(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
पेशाब आने पर कंट्रोल क्यों नहीं कर पाते?
जब ब्लैडर नीचे की तरफ़ खिंचता है तो पेशाब से जुड़ी प्रॉब्लम्स होने लगती हैं.


राम्या 30 साल की हैं. तीन महीने पहले उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया. उनकी नॉर्मल डिलीवरी हुई थी. लेकिन डिलीवरी के बाद उनको एक अजब समस्या हो रही है. उनका यूरिन पर कंट्रोल नहीं रहा है. यूरिन महसूस होने पर वो वॉशरूम भागती हैं, पर इससे पहले वो पहुंच पाती हैं, पेशाब लीक हो जाता है. यूरिन करने के बाद भी उनको ऐसा लगता है, जैसे अभी पूरा हुआ नहीं. फिर से जाना पड़ेगा. साथ ही उन्हें वजाइना में बहुत खिंचाव महसूस होता है. राम्या ने जब डॉक्टर को दिखाया, तो पता चला उन्हें पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन की समस्या है. ये नॉर्मल डिलीवरी के बाद ज़्यादा होती है. कई औरतें इस प्रॉब्लम से परेशान हैं. राम्या चाहती हैं कि हम इसके बारे में सही जानकारी लोगों को दें, ताकि उनके जैसी और महिलाओं की मदद हो सके.
अब पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन क्या होता है, ये जानने से पहले जान लीजिए पेल्विक फ्लोर किसे कहते हैं. ये फ्लोर का मतलब फ़र्श नहीं है. ये आपके शरीर के अंदर है. आसान भाषा में समझें तो पेल्विक फ्लोर यानी मांसपेशियों का एक ग्रुप जो पेल्विस के बेस पर पाया जाता है. अब ये पेल्विस क्या होता है? सोचिए पेल्विस एक घर है. इसमें अलग-अलग सदस्य रहते हैं जैसे ब्लैडर, गर्भाशय और मलाशय. पेल्विक फ्लोर मसल्स यानी मांसपेशियां इस घर की फाउंडेशन हैं. पेल्विस आपके शरीर का ये हिस्सा है. इसी के साथ पेल्विक फ्लोर पर क्रैश कोर्स पूरा होता है और डॉक्टर्स से जानते हैं पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन क्या होता है.
ये हमें बताया डॉक्टर बीरबाला राय ने.

-पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन का मतलब होता है कि पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां ठीक से काम नहीं करतीं
-पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन के 50 फीसदी केस उन महिलाओं में देखे जाते हैं, जिनकी नॉर्मल डिलीवरी होती है
-जिन महिलाओं में पहले से कोलेजन (एक तरह का प्रोटीन) की कमी होती है, उनमें ये दिक्कत ज़्यादा होती है
-साथ ही पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां भी पहले से कमज़ोर होती हैं
-इसमें पेल्विक फ्लोर के अंग अपनी जगह से हटकर नीचे की तरफ़ पुश होने लगते हैं
-इसको प्रोलैप्स बोलते हैं
-गर्भाशय अपनी जगह से पुश होने लगता है
-गर्भाशय के आगे ब्लैडर होता है और गर्भाशय के पीछे रेक्टम (मलाशय) होता है
-जब गर्भाशय नीचे की तरफ़ पुश होता है तब वो ब्लैडर और रेक्टम (मलाशय) को भी खींचता है
लक्षण-वजाइना में एक खिंचाव महसूस होता है
-ऐसा महसूस होता है जैसे कुछ नीचे की तरफ़ आ रहा है
-जब ब्लैडर नीचे की तरफ़ खिंचता है तो पेशाब से जुड़ी प्रॉब्लम्स होने लगती हैं
-जैसे हर थोड़ी देर में पेशाब आना
-ऐसा एहसास होना कि पेशाब पूरी तरह से पास नहीं हुआ है और दोबारा जाना पड़ेगा
-बहुत जोर से छींकने या खांसने से पेशाब लीक कर जाता है
-ये ओवर एक्टिव ब्लैडर के लक्षण हैं
-मलाशय के खिंचाव के कारण मल ठीक से पास नहीं हो पाता
-जिसकी वजह से कब्ज़ हो जाता है

-मेनोपॉज़ के दौरान शरीर में कई सारे हॉर्मोनल बदलाव होते हैं
-जिनकी वजह से ये दिक्कतें शुरू हो जाती हैं
-जिमनास्ट और हाई जंपर जैसे स्पोर्ट्स करने वाली महिलाओं में भी ये दिक्कत होती है
-जो कैंसर पेशेंट कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी लेते हैं उन्हें भी ये समस्या होती है
-बढ़ती उम्र में भी ऐसा होता है
किन बातों का ध्यान रखें-अगर बहुत ज़्यादा खांसी आती है तो इसका इलाज लेना ज़रूरी है
-कब्ज़ का भी इलाज लें
-पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज करनी होती हैं
-जैसे कीगल एक्सरसाइज
-निचले पेट की मांसपेशियों को भी मज़बूत किया जाता है
-कुछ सर्जरी भी उपलब्ध हैं जो मदद कर सकती हैं
-कुछ पेशेंट ऐसे होते हैं जिनमें सर्जरी नहीं की जाती
-इनके लिए कुछ अलग तरह की थेरेपी की जाती हैं
-जैसे रिंग प्रेस्री
-वज़न घटाना
-रात को कुछ ऐसा न लें जिससे ये दिक्कत और बढ़े
-स्मोकिंग अवॉइड करें
पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन क्या होता है, ये तो आपको समझ में आ ही गया होगा. अब ज़रूरी नहीं है कि ऐसा डिलीवरी के बाद ही हो. इसके कई कारण हैं, जो डॉक्टर वीरबाला ने बताए.
NCBI यानी नेशनल सेंटर फ़ॉर बायोटेकनोलॉजी एंड इनफ़ॉरमेशन के मुताबिक, भारत में 21.8 प्रतिशत औरतों को ये समस्या है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं, इसका इलाज उपलब्ध है.
वीडियो- औरतों में कमजोर हड्डियों की प्रॉब्लम आदमियों से ज्यादा क्यों होती है?











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