एक बच्चा पैदा हुआ. पैदा होते ही उसे सिंगापुर की नागरिकता मिली. क्योंकि जब वो अपनी मां के गर्भ में था तब उसके माता-पिता ने सिंगापुर की नागरिकता ले ली थी. वो बच्चा भारतीय कहलाना चाहता था. उसने भारत की नागरिकता के लिए अप्लाई किया. पांच साल की कानूनी लड़ाई के बाद अब मद्रास हाईकोर्ट ने उसे भारत की नागरिकता देने का रास्ता साफ कर दिया है.
गर्भ में पल रहा बच्चा विदेशी या भारतीय, हाई कोर्ट के फैसले ने झगड़ा शांत कर दिया
सिंगापुर के रहने वाले प्रणव की नागरिकता पर मद्रास हाईकोर्ट ने क्या कहा?


जिस बच्चे की हम बात कर रहे हैं उसका नाम प्रणव श्रीनिवासन है. उनका जन्म 1999 में हुआ था. दिसंबर, 1998 में जब वो अपनी मां के गर्भ में थे तब उनके माता-पिता ने सिंगापुर की नागरिकता ले ली थी. 2017 में प्रणव ने सिंगापुर के भारतीय दूतावास में नागरिकता के लिए आवेदन किया था. लेकिन गृह मंत्रालय ने 30 अप्रैल, 2019 को उनके आवेदन को खारिज़ कर दिया.
इसके बाद प्रणव ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया. हाईकोर्ट में जस्टिस अनीता सुमंत की बेंच ने कहा कि जब प्रणव के माता-पिता को सिंगापुर की नागरिकता मिली तब प्रणव साढ़े सात महीने के भ्रूण थे. वो एक बच्चे के तौर पर डेवलप हो चुके थे. इस आधार पर वो भारतीय नागरिकता हासिल कर सकते हैं, क्योंकि तब उनके माता-पिता भारतीय थे. जस्टिस अनीता सुमंत ने कहा,
“19 दिसंबर 1998 को (सिंगापुर का नागरिकता लेने वाला दिन) याचिकाकर्ता भ्रूण के रूप में साढ़े सात महीने का था. उन्होंने निश्चित रूप से एक बच्चे का दर्जा हासिल कर लिया था. इस स्थिति में वह अपने माता-पिता की भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकता है. इस प्रकार नागरिकता की बहाली के लिए धारा 8 (2) के तहत उपलब्ध सुरक्षा / अधिकार से इनकार नहीं किया जा सकता है.”
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही माता-पिता अपनी भारतीय नागरिकता (Indian citizenship) को त्याग दें और किसी अन्य देश की नागरिकता का विकल्प चुनें, लेकिन त्याग के समय उनका अजन्मा बच्चा भारतीय नागरिकता का हकदार है. मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, अगले चार हफ्तों के अंदर प्रणव को भारतीय नागरिकता के दस्तावेज जारी कर दिए जाएंगे.
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