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महिलाओं का CAA के खिलाफ धरने पर बैठना योगी आदित्यनाथ को कतई रास नहीं आया

योगी को लगता है कि औरतें CAA के बारे में कुछ नहीं जानतीं.

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने करावलनगर में रैली को संबोधित किया था. (फाइल फोटो)

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने कानपुर में 22 जनवरी को एक रैली की. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में. उन्होंने इस कानून का विरोध करने वाली राजनीतिक पार्टियों पर जमकर गुस्सा निकाला. 'आजादी' के नारों पर भी सवाल खड़े किए. कहा कि कभी कश्मीर में प्रदर्शन के नाम पर ऐसे नारे लगते थे. अगर ऐसा यूपी में हुआ, तो वो देशद्रोह की श्रेणी में आएगा और सरकार कठोर कार्रवाई करेगी. फिर बारी आई CAA के विरोध में धरने पर बैठी महिलाओं की. सीएम योगी ने कहा कि धरना दे रही महिलाओं को पता ही नहीं है कि CAA क्या है. वो तो केवल इसलिए धरना दे रही हैं, क्योंकि उनके पतियों ने उनसे ऐसा करने को कहा है.

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कई जगह धरने पर हैं महिलाएं

योगी आदित्यनाथ ने आगे क्या कहा, वो बताने से पहले ये जान लें कि देश के कई हिस्सों में औरतें CAA के खिलाफ धरना दे रही हैं. दिल्ली के शाहीन बाग के प्रदर्शन को तो एक महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है. वहां कई महिलाएं अपने बच्चों के साथ धरने पर बैठी हैं. प्रयागराज के मंसूर अली पार्क, कोलकाता के सर्कस पार्क और लखनऊ के घंटाघर-गोमती नगर में मुस्लिम औरतें धरने पर हैं. कहीं-कहीं पर कुछ हिंदू औरतें भी इनका साथ दे रही हैं. इंदौर के बड़वाली चौकी क्षेत्र में भी औरतों ने दिल्ली के शाहीन बाग जैसा धरना-प्रदर्शन किया था.

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Shaheen Bagh
दिल्ली के शाहीन बाग में CAA के खिलाफ धरने पर बैठी महिलाएं. फोटो- PTI.

अब यूपी सीएम ने ठीक-ठीक कहा क्या है, वो जान लीजिए. उनके शब्द थे :

'कांग्रेस के लिए देश, हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई महत्वपूर्ण नहीं हैं. ये कहते हैं कि जब तक ISI के एजेंटों को भारत में एंट्री नहीं करवा देते, तब तक CAA का विरोध करेंगे. ये कांग्रेस के नेताओं का शर्मनाक बयान है. सपा और विपक्षी दलों के लोग यही कह रहे हैं. अब तो इन लोगों में इतनी भी हिम्मत नहीं रही कि ये खुद आंदोलन कर सकें, क्योंकि इन्हें मालूम है कि तोड़-फोड़ करने पर इनकी प्रॉपर्टी जब्त कर ली जाएगी. अब ये अपने घर की महिलाओं और बच्चों को चौराहे-चौराहे पर बैठाने लगे हैं. इतना बड़ा अपराध कि पुरुष घर में रजाई ओढ़कर सो रहा है और महिलाओं को चौराहे पर बैठाया जा रहा है. विरोध के लिए किस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं. महिलाओं को आगे कर रहे हैं, जिन्हें मालूम ही नहीं कि CAA क्या है, वो धरने पर बैठी हैं. आप उनसे पूछिए कि वो धरने पर क्यों हैं, तो कहती हैं कि घर के मर्द ने कहा कि हम इतने अक्षम हो चुके हैं कि कुछ नहीं कर सकते, इसलिए तुम ही जाकर धरने पर बैठ जाओ.'

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ये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुंह से निकले शब्द हैं.

धरने पर बैठी औरतें चुभती क्यों हैं?

योगी आदित्यनाथ ने मार्च, 2017 में यूपी के सीएम पद की शपथ ली थी. तब कहा था कि भारत के 'संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा'. लेकिन भाषण देते वक्त इस बुनियादी बात को नजरअंदाज कर गए कि संविधान में औरत और आदमी को बराबरी का दर्जा दिया गया है. शायद तभी धरने पर बैठी औरतों के लिए इस तरह की बात बोल गए.

हम योगी आदित्यनाथ की सोच पर सवाल नहीं उठा रहे हैं. ये केवल उनकी नहीं, बहुत सारे लोगों की सोच है. सदियों पुरानी. ये कि बाहर का काम आदमी के जिम्मे होता है और घर संभालना औरत की जिम्मेदारी होती है. जंग पर भी आदमी लड़ने जाता है, औरत उसके लौटने की दुआ करती है. घर पर उसका इंतजार करती है. ऐसे में अगर कोई औरत रात में घर से बाहर निकलकर अपनी आवाज़ बुलंद कर रही है, तो दिक्कत होना तो लाजिमी है!



वीडियो देखें:

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