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आपकी बच्चेदानी के लिए ये आसन एकदम सही साबित होंगे!

मलासन करिए, परिवृत्त जानु शीर्षासन और बद्ध कोणासन भी करिए!

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गर्भाशय की समस्या को नज़रंदाज़ करना खतरनाक

ऐसे कई योग-आसन हैं जो आपके यूटरस यानी बच्चेदानी को हेल्दी रखने में मदद कर सकते हैं. योगा टीचर स्मृति वशिष्ठ ने अपने इन्स्टाग्राम पर पोस्ट करके बताया कुछ ऐसे आसनों के बारे में जो ख़ून के प्रवाह को सही रखते हैं और अंडाशय की क्वॉलिटी को बढ़ाते हैं. और वो हम आपको बताएंगे - 

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बद्ध कोणासन? (Baddha Konasana)

इसे अंग्रेजी में Cobbler Pose भी कहा जाता है. इसके अलावा इस आसन को 'तितली आसन' या Butterfly Pose भी कहते हैं. इस आसन को करने के लिए आपको ये सिंपल स्टेप्स फॉलो करने हैं.

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# योग मैट पर बैठ जाएं और अपनी पीठ सीधी कर लें. अपने घुटनों को मोड़ें और अपने पैरों के तलवों को एक साथ ले आयें. दोनों तलवे एक दूसरे को छूने चाहिए. 
# पैरों को पीछे की ओर लाएं और कमर को सीधा करने की कोशिश करें. 
# अब आपको अपने घुटनों को हल्का-सा प्रेशर देना है और उन्हें ज़मीन पर टच कराना है. जब आप घुटनों को ज़मीन से लगायें, तो आपको थोड़ा आगे की तरफ झुकना है.
# इसके बाद घुटनों को ऊपर छाती की तरफ ले जाएं और टच करने की कोशिश करें. जब घुटने ऊपर की तरफ जाएं, तो सांस अन्दर लेनी है और नीचे जाने पर सांस बाहर छोड़नी है. ये एक रिपिटेशन हो गया. शुरुआत में आप इसे 10-15 बार कर सकते हैं और धीरे-धीरे इसे बढ़ा सकते हैं.

परिवृत्त जानु शीर्षासन (Parivaritta Janu Shirshasana)

स्मृति ने इस आसन में थोड़े बदलाव किए हैं. इस आसन को करने के लिए आपको ये सिंपल स्टेप्स फॉलो करने हैं:

# सबसे पहले आपको सीधा बैठना है. अब एक घुटने को आगे की तरफ लाकर मोड़ना है और दूसरे पैर को साइड में ले जाकर सीधा कर लेना है. 
# अब अपने हाथ ऊपर की ओर ले जाकर सीधा कर लें और आगे झुकें. आपके हाथ ज़मीन को टच करने चाहिए. जितना कम्फर्टेबल हो उतना ही झुकें. ये एक रिपिटेशन है. 
# हाथ ऊपर ले जाते समय सांस अन्दर लें और नीचे झुकते समय सांस को बाहर छोडे़ंं.

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मलासन (Malasan)

मलासन को गारलैंड पोज (Garland Or Malasana Pose) के तौर पर भी जाना जाता है. ये एक स्‍क्‍वाटिंग एक्‍सरसाइज़ है. इसे करना बहुत ही आसान है. मलासन करने के लिए आपको स्‍क्‍वाट पोज़िशन में बैठना है और अपनी कमर एकदम सीखी रखनी है. अपने कंधों को रिलैक्स्ड रखें और सांस अन्दर बाहर छोडें. इसके बाद अपने पैरों को सीधा करते हुए इस नॉर्मल पोजिशन में बैठ जाएं. 

फिर भी, आसन है और स्वास्थ्य की बात है, अपने स्वास्थ्य और अपनी स्थितियों के बारे में खुद निर्णय लें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टरी सलाह जरूर लें.

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