसे कहते हैं ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट. ये शरीर में किसी भी हिस्से में होने वाले टीबी के बारे में पता लगा लेता है. एक चीज़ और. आपके पेट के निचले हिस्से का अल्ट्रासाउंड भी इस बीमारी का पता लगा सकता है. इनके अलावा कुछ टेस्ट और भी हैं. इसलिए ज़रूरी है कि अगर आपको बताए गए सारे लक्षण महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर से मिलिए. वो आपको इसके लिए सटीक टेस्ट बताएंगे.
पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस का इलाज क्या है
कंडीशन कितनी सीरियस है, इलाज इस पर निर्भर करता है. दवाइयों से लेकर सर्जरी तक की जा सकती है.
पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस को रोकने का क्या तरीका है
पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस को रीप्रोडक्टिव सिस्टम तक आने से रोकने का तरीका है. वो है ये सुनिश्चित करना कि शरीर के कसी और हिस्से में टीबी तो नहीं है. वरना उसके फैलने के चांसेस हैं. क्योंकि टीबी फैलने वाली बीमारी है, इसलिए ज़रूरी है कि आप उन लोगों से थोड़ा दूर रहें जिन्हें टीबी है. दूरी का मतलब उनका जूठा खाना न खाएं. वो खांसे या छींके तो दूरी बना लें. अगर आपके पार्टनर को टीबी है तो सेक्स करते समय कॉन्डम का इस्तेमाल करें. साथ ही अब टीबी के लिए इंजेक्शन भी मौजूद हैं. ये इंजेक्शन बच्चे होने के बाद ही लगाए जाते हैं.
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